UP में कांग्रेस को क्यों नहीं मिल पा रहा अपना नया BOSS, जानिए इसकी 5 बड़ी वजहें
लखनऊ, 09 जुलाई : उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुए 100 दिन बीत चुके हैं लेकिन कांग्रेस की यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी को अभी तक वह चेहरा नजर नहीं आया है जिसे वो यूपी कांग्रेस ईकाई की बागडोर सौंप सकें। बीजेपी चुनाव जीतने के बाद एक तरफ जहां मिशन 2024 की तैयारियों में जुट गई है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अभी आत्मचिंतन के दौर से बाहर नहीं निकल पा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो प्रियंका के पास बॉस चुनने के ऑप्शन काफी सीमित हैं जिसकी वजह से उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि कुछ नेता ऐसे भी हैं जो खुद ही कप्तान नहीं बनना चाह रहे हैं जिससे कांग्रेस की परेशानियां और बढ़ गईं हैं।

परेशानियों से लगातार जूझ रही प्रियंका की कांग्रेस
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को केवल दो सीटें ही मिलीं थी। देश के सबसे बड़े राज्य में सबसे पुरानी पार्टी का ये हश्र राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान करने वाला नहीं दिखता। राजनीतिक पंडितों की माने तो लगातार परेशानियों से जूझ रही कांग्रेस को खड़ा करने की कोशिश प्रियंका ने की लेकिन वह अपनी रणनीति में कामयाब नहीं हो पा रही हैं। हर बार चुनाव में जोर शोर से कांग्रेस का प्रचार शुरू करती हैं। कार्यक्रम किए जाते हैं लेकिन जब परिणाम आता है तो कांग्रेस की झोली में इक्का दुक्का सीटें ही रहती हैं। कांग्रेस की यह दुर्गति बताती है कि प्रियंका गांधी को अभी और कड़ी मेहनत करनी होगी।

पूरे यूपी से अध्यक्ष के लिए एक नाम क्यों नहीं मिल पा रहा
यूपी में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुए तीन महीने हो चुके हैं। चुनाव के दौरान यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू थे। आलम यह था कि दूसरों की सीट और कांग्रेस का जनाधार बढ़ाने निकले लल्लू अपनी ही सीट गंवा बैठे। जब विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तब कांग्रेस को महज दो सीट से ही संतोष करना पड़ा। इस हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अजय कुमार लल्लू ने अपना इस्तीफा सोनिया गांधी को भेज दिया था। उसके बाद से ही लगातार नए प्रदेश अध्यक्ष के नामों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं लेकिन कांग्रेस को एक नाम तय करना भी भारी पड़ रहा है।

पीएल पुनिया और प्रमोद तिवारी क्यों नहीं बनना चाहते अध्यक्ष
कांग्रेस के सूत्रों की माने तो यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी ने पीएल पुनिया और प्रमोद तिवारी पर दांव लगाने की कोशिश की लेकिन इन दोनों ही नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी उठाने से मना कर दिया। इन नेताओं को भी लग रहा है कि यूपी में जिस हालत में कांग्रेस है वहां से बाहर निकालना सबके बूते की बात नहीं है। कांग्रेस का संगठन जिलों में लगभग मृत प्राय हो गया है। इस संगठन को जिंदा करने के लिए प्रियंका ने विधानसभा चुनाव के दौरान काफी प्रयास किए और युवाओं को जोड़ने के लिए कई तरह के कार्यक्रम चलाए लेकिन सब नाकाफी साबित हुए। अब सबसे बड़ा सवाल है कि पुनिया और तिवारी के इंकार के बाद प्रदेश अध्यक्ष के लिए कौन सा नाम उपयुक्त होगा यह देखना होगा।

यूपी में दिग्गज नेताओं की कमी से जूझ रही कांग्रेस
दरअसल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी छोड़ दी थी। चुनाव या उसके कुछ पहले भी कई नेताओं ने पार्टी छोड़ी थी। कांग्रेस छोड़ने वालों में जितिन प्रसाद, आरपी सिंह, गयादीन अनुरागी, इमरान मशूद, ललितेश पति त्रिपाठी जैसे बड़े नेताओं के नाम शामिल हैं। इन नेताओं से पहले यूपी कांग्रेस की रीढ़ कही जाने वाली पुराने कांग्रेसी रीता बहुगुणा जोशी ने भी पिछले चुनाव में ही कांग्रेस को अलविदा कह दिया था। बीजेपी में जाने के बाद वह पहले यूपी में मंत्री बनीं फिर प्रयागराज से सांसद बन गईं। इसी तरह जितिन प्रसाद भी बीजेपी सरकार में लोक निर्माण मंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

कांग्रेस की इस सुस्त चाल का आम चुनाव पर पड़ेगा असर
यूपी में चुनाव दर चुनाव प्रियंका गांधी के राजनीतिक कौशल की परीक्षा हो रही है लेकिन हर बार वह नाकाम साबित हो रही हैं। कांग्रेस भी कई मोर्चों पर घिरी हुई है। एक तरफ पुराने साथी साथ छोड़ रहे हैं वहीं दूसरी ओर सोनिया और राहुल के खिलाफ चल रही ईडी की कार्रवाई ने भी इस परिवार को परेशान कर रखा है। राजनीतिक विश्लेषक कुमार पंकज कहते हैं कि इन चीजों का असर तो पड़ता ही है। पूरा परिवार परेशानियों में घिरा हुआ है ऐसे में प्रियंका इससे अछूती नहीं रह सकती हैं। हो सकता है यही वजह रही हो कि वह पार्टी के कामकाज पर उतना ध्यान नहीं दे पा रही हैं। हालांकि राजानीतिक पंडितों की माने तो प्रिंयका को जल्द से जल्द अपनी गति को बढ़ाना होगा और नए बॉस को लेकर संगठन के कामों को तेजी पकड़ानी पड़ेगी वरना काफी देर हो जाएगी और इसका असर 2024 में होने वाले आम चुनाव की तैयारियों पर भी पड़ सकता है।












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