Swami Anand Swaroop Maharaj कौन हैं? जिसके चक्कर में खूबसूरत साध्वी महांकुभ छोड़ने पर तैयार! बिलख-बिलखकर रोईं

Swami Anand Swaroop Maharaj Profile: महाकुंभ 2025 में प्रयागराज का संगम एक बार फिर साधु-संतों की अद्वितीय झलकियों और कहानियों से भरा हुआ है। रबड़ी बाबा, चाभी वाले बाबा, और बाहुबली बाबा जैसे अनोखे साधु-संतों के बाद अब सोशल मीडिया पर 'महाकुंभ (Mahakumbh 2025) की सबसे सुंदर साध्वी' कही जाने वाली हर्षा रिछारिया (Harsha Richhariya) सुर्खियां बटोर रही हैं।

लेकिन हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक भावुक वीडियो शेयर करके महाकुंभ से लौटने का ऐलान किया है, जिसमें उन्होंने शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप महाराज को जिम्मेदार ठहराया है। आखिर कौन हैं ये महाराज और क्या है पूरा मामला? आइए जानते हैं...

Who is Swami Anand Swaroop Maharaj

Who is Swami Anand Swaroop Maharaj: कौन हैं स्वामी आनंद स्वरूप महाराज?

स्वामी आनंद स्वरूप महाराज का जन्म 23 मार्च 1978 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुआ। वे बचपन से ही सामाजिक सेवा में रुचि रखते रहे और कॉलेज के दिनों में एबीवीपी से जुड़े। भारत में बढ़ती गरीबी और सनातन धर्म के कमजोर होते मूल्यों को देखकर उन्होंने अपना पूरा जीवन धर्म और समाज की सेवा के लिए समर्पित करने का फैसला किया।

गृहस्थ जीवन को त्यागकर उन्होंने संन्यास लिया और अपने गुरु अच्युतानंद भारती जी महाराज से दीक्षा प्राप्त की। इसके बाद वे हरिद्वार और द्वारका आश्रम में रहे, जहां उन्होंने वेद, उपनिषद और भगवद्गीता का गहन अध्ययन किया।

गंगा सफाई और राष्ट्रीय नदी घोषित करने का आंदोलन

स्वामी जी को हरिद्वार में गंगा नदी की खराब स्थिति देखकर गहरा दुख हुआ। उन्होंने 2008 में गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित कराने के लिए सत्याग्रह का नेतृत्व किया। इस आंदोलन ने सरकार को मजबूर किया कि गंगा को राष्ट्रीय नदी का दर्जा दिया जाए और व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया जाए।

बेंगलुरु तक जड़े हैं महाराज के तार!

2010 में स्वामी जी ने बेंगलुरु में दक्षिणा पिनाकिनी नदी को पुनर्जीवित करने का काम शुरू किया। 400 साल पुरानी यह नदी पूरी तरह सूख चुकी थी, लेकिन स्थानीय लोगों के सहयोग से दो साल के अंदर इसे फिर से बहने लायक बना दिया गया।

केरल में 'घर वापसी' और सांप्रदायिक शांति

2012 में केरल में सांप्रदायिक दंगे हुए थे। स्वामी जी ने वहां हिंसा रोकने और शांति स्थापित करने का काम किया। उनकी उपस्थिति और शिक्षाओं ने 560 मुस्लिम और ईसाई परिवारों को फिर से सनातन धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने वहां एक आश्रम की स्थापना भी की।

क्या कहा स्वामी ने हर्षा को लेकर?

  • हर्षा रिछारिया ने अपने वीडियो में स्वामी जी पर महाकुंभ छोड़ने का आरोप लगाया। जवाब में स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि धर्म की रक्षा के लिए गलत कार्यों को रोकना उनका फर्ज है। उन्होंने कहा कि भगवा वस्त्र पहनकर धर्म का अनादर करना स्वीकार्य नहीं है।
  • महाकुंभ के दौरान, स्वामी जी ने कहा कि धर्म का दिखावा खतरनाक है। साधु-संतों का काम समाज को सही दिशा देना है, न कि प्रदर्शन करना। उन्होंने साधु-संतों को लोभ, मोह और भोग से दूर रहने की सलाह दी। साध्वी हर्षा के आरोपों पर उन्होंने कहा कि अगर कोई धर्म का मजाक बना रहा है, तो उसे रोकना मेरा कर्तव्य है। भगवा वस्त्र पहनकर गलत संदेश देना धर्म के विरुद्ध है।

महाकुंभ 2025 में यह विवाद धर्म और समाज के सामने कई सवाल खड़े करता है। क्या धर्म प्रदर्शन का माध्यम बन रहा है, या साधु-संत अपनी भूमिका सही तरह से निभा रहे हैं? स्वामी आनंद स्वरूप महाराज और साध्वी हर्षा के बीच का यह विवाद धर्म और समाज के प्रति हमारी सोच को फिर से समझने का मौका देता है।

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(नोट- खबर के इनपुट मीडिया सोर्स व स्वामी आनंद स्वरूप महाराज की वेबसाइट से ली गई है।)

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