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Khushi Dubey:बिकरू कांड वाली खुशी दुबे कौन है? क्यों चर्चा में है? अखिलेश से क्या है ब्राह्मण लड़की का कनेक्शन

who is Khushi dubey: लखनऊ के एक प्राइवेट अस्पताल के बाहर खड़ी एक युवती, आंखों में राहत और चेहरे पर थकान, मोबाइल कैमरे के सामने हाथ जोड़कर वो कहती है, ''मेरी मां की जान बच गई। अखिलेश यादव जी, एक ब्राह्मण बेटी की मदद के लिए धन्यवाद।'' ये लड़की है खुशी दुबे, वही खुशी दुबे, जिसका नाम 2020 के कुख्यात बिकरू कांड के बाद पूरे देश में गूंज गया था। अब चार साल बाद उसकी जिंदगी एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह किसी अपराध से जुड़ी नहीं बल्कि उसकी मां की जान बचाने की जंग है।

क्यों अचानक चर्चा में आ गई खुशी दुबे

खुशी दुबे 11 जनवरी को ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो के जरिए सामने आईं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को सार्वजनिक तौर पर धन्यवाद कहा। वजह थी उनकी मां गायत्री देवी का ऑपरेशन। गायत्री देवी लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। डॉक्टरों ने ऑपरेशन को जरूरी बताया था, लेकिन परिवार की हालत इतनी कमजोर थी कि इलाज कराना नामुमकिन हो गया था। कई जगह मदद मांगी गई, लेकिन कहीं से कोई सहारा नहीं मिला।

who is Khushi dubey

आखिरकार खुशी ने अखिलेश यादव से संपर्क किया। इसके बाद सपा के निर्देश पर लखनऊ के एक निजी अस्पताल में उनकी मां का ऑपरेशन कराया गया। दवाइयों और इलाज का पूरा खर्च पार्टी की तरफ से उठाया गया। ऑपरेशन सफल रहा और गायत्री देवी अब खतरे से बाहर हैं।

वीडियो में क्यों बोलीं 'ब्राह्मण बेटी की मदद'

खुशी दुबे के वीडियो ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया। उन्होंने खुद को "ब्राह्मण बेटी" बताते हुए अखिलेश यादव का शुक्रिया अदा किया। यह लाइन इसलिए चर्चा में आ गई क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाति समीकरण बेहद अहम माने जाते हैं।

सपा नेताओं का कहना है कि सरकार ने न तो खुशी की मां के इलाज में कोई मदद की और न ही कोई आर्थिक सहायता दी। सपा प्रदेश सचिव आशीष चौबे और जिलाध्यक्ष मुनींद्र शुक्ला ने इसे सरकार की संवेदनहीनता बताया।

कौन है खुशी दुबे, जिसकी किस्मत शादी के दो दिन बाद बदल गई

खुशी दुबे वही लड़की हैं, जिनकी शादी 29 जून 2020 को अमर दुबे से हुई थी। अमर दुबे गैंगस्टर विकास दुबे का भतीजा और उसका सबसे करीबी आदमी था। शादी के सिर्फ दो दिन बाद 2 जुलाई की रात बिकरू गांव में वो कांड हुआ, जिसने पूरे देश को हिला दिया। पुलिस टीम जब विकास दुबे को पकड़ने पहुंची तो घात लगाकर बैठे बदमाशों ने हमला कर दिया।

DSP समेत 8 पुलिसकर्मी मारे गए। इसके बाद यूपी में एनकाउंटरों की बाढ़ आ गई। अमर दुबे को भी एसटीएफ ने मार गिराया और विकास दुबे भी एनकाउंटर में मारा गया।

खुशी उस वक्त महज साढ़े सोलह साल की थी। नई दुल्हन, जिसे अभी अपने पति और ससुराल को ठीक से जानने का मौका भी नहीं मिला था, वो अचानक विधवा हो गई।

who is Khushi dubey

दो दिन की दुल्हन से जेल तक का सफर

अमर दुबे के मारे जाने के कुछ दिन बाद पुलिस खुशी को पूछताछ के लिए ले गई। पूछताछ चार दिन चली और 8 जुलाई 2020 को उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस का आरोप था कि खुशी ने हमले के वक्त कारतूस उठाकर अमर को दिए और गैंग की मदद की। खुशी कहती है कि उसे नहीं पता था कि उस पर इतने गंभीर आरोप लगेंगे। जेल में उसकी तबीयत खराब होने लगी, नाक और मुंह से खून आने लगा। मां की याद में वह दिन भर रोती रहती थी।

30 महीने की जेल और सुप्रीम कोर्ट से राहत

खुशी को करीब ढाई साल जेल में रहना पड़ा। इस दौरान उसके माता पिता जमानत के लिए अदालतों के चक्कर काटते रहे। करीब 95 तारीखों के बाद आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने उसे जमानत दी। जेल से बाहर निकलते ही उसे पता चला कि परिवार की हालत और खराब हो चुकी है। मां गायत्री देवी की तबीयत बिगड़ चुकी थी और इलाज के पैसे तक नहीं थे।

मां की बीमारी ने फिर तोड़ा हौसला, अखिलेश यादव से मिला सहारा

जेल से निकलकर खुशी अपने परिवार को संभालने की कोशिश कर रही थी, तभी मां की हालत गंभीर हो गई। डॉक्टरों ने ऑपरेशन बताया, लेकिन घर में इतने पैसे नहीं थे कि इलाज हो सके। इसी मजबूरी में उसने अखिलेश यादव से संपर्क किया.

सपा प्रमुख के निर्देश पर लखनऊ में ऑपरेशन कराया गया। पार्टी की नेता पूजा शुक्ला ने पूरे इलाज की व्यवस्था कराई। अब खुशी की मां की हालत स्थिर है और जल्द घर लौटने की उम्मीद है। इसी के बाद खुशी ने वीडियो जारी कर अखिलेश यादव को बड़े भाई की तरह मदद करने वाला बताया।

अब क्या चाहती है खुशी दुबे?

खुशी कहती है कि वह अब अपने परिवार के साथ रहकर पढ़ाई करना चाहती है। पहले उसका सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन जेल के अनुभव ने उसे बदल दिया। अब वह वकील बनना चाहती है ताकि अपने जैसे बेगुनाह लोगों को न्याय दिला सके। आज भी उसके घर के बाहर लगे CCTV कैमरे उसे उस बीते दौर की याद दिलाते हैं। उसे लगता है जैसे वह अब भी किसी न किसी निगरानी में है।

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