जब योगी आदित्यनाथ सांसद रहते हुए 11 दिनों तक जेल में रहे
लखनऊ, 19 मार्च: योगी आदित्यनाथ दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने वाले हैं। लेकिन एक समय वो भी था जब सांसद रहते हुए उन्हें गोरखपुर की जेल में 11 दिनों तक रहना पड़ा था। इस घटना ने उनके राजनीतिक जीवन पर गहरा प्रभाव डाला था। उनके आत्मसम्मान को इतनी ठेस पहुंची थी कि वे संसद में रो पड़े थे। उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे। योगी आदित्यनाथ ने भरी संसद में कहा था कि उन्हें राजनीतिक पूर्वाग्रह के कारण प्रताड़ित किया गया था। तब यह आरोप लगा था कि मुलायम सिंह यादव ने राजनीतिक फायदे के लिए योगी आदित्यनाथ की गिरफ्तारी करायी थी। लेकिन जब कुछ दिनों के बाद विधानसभा के चुनाव हुए तो मुलायम सिंह यादव के मंसूबे धरे के धरे रह गये।

गिरफ्तारी का घटनाक्रम
26 जनवरी 2007 को गोरखपुर में साम्प्रदायिक दंगा हुआ था। योगी आदित्यनाथ सांसद थे। घटना के दिन वे कुशीनगर में थे। दंगा के कारण गोरखपुर में कर्फ्यू लगा दिया गया था। योगी आदित्यनाथ ने इस घटना के खिलाफ गोरखपुर में धरना देने की घोषणा कर दी। वे अपने समर्थकों के साथ कुशीनगर से गोरखपुर के लिए रवाना हुए। उस समय गोरखपुर के जिलाधिकारी थे डॉ. हरिओम। योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर की सीमा में प्रवेश करने के पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी का आदेश डीएम हरिओम ने दिया था। योगी आदित्यनाथ पर शांति व्यवस्था भंग करने की धारा लगायी गयी थी। फिर उन्हें जेल भेज दिया गया। वे 11 दिनों तक जेल में फिर उसके बाद बेल मिली। योगी आदित्यनाथ की गिरफ्तारी से लोगों की नाराजगी और बढ़ गयी। मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मामला ठंडा करने के लिए गोरखपुर के जिलाधिकारी डॉ. हरिओम को सस्पेंड कर दिया। सीतापुर के डीएम राकेश गोयल को आनन-फानन में हेलीकॉप्टर से बुला कर गोरखपुर का नया डीएम बनाया गया। लेकिन एक हफ्ते बाद ही मुलायम सिंह ने हरिओम को निलंबन से मुक्त कर दिया। बाद में डॉ. हरिओम को मुलायम सिंह और अखिलेश यादव का करीबी अफसर गिना जाने लगा।

गिरफ्तारी की पीड़ा
7 फरवरी 2007 को योगी आदित्यनाथ जेल से रिहा हुए थे। 12 मार्च 2007 को लोकसभा की बैठक चल रही थी। तत्कालीन स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने शून्यकाल के दौरान योगी आदित्यनाथ को अपनी बात रखने का मौका दिया। योगी आदित्यनाथ जब बोलने के लिए उठे तब उनके चेहरे पर पीड़ा और आक्रोश के भाव थे। भावावेश में उनकी उंगलियां कांप रहीं थीं। बोलना शुरू किया कि गला भर्रा गया। फिर वे अपनी गिरफ्तारी की घटना बताने लगे। कई बार आंख से आंसू निकले, गला रूंधा। उन्होंने सदन से अपने संरक्षण की मांग की। स्पीकर सोमनाथ चटर्जी भी भावुक हो गये। योगी आदित्यनाथ ने कहा, महोदय ! राज्य सरकार ने मुझे जानबूझ कर प्रताड़ित किया। आम तौर पर किसी सांसद को गैरआपराधिक मामले में 24 घंटे से अधिक जेल में नहीं रखा जा सकता फिर उन्हें कैसे 11 दिन तक जेल में रखा गया ? लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें भरोसा दिया कि वे खुद इस मामले को देखेंगे। अब सवाल ये है कि योगी आदित्यनाथ को उस समय गिरफ्तार क्यों किया गया था ? क्या उन्हें केवल इसलिए गिरफ्तार किया गया था क्यों कि वे कर्फ्यू वाले इलाके में धरना देने के लिए अड़े हुए थे ? अगर हां, तो क्या यह इतना बड़ा मामला था कि एक सांसद को 11 दिन तक जेल में रखा जाए ?

योगी आदित्यनाथ की गिरफ्तारी और मुलायम सिंह की मंशा
उस समय इस बात की चर्चा थी कि मुलायम सिंह यादव ने तुष्टिकरण के लिए योगी आदित्यनाथ को गिरफ्तार कराया था। योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कोई बहुत मामला नहीं था। लेकिन उन्हें आनन फानन में गिरफ्तार कर लिया गया था। मुलायम सिंह को यह लगता था कि इस गिरफ्तारी से उनकी अल्पसंख्यक समाज में पैठ बढ़ेगी। मुलायम सिंह की दूसरी आशंका ये थी कि अगर साम्प्रदायिक तनाव बढ़ता गया तो मतों का ध्रुवीकरण भाजपा की तरफ हो सकता है। 28 जनवरी 2007 को ये घटना हुई ती। अप्रैल-मई में विधानसभा के चुनाव होने थे। अपनी छवि बनाने और भाजपा को रोकने की गरज से मुलायम सिंह ने त्वरित कार्रवाई के लिए आदेश दिया। लेकिन ऐसा करने के बाद भी मुलायम सिंह मुस्लिम समुदाय को खुश नहीं कर सके। उनका मंसूबा पूरा नहीं हुआ। जब बिधानसभा के चुनाव हुए तो मुस्लिम समुदाय ने बसपा का समर्थन कर दिया। मायावती ने 206 सीटें जीत कर पहली बार अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनायी।

जब घूमा वक्त का पहिया
योगी आदित्यनाथ को जिस अफसर ने गिरफ्तार करने का आदेश दिया था उसे वे कभी भूले नहीं। गिरफ्तारी से पहले उनके साथ तैनात सरकारी सुरक्षाकर्मियों को हटा दिया गया था। वक्त का पहिया घूमा। 2017 में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। शासन संभालने के कुछ दिनों के बाद उन्होंने 20 आइएएस अधिकारियों का तबादला किया। इसे रुटीन फेरबदल बताया गया। लेकिन तबादले की इस सूची में डॉ. हरिओम का भी नाम था। उस समय हरिओम संस्कृति विभाग में सचिव थे। जिन 20 अधिकारियों का तबादला किया गया उनमें हरिओम समेत 7 को वेटिंग फॉर पोस्टिंग में डाल दिया गया। उन्हें कोई तैनाती नहीं मिली। तब ये कहा गया था कि योगी आदित्यनाथ ने हरिओम से अपना पुरान हिसाब चुकता किया है। योगी आदित्यनाथ की गिरफ्तारी के समय हरिओम पर भी पक्षपात का आरोप लगा था। 2007 में योगी के आंसुओं ने एक भावुक कहानी लिखी थी। लेकिन 2022 में स्थिति बदल चुकी है। अब उनकी पहचान बुलडोजर वाले बाबा की बन गयी है। आंसुओं से बुलडोजर तक का ये सफर बहुत चुनौतीपूर्ण रहा।
-
3 शादियां कर चुकीं 44 साल की फेमस एक्ट्रेस ने मोहनलाल संग शूट किया ऐसा इंटीमेट सीन, रखी 2 शर्तें और फिर जो हुआ -
Iran Israel War: 'भारत युद्ध रुकवा सकता है', खामेनेई के दूत ने कही ऐसी बात, टेंशन में ट्रंप -
Khushbu Sundar: इस मुस्लिम नेता के हिंदू पति की राजनीति में एंट्री, कभी लगा था Love Jihad का आरोप -
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच सोना में भारी गिरावट, अबतक 16000 सस्ता! 22k और 18k का अब ये है लेटेस्ट रेट -
Balen Shah Nepal PM: पीएम मोदी के नक्शेकदम पर बालेन शाह, नेपाल में अपनाया बीजेपी का ये फॉर्मूला -
Petrol Diesel Price: आपके शहर में कितना सस्ता हुआ पेट्रोल-डीजल? ₹10 की कटौती के बाद ये रही नई रेट लिस्ट -
Iran Vs America War: कब खत्म होगा अमेरिका ईरान युद्ध, ट्रंप के विदेश मंत्री ने बता दी तारीख -
Israel-Iran War: होर्मुज के बाद अब लाल सागर बंद करने की तैयारी, ईरान के खतरनाक प्लान लीक, भारत पर क्या असर? -
Delhi Power Cut: विकेंड पर दिल्ली के आधे हिस्से में 'ब्लैकआउट', शनिवार को इन पॉश इलाकों में नहीं आएगी बिजली -
PM Kisan Yojana: 31 मार्च से पहले कर लें यह काम, वरना अटक जाएगी पीएम किसान की अगली किस्त -
Mumbai Gold Silver Rate Today: सोना-चांदी के गिरे भाव, निवेशकों का चढ़ा पारा, जाने मुंबई में कहां पहुंचा रेट? -
LPG Price Today: 1 अप्रैल से बढ़ने वाले हैं सिलेंडर के दाम? आपके शहर में आज क्या है रेट?












Click it and Unblock the Notifications