ज्ञानवापी पर ASI रिपोर्ट पर Aligarh Muslim University के प्रोफेसर इरफान हबीब ने क्या कहा?
Gyanvapi Masjid: ज्ञानवापी मस्जिद में ASI द्वारा किये गए सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद हिन्दू पक्ष की ओर से कई दावे किए गए हैं। हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने गुरुवार को रिपोर्ट सार्वजनिक की। उन्होंने कहना है कि रिपोर्ट में सामने आया है कि ज्ञानवापी में पहले हिंदू मंदिर था जिसे बाद में मस्जिद में परिवर्तित किया गया।
इस पर मध्यकालीन और प्राचीन भारत के ज्ञाता एवं पद्मभूषण से सम्मानित प्रोफेसर इरफान हबीब ने प्रतिक्रिया दी है। आज तक की एक रिपोर्ट के मुताबिक अलीगढ़ में प्रोफेसर इरफान हबीब का कहना है, "ये एक तरह से सही है। मगर, क्या अब मुल्क में यही चलता रहेगा कि कहां मस्जिद तोड़कर मंदिर बनाए गए और कहां मंदिर तोड़कर मस्जिद।"

उन्होंने कहा, "बाबरी मस्जिद का भी कोई तारीखी सबूत नहीं था कि वहां कोई मंदिर था या नहीं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दे दिया।" हालांकि, उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद की जगह मंदिर होने का जिक्र कई किताबों में भी आया है। मगर, क्या देश में यही चलता रहेगा।
उन्होंने सवाल किया कि देश में मस्जिदों को तोड़कर मंदिर बनाने का सिलसिला आखिर कब तक चलता रहेगा? जहां मस्जिद हैं उन्हें तोड़कर मंदिर बना दिया जाए, ये सब गलत है।
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नहीं थी सर्वे की जरुरत...
उन्होंने ASI के सर्वे पर सवाल उठाते हुए कहा, "इतने सालों से वहां मस्जिद है। क्यों उसको बदलकर मंदिर बनाया जा रहा है। बाबरी मस्जिद मामले में जो हुआ, उसका भी कोई तारीखी सबूत नहीं है कि वहां कोई मंदिर था। मगर, सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया। इतिहासकारों से ज्यादा अब ये जरूरत है कि मुल्क में आप क्या बनना चाह रहे हो।
प्रोफेसर ने आगे कहा, "ज्ञानवापी मामले में ASI के सर्वे की कोई जरूरत ही नहीं थी। सर जदुनाथ सरकार की किताब पढ़ लेते तो सब समझ में आ जाता। अब जाहिल हैं, जिन्होंने नहीं पढ़ी। उसका क्या किया जाए।"
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कब और क्यों हुआ सर्वेक्षण?
हिंदू याचिकाकर्ताओं द्वारा दावा किए जाने के बाद कि 17वीं शताब्दी की ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण पहले से मौजूद मंदिर के ऊपर किया गया था, वाराणसी जिला अदालत ने जुलाई 2023 में 'विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण' का आदेश दिया था। एएसआई ने यह निर्धारित करने के लिए पिछले साल सर्वेक्षण किया था कि क्या मस्जिद पहले से मौजूद हिंदू मंदिर के ऊपर बनाई गई थी।
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