किताब पर अर्ध-नग्न महिला, नया कुरान लिखने का दावा..., मुस्लिम से हिन्दू बनने वाले 'वसीम रिजवी' के 5 विवाद
किताब पर अर्ध-नग्न महिला, नया कुरान लिखने का दावा..., मुस्लिम से हिन्दू बनने वाले 'वसीम रिजवी' के 5 विवाद
नई दिल्ली, 07 दिसंबर: पूर्व उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने इस्लाम को त्याग दिया है और हिंदू धर्म को अपना लिया है। हिंदू धर्म (सनातन धर्म) को स्वीकार करने के बादवसीम रिजवी ने अपना एक नया नाम रखा है, जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी है। यानी अब वसीम रिजवी का अधिकारिक नाम जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी है। सोमवार (06 दिसंबर) रूपांतरण समारोह गाजियाबाद में डासना देवी मंदिर में प्रमुख पुजारी याटी नरसिनहानंद गिरि महाराज की उपस्थिति में हुआ है। मुस्लिम से हिन्दू बनने वाले 'वसीम रिजवी' चर्चा में आ गए हैं। वसीम रिजवी यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष थे, जो एक दशक से अधिक समय तक और पिछले साल तक इस पद पर थे। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है कि विसमी रिजवी विवादों में आए हैं, विवादों से रिजवी का पुराना नाता है। उन्होंने कई ऐसे बयान दिए हैं, जिसको लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। तो आए जानें वसीम रिजवी के बारे में और उनके विवादित बयानों के बारे में?

सपा की टिकट पर पहला चुनाव, आजम खान के करीबी थे रिजवी
वसीम रिजवी के पिता रेलवे कर्मचारी थे लेकिन फिर भी इन्होंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं की है। साल 2000 में रिजवी ने समाजवादी पार्टी (एसपी) के सदस्य के रूप में लखनऊ में स्थानीय निकाय चुनाव लड़ा था। ये उनके राजनीतिक जीवन का पहला चुनाव था। के कश्मीरी मोहल्ला वार्ड से एक नगरसेवक चुने गए थे। सपा में रिजवी को वरिष्ठ पार्टी के नेता आजम खान के करीब माना जाता था।
2008 में रिजवी शिया वक्फ बोर्ड का सदस्य बने। इसके बाद प्रभावशाली शिया क्लरिक कलबे जववाड़ के साथ उनका मतभेद हुआ,जिन्होंने धन को खत्म करने का आरोप लगाया। हालांकि इस विवाद के 6 साल बाद रिजवी को सपा से निष्कासित कर दिया गया था। हालांकि इस आरोप में रिजवी को अदालत से राहत मिली थी।

योगी के सत्ता में आने के बाद खुश हुए रिजवी!
2017 में बीजेपी में सत्ता में आने के बाद रिजवी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बहुत खुश दिकाई दिए। उन्होंने कई मौकों पर सीएम योगी की तारीफ की। अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2022 के पास आते ही उन्होंने सनातन धर्म को अपनाकर फिर से विवादों को जन्म दिया है। हिंदू धर्म में परिवर्तित, रिजवी ने खुद को त्यागी समुदाय से जोड़ा। वसीम रिजवी को अब जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी के रूप में जाना जाएगा।
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक रिजवी ने कहा, ''लोगों को मेरे नए नाम जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी का उपयोग करने में समय लगेगा लेकिन समय के साथ ऐसा होगा।" हिंदू धर्म के रूपांतरण के बाद, वसीम रिजवी ने कहा कि क्योंकि सनातन धर्म ने इसे दुनिया के शुद्ध धर्म है, इसलिए मैं इसे अपना रहा हूं।

किताब 'मोहम्मद' के कवर जब लगाया अर्ध-नग्न महिला की तस्वीर
वसीम रिजवी को लेकर सबसे गहरा विवाद उस वक्त हुआ, जब उन्होंने अपनी पुस्तक 'मोहम्मद' के प्रकाशन किया। ये साल 2021 के नवंबर की बात है। किताब के कवर पर एक अर्ध-नग्न महिला के साथ एक आदमी को चित्रित किया गया। किताब के कवर पर लिखा है कि '' मोहम्मद...अल्लाह के आखिरी पैगंबर मोहम्मद पर आधारित''
किताब के पैगम्बर मोहम्मद पर आधिरत होना और उसके कवर पर अर्ध-नग्न महिला की तस्वीर ने कई मुस्लिम समुदायों को परेशान कर दिया है। पुस्तक का विरोध सुन्नी और शिया मुस्लिम संगठनों दोनों ने किया था। अखिल भारतीय शिया व्यक्तिगत कानून बोर्ड (एआईएसपीएलबी) समेत कुछ धार्मिक संगठनों ने उन्हें नोटिस भेजा था। वहीं कई लोगों ने यूपी सरकार से संपर्क किया, एफआईआर का अनुरोध किया था। पुस्तक 4 नवंबर 2021 को गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में जारी की गई थी।

वसीम रिजवी का 'नया कुरान' लिखने का दावा
वसीम रिजवी ने कुरान के 26 'अयतों' को चुनौती देने के बाद 'नया कुरान' लिखने का दावा किया था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत में सभी मदरसा और मुस्लिम संस्थानों में 'न्यू कुरान' के उपयोग को अधिकृत करने की अपील की थी।
वसीम रिजवी ने कहा था, "मैं देश भर में विभिन्न मदरसा और मुस्लिम शिक्षा संस्थानों के शिक्षा पाठ्यक्रम में इस नए कुरान को शामिल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करता हूं। कुरान का यह पुनः सक्रिय संस्करण सही कुरान है और यह जल्द ही लोगों के लिए बाजार पर उपलब्ध होगा।"
वसीम रिजवी ने कुरान के 26 छंदों को हटाने की भी अपील की थी। वो इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गए थे और कहा था कि वे आतंकवाद और जिहाद को बढ़ावा देते हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था, कहा था कि यह "बिल्कुल निराशाजनक" है।

तीन तलाक पर कही थी ये बात
जब 2017 में लोकसभा में तीन तालाक बिल पारित किया गया था, जबकि कई मुस्लिम संगठनों ने इस बिल का विरोध किया था तो वसीम रिजवी ने इसकी वकालत की थी। उन्होंने मोदी सरकार की जमकर तारीफ की थी।

मदरसा को बंद करने की रिजवी ने की थी मांग
2018 में वसीम रिजवी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था और मदरसा को हमेशा के लिए बंद करने की मांग की थी। उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि मदरसा को खत्म कर देना चाहिए क्योंकि वे "मौलवियों के लिए एक व्यावसायिक उद्यम बन गए हैं और मुसलमानों के लिए नौकरियों को सुनिश्चित करने के बजाय आतंकवादियों को उत्पन्न कर रहे हैं।''

मोदी से रिजवी ने की थी ये विवादित मांग!
पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी को एक और पत्र में वसीम रिजवी ने मांग की कि 1991 के पूजा अधिनियम के स्थानों को निरस्त किया जाए और एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जा सकता है। जिसमें प्राचीन मंदिरों को तोड़कर बनाए गए मस्जिदों की भूमि को पुन लेने की बात कही गई थी। उन्हों यह भी कहा था कि "जानवरों जैसे बच्चों को जन्म देना" देश के लिए हानिकारक है।












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