यूपी चुनाव: सूबे में यहां दिखेगा सपा-कांग्रेस का इकलौता दंगल, ये है वजह

कांग्रेस के नामांकन में भी समाजवादी पार्टी के समर्थकों की मौजूदगी से ये बाते साफ हो चुकी थी कि इस सीट पर सपा और कांग्रेस संयुक्त रूप से चुनाव लड़ेगी।

वाराणसी। इस बार के विधानसभा चुनाव में कई नेताओ के दंगल देखें गए। लेकिन वाराणसी की कैंट विधानसभा का ये चुनावी दंगल सूबे का पहला दंगल साबित होने वाला हैं। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के युवराजों ने गठबंधन कर पहले ही यह तय कर दिया था कि इस विधानसभा चुनाव में किस पार्टी का उम्मीदवार कहां से चुनाव के मैदान में होगा। लेकिन, समाजवादी पार्टी ने अपने ही प्रत्याशी को वाराणसी की उत्तरी विधानसभा से कांग्रेस के सिम्बल पर चुनाव लड़वाने का मन बनाया लिया है। ऐसे में कैंट विधानसभा में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी एक दूसरे के खिलाफ अपनी ताल ठोकने को तैयार हो चुके हैं। जबकि कांग्रेस के नामांकन में भी समाजवादी पार्टी के समर्थकों की मौजूदगी से ये बाते साफ हो चुकी थी कि इस सीट पर सपा और कांग्रेस संयुक्त रूप से चुनाव लड़ेगी।

कांग्रेस की तरफ से अनिल श्रीवास्तव हैं चुनावी दंगल में

कांग्रेस की तरफ से अनिल श्रीवास्तव हैं चुनावी दंगल में

बीते दो दिनों पहले ही शहर कैंट सीट पर कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार अनिल श्रीवास्तव को अपना प्रत्याशी बना कर नामांकन करवाया दिया था और इस नॉमिनेशन जूलुस में कांग्रेस के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के लोग भी शामिल हुए थे जिसके बाद ये साफ हो गया था कि समाजवादी पार्टी ने अपने गठबंधन के पहले भले ही रीबू श्रीवास्तव को प्रत्याशी बना दिया था लेकिन अब उन्हें इस सीट पर चुनाव नहीं लड़ाएगी। इस बात की पुष्टि के बाद से ही कांग्रेस के लोगों ने अनिल श्रीवास्तव के लिए घर-घर जाकर प्रचार भी करना शुरू कर दिया था। लेकिन बुधवार शाम से ही ये चर्चायें शुरू हो गयी थी कि समाजवादी पार्टी रीबू श्रीवास्तव को अपना प्रत्याशी घोषित कर सकती है। जिसके बाद से कांग्रेस के महकमे में हड़कंप मचना शुरू हो गया है। सूत्रों की माने तो इस सीट में वर्ग विशेष (मुस्लिमों) का वोट बैंक सबसे ज्यादा है। जिसके कारण पहले सपा ने ये सीट कांग्रेस की झोली में डाली। बता दें कि बीते विधानसभा चुनाव में अनिल श्रीवास्तव वोट पाने में दूसरे स्थान पर थे और इसी कारण जीत को देखते हुए अनिल को यहां का कैंडिडेट बनाया गया है।

रीबू की है कैंट विधानसभा पर अच्छी पकड़

रीबू की है कैंट विधानसभा पर अच्छी पकड़

दरअसल, रीबू श्रीवास्तव इसी सरकार में राज्य मंत्री भी रही हैं और अपने कार्यकाल में उनकी कैंट विधानसभा के साथ-साथ वाराणसी मंडल में अच्छी धाक भी है। जिसकी वजह है कि इन्होंने मंत्री रहते हुए कई बड़े-बड़े कार्य भी अपनी सरकार से बोल कर करवाये हैं। जबकि ये प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र हैं इसी कारण यहां की जनता उन्हें जमीनी नेता मानते हुए इनके साथ है। यहीं नहीं जब घोषणा के बाद रीबू के चुनाव लड़ने पर सवालिया निशान खड़े हो गए थे तो कैंट विधानसभा के लोगों ने सीएम से ये मांग की थी कि रीबू श्रीवास्तव को समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी बना कर उतारे। वहीं, रीबू के समर्थक सड़कों तक उत्तर आये जिसमें मुस्लिम धर्म गुरुओं ने भी साथ दिया था। जानकारों की माने तो समाजवादी पार्टी ने रीबू श्रीवास्तव को तीन फैक्टर के कारण कैंट का उम्मीदवार बनाया है।जिसमें नेता होना, टिकट बंटवारे पर विधानसभा के लोगों का विरोध करना और महिला होना माना जा रहा हैं। जिसमें महिला होना विशेष है क्योंकि इसी सीट पर सिटिंग विधायक महिला हैं और लगातार तीन बार से जीत रही हैं। वहीं, भाजपा में भी टिकट बंटवारे को लेकर वर्तमान प्रत्याशी का बीजेपी के समर्थक विरोध कर रहे हैं जिसका फायदा समाजवादी पार्टी उठाना चाहती है। यही वजह है कि शिवपाल के खेमे की इस नेता को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अपनी पार्टी का प्रत्याशी बना कर उतारने पर उतारु हैं।

बीजेपी को हो सकता है इस कलह से

बीजेपी को हो सकता है इस कलह से

बता दें कि इस सीट पर कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी का नामांकन दाखिल किया है और सपा के लोग भी साथ हो चुके थे ऐसे में इस सीट पर जहां समाजवादी पार्टी अपना फायदा देख रही है। वहीं दोनों पार्टियों को बड़ा नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। क्योंकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को जो लोग वोट करते हैं। वो ये मान चुके थे कि उन्हें एक ही जगह पर वोट करना है। ऐसे में अब इस चुनावी दंगल से दोनों प्रत्याशियों को वोट करने से एक बार भी भारतीय जनता पार्टी का फायदा हो सकता है।

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