वाराणसी: हिन्दू आतंकवाद के बयान पर आखिर फंस ही गए कमल हासन, कोर्ट ने दिया FIR का आदेश
वाराणसी। फिल्म अभिनेता ने हिन्दू आतंकवाद वाले बयान के बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया है। ये बात अलग है की साऊथ फिल्मों के कुछ अभिनेताओं ने कमल हसन का समर्थन किया है, लेकिन हिन्दू आतंकवाद पर दिए बयान पर वाराणसी के ACJM -06 कोर्ट में बनारस के रहने वाले शिवपुर के अधिवक्ता कमलेश चंद्र त्रिपाठी ने परिवाद दाखिल किया किया था। इस परिवाद की सुनवाई आज होने वाली थी और कमल हासन के दिए हुए बयान पर कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए अपने ही न्यायालय में कमल हासन पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने इस मामले पर अगली सुनवाई और अधिवक्ता के बयान दर्ज करने की तारीख 22 नवम्बर को मुकर्रर की है जिसमे कमलेश चंद्र त्रिपाठी के साथ ही कुछ और भी लोगों के बयान दर्ज किये जाएंगे जो कमल हसन के बयान से आहात हुए हैं।

3 साल की हो सकती है सजा
कमल हासन के उस बयान जिसमे हिन्दू आतंकवाद का मुद्दा अपने लेख और फिर सार्वजनिक बयान के बाद अधिवक्ता कमलेश त्रिपाठी ने एसीजेएम 6 के कोर्ट में एक याचिका दायर कर के कमल हासन के ऊपर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया था। याचिकाकर्ता कमलेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा की कमल हासन ने 90 करोड़ हिन्दूओं के सम्मान को ठेस पहुंचाया है। उन्होंने अपनी विचारधारा को सर्वजनिक करते हुए हिन्दू संघटनों ,हिन्दू त्यौहारों और संस्कृति को ठेस पहुंचाते हुए की ये हमारे त्योहार भय और आतंकवाद को बढ़ाने वाले है। इस की तहत कमलेश चंद्र त्रिपाठी ने आज एसीजेएम कोर्ट में फिल्म अभिनेता कमल हसन के खिलाफ धारा 295 ,298 A और सेक्सन 500 ,511 भारतीय दंड संहिता के तहत मुकदमा दर्ज किए जाने के लिए परिवाद दाखिल किया था। इस पर सुनवाई करते हुए ACJM - 06 के माननीय न्यायाधीश सुधाकर दुबे ने कमलेश के परिवाद और दस्तावेजों को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया हैं। बता दे की यही नहीं इस मामले में कोर्ट कड़े तेवर दिखाती रही। जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है उसमे एक सेक्सन में 3 साल की सजा का प्रावधान है।

बयान से 90 करोड़ हिन्दुओं की आस्था को ठेस
याचिकाकर्ता कमलेश चंद्र त्रिपाठी ने अपने परिवाद दाखिल करने के बाद मीडिया को बताया था कि अभिनेता कमल हसन के सार्वजनिक बयान की आज हिन्दू संगठन ,संस्कृति और त्यौहार हिन्दू आतंकवाद की श्रेणी में आ चुके हैं। इससे हमारे 90 करोड़ हिन्दुओं की आस्था को ठेस पहुंचा है, साथ ही साथ हमारे धर्माचार्यों को घृणा की दृष्टि से देखा जा रहा है। जब हम पत्थर में भी ईश्वर की मूरत मानकर उसकी पूजा करते है और हमारे त्यौहार अतिथि देवो भवः की नीति पर चलते हैं। ऐसे में आज उनके खिलाफ मुकदमा साथ ही कोर्ट के ये आग्रह किया गया है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़ी से कड़ी सजा सुनाई जाए।












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