UP में तीन दशकों में अक्टूबर में हुई ज्यादा बारिश, जानिए किन फसलों को हुआ नुकसान

उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों हुई भारी बारिश और तेज हवाओं ने राज्य भर में खड़ी खरीफ फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। विशेषज्ञों ने कहा कि इसका असर राज्य में रबी फसलों की बुवाई पर भी पड़ेगा। इसके अलावा, जिन किसानों ने मानसून में देरी के कारण इस बार कम बारिश की आशंका में तिलहन फसलों को चुना था, उनकी योजनाएं उलटी साबित हुई हैं। मौसम विभाग के अनुसार हालांकि पश्चिमी और पूर्वी यूपी में अभी भी बारिश होने की संभावना बनी हुई है।

किसान

आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय, अयोध्या में मौसम विभाग के प्रमुख सीताराम मिश्रा ने कहा कि, "पिछले तीन दशकों में लगभग 50 मिमी के औसत के मुकाबले अक्टूबर में अब तक 210-250 मिमी बारिश हुई है, जो कि 500% अधिक है। यह सामान्य से अधिक है। अधिक बारिश ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है। धान की फसल, जो जल्दी बोई गई थी, तेज हवाओं और बारिश के कारण गिर गई थी।

अतिरिक्त बारिश ने उन तिलहन फसलों को भी खराब कर दिया है जिन्हें कम या बिना सिंचाई की आवश्यकता होती है। गन्ने की फसल के साथ भी ऐसा ही है क्योंकि तेज हवाओं के कारण पौधों के उखड़ने से उपज पर काफी असर पड़ेगा।

अब बारिश हुई तो फसलों की नर्सरी पर पड़ेगा असर

मिश्रा ने कहा कि हालांकि इस पर एक अध्ययन किया जाना बाकी है। हमें लगता है कि देर से और अधिक बारिश का रबी फसलों की बुवाई पर बहुत प्रभाव पड़ेगा जो आमतौर पर 20 अक्टूबर तक किया जाता है। आलू और अन्य सब्जियों जैसी फसलों की नर्सरी खराब हो गई थी। पानी से भरे खेत जल्द नहीं सूखेंगे, खासकर अगर बारिश आने वाले सप्ताह में जारी रहती है।"

भारतीय मौसम विभाग के लखनऊ केंद्र के मुताबिक अगले दो दिनों तक पश्चिमी और पूर्वी यूपी में भारी बारिश और गरज के साथ जारी रहने की संभावना है। विभाग ने भविष्यवाणी की है कि इस सप्ताह राज्य के पूर्वी हिस्सों में भारी बारिश और आंधी के आसार बन रहे हैं।

इन जिलों में हुई थी ज्यादा बारिश

एक अधिकारी ने बताया कि जिन जिलों में पांच सेंटीमीटर से अधिक बारिश हुई उनमें लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या, बरेली, हाथरस, गोरखपुर, सीतापुर, बहराइच, जालौन और चित्रकूट शामिल हैं। भारी बारिश से धान की फसल को इतना नुकसान हुआ है कि किसानों ने कहा कि उन्हें अपने परिवार का पेट पालने के लिए चावल खरीदना होगा।

धान की फसल हुई प्रभावित उत्तर प्रदेश राइस मिल्स एसोसिएशन के अनुसार, इस महीने बारिश के कारण लगभग 60 प्रतिशत खड़ी धान की फसल प्रभावित हुई है। चावल मिल मालिकों ने सरकार से राज्य एजेंसियों द्वारा धान खरीद के मानदंडों में ढील देने को कहा है। आलू और दलहन की खड़ी फसल को भी बारिश से नुकसान पहुंचा है।

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