Exit Poll में भाजपा को बढ़त के बावजूद, अखिलेश के लिए खुशखबरी लेकर आए ये 'छिपे हुए आंकड़े'
लखनऊ, 08 मार्च। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के सभी सात चरण समाप्त हो चुके हैं और अब हर किसी को 10 मार्च का इंतजार है जब मतों की गणना होगी। 10 मार्च को नतीजे आने से पहले कई एग्जिट पोल सामने आए हैं जिसमे भारतीय जनता पार्टी को एक बार फिर से उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत मिलता दिख रहा है। इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल में भी भारतीय जनता पार्टी को उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत मिलता दिख रहा है। लेकिन एग्जिट पोल के आंकड़ों को देखें तो सपा मुखिया अखिलेश यादव के चेहरे पर मुस्कान जरूर देखने को मिलेगी। लेकिन यह मुस्कान जीत की खुशी में नहीं बदल सकती है। वोट फीसदी में बढ़ोतरी के बावजूद यह आंकड़ा भाजपा को मात देने के लिए पर्याप्त साबित होता नहीं दिख रहा है।
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भाजपा के वोट में सेंधमारी से चूकी सपा
एग्जिट पोल में समाजवादी पार्टी को वोटों के लिहाज से बड़ा फायदा होता दिख रहा है। पार्टी को ना सिर्फ पिछले चुनाव की तुलना में अधिक वोट मिल रहे हैं बल्कि पिछली बार की तुलना में पार्टी की सीटों में भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। लेकिन सपा के लिए मुश्किल की बात यह है कि सपा को यह वोट बसपा के वोटर्स से मिल रहे हैं, पार्टी भाजपा के वोटर्स में सेंधमारी करने में विफल रहेगी, यही वजह हैकि सपा को सीटों में उतनी बढ़ोतरी मिलती नहीं दिख रही है कि वह प्रदेश में सत्ता में वापसी कर सके।

बसपा के लिए बुरी खबर
इंडिया टुडे-एक्सिस माइ इंडिया ने अपने एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी को 288-326 सीटों पर जीत मिलती दिख रही है। जबकि सपा को 71-101 सीटों पर जीत मिलती दिख रही है। लेकिन मायावती की पार्टी बसपा के लिए सबसे बुरी खबर यह है कि एग्जिट पोल में पार्टी दहाई का भी आंकड़ा पार करती नहीं दिख रही है। पार्टी को सिर्फ 3-9 सीटों पर ही जीत मिल सकती है।

क्या रहा है पिछला आंकड़ा
गौर करने वाली बात है कि सपा ने पिछले चुनाव 2017 में सिर्फ 47 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि पार्टी 44 सीटों पर 2019 के लोकसभा चूनाव में बढ़त मिलती दिख रही थी। ऐसे में माना जा रहा है कि सपा अपने नंबर बढ़ा सकती है। सपा के लिए इस चुनाव मुश्किल यह रही है कि वह भाजपा के वोटर्स को लुभा नहीं पाई है। पार्टी को बसपा के वोटर्स जरूर मिले हैं। पिछले चुनाव में बसपा ने 19 सीटें जीती थीं, 2019 में बसपा 65 विधानसभा क्षेत्रों में आगे चल रही थी। अहम बात यह है कि 2019 में सपा और बसपा ने मिलकर चुनाव लड़ा था।

क्या है वोट फीसदी का आंकड़ा
वोट फीसदी की बात करें तो 2017 में बसपा को 22 फीसदी वोट मिले थे जबकि इस बार पार्टी को 12 फीसदी वोट मिलते दिख रहे हैं। हालांकि सपा के वोट फीसदी में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, पार्टी को 21.8 फीसदी वोट मिल सकते हैं। सप को 2017 में 21.8 फीसदी वोट मिले थे, जबकि 2019 में पार्टी को 20.1 फीसदी वोट मिले थे। लेकिन एग्जिट पोल की मानें तो सपा को इस बार 36 फीसदी वोट मिल सकते हैं। वहीं भाजपा को 46 फीसदी वोट मिल सकते हैं। जबकि 2017 में भाजपा को 41.4 फीसदी वोट मिले थे। हालांकि 2019 में भाजपा को 51.2 फीसदी वोट मिले थे।

कांग्रेस का ढलता सूरज
वहीं कांग्रेस की बात करें तो पार्टी को 2017 में 6.2 फीसदी वोट मिले थे जबकि 2019 में पार्टी को 6.4 फीसदी वोट मिले थे। लेकिन एग्जिट पोल की मानें तो पार्टी के वोटर्स में बड़ी सेंधमारी दिख रही है और इस बार उसे सिर्फ 3 फीसदी वोट ही मिलते दिख रहे हैं। पार्टी को 1-3 सीटों पर जीत मिल सकती है। 2017 में कांग्रेस को 7 सीटों पर जीत मिली थी। 2017 में भाजपा और सहयोगी दलों ने 325 सीटों पर जीत दर्ज की थी। एग्जिट पोल की मानें तो भाजपा को तकरीबन 35 सीटों का नुकसान हो सकता है। 2019 की बात करें तो भाजपा को 284 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त मिली थी।












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