UP Advocate Protection Act: योगी सरकार ने किया 3 सदस्यीय हाई लेवल कमेटी का गठन, अब हर पहलुओं पर विचार-विमर्श
UP Advocate Protection Act: अधिवक्ता संरक्षण कानून यानी एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने की मांग बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्यों की बार एसोसिएशन लंबे वक्त से केंद्र और राज्य सरकारों से कर रहा है। कई बार इस मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने आंदोलन भी किया। मंगलवार को इस मसले पर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 3 सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है।
यह समिति अधिवक्ता संरक्षण विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करेगी और आवश्यक एवं उचित कार्रवाई के लिए राज्य विधि आयोग को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी। इस समिति में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष द्वारा नामित सदस्य शामिल होंगे।

आपको बता दें कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने दो साल पहले यानी 2 जुलाई 2021 को इसका मॉडल विधेयक पेश किया था। जिसका उद्देश्य अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ न्यायिक कार्य में आने वाली अड़चनों को कम करना था।
डॉक्टरों की सुरक्षा की तर्ज पर वकीलों की सुरक्षा की मांग
दरअसल, अधिवक्ताओं का कहना है कि यूपी में डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए यूपी मेडिकेयर सर्विस पर्सेंस एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस (हिंसा और संपत्ति की क्षति रोकथाम अधिनियम 2013) लागू है। जिसके तहत डॉक्टर से मारपीट करने या अस्पताल में तोड़फोड़ करने पर तीन साल कैद और 50 हजार रुपये तक का जुर्माने का प्रावधान है। गैरजमानती अपराध के तहत कार्रवाई है। उसी तरह एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए।
क्या है एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट में सजा का प्रावधान?
इस एक्ट के तहत गैरजमानती कार्रवाई होगी। जिसमें 6 महीने से लेकर 5 साल तक की सजा और जुर्माना 50 हजार से लेकर 10 लाख रुपए तक हो सकता है।












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