निषादों के अल्टीमेटम से डर गई बीजेपी सरकार, जानिए योगी ने क्यों उठाया ये बड़ा कदम

लखनऊ, 21 दिसंबर: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कुछ दिनों पहले ही बीजेपी और निषाद पार्टी की रैली को देश के गृहमंत्री अमित शाह संबोधित करने पहुंचे थे। इस कार्यक्रम के दौरान दो आश्चर्यजनक बातें हुई थीं। एक तो कार्यक्रम के दौरान ही निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को यूपी का सीमए बनाने की मांग की गई वहीं दूसरी ओर अमित शाह के संबोधन के दौरान अचानक ही कुर्सियां खाली होने लगीं। निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने कहा था कि इस रैली में अमित शाह निषादों के लिए आरक्षण की घोषणा करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब तक यूपी में निषादों को आरक्षण नहीं मिलेगा तब तक बीजेपी को वोट नहीं मिलेगा।संजय निषाद भी जानते हैं चुनाव के दौरान बीजेपी को उनकी बहुत जरूरत है और यही समय है जब अपनी मांगे आसानी से मंगवाया जा सकता है। इसका नतीजा उस समय देखने को लेकिन जब सोमवार को ही योगी सरकार ने आरक्षण को लेकर मार्गदर्शन देने की मांग संबंधी पत्र भेज दिया है।

संजय निषाद

उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को भारत के महापंजीयक और भारत के जनगणना आयुक्त को एक पत्र लिखकर अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी के तहत निषाद समुदाय को आरक्षण पर मार्गदर्शन की मांग की है। दरअसल यूपी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सहयोगी निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद) पार्टी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 17 दिसंबर को लखनऊ के रमाबाई अंबेडकर मैदान में आयोजित निषाद पार्टी और भाजपा की संयुक्त रैली में निषाद समुदाय को उनकी मांगों को पूरा करने और सभी समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया था। वहां निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने निषाद समुदाय को एससी श्रेणी में आरक्षण देने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन सौंपा था।

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि, यूपी सरकार के विशेष सचिव रजनीश चंद्र ने रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त को पत्र भेजा है जिसमें उन्होंने दोनों अधिकारियों का ध्यान मझवार जाति की ओर आकर्षित किया है जो सूची में 53 वें नंबर पर है।

20 लोकसभा सीटों और 60 विधानसभा सीटों पर अहम भूमिका

बीजेपी ने संजय निषाद के जरिए सबसे अधिक आबादी वाले निषाद जाति के करीब 6-7 उपजातियों को सबसे पिछड़े में पहुंचाने की कोशिश की है। राजभर समुदाय की तरह पूर्वांचल में भी निषाद समुदाय का बड़ा वोट बैंक है। निषाद समुदाय के अंतर्गत निषाद, केवट, बिंद, मल्लाह, कश्यप, मांझी, गोंड आदि उप-जातियां हैं। राज्य में 20 लोकसभा सीटें और करीब 60 विधानसभा सीटें हैं जहां निषाद मतदाताओं की संख्या महत्वपूर्ण है। गोरखपुर, गाजीपुर, बलिया, संत कबीर नगर, मऊ, मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी, इलाहाबाद, फतेहपुर, सहारनपुर और हमीरपुर जिलों में निषाद के मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है।

वहीं दूसरी ओर इस पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए, डॉ संजय निषाद ने कहा कि, "पार्टी भाजपा नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निषाद समुदाय की लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने के लिए धन्यवाद देती है। निषाद समाज लंबे समय से न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है। निषाद समुदाय को अनुसूचित जाति वर्ग के तहत आरक्षण निषाद पार्टी की मुख्य मांगों में से एक थी।''

बीजेपी पर दबाव बनाने में कामयाब हुए संजय निषाद

यूपी चुनाव से पहले निषाद समाज पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने रविवार को बड़ा बयान दिया था। संजय निषाद ने कहा था कि आरक्षण दिए जाने तक उनके समुदाय के लोग वोट नहीं देंगे। अब यह भाजपा सरकार का कर्तव्य है कि वह अपना वादा पूरा करे। उन्होंने कहा कि नौ नवंबर से हम सभी जिलों में धरना देंगे। अगर बीजेपी वादा पूरा नहीं करती है तो गठबंधन पर भी असर पड़ सकता है। संजय निषाद का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर हाल ही में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ भाजपा को झकझोरने में शामिल हुए हैं। ऐसे बदलते राजनीतिक माहौल में पूर्वांचल क्षेत्र में बीजेपी के लिए चुनौतियां खड़ी हो गई हैं, जिसके आलोक में संजय निषाद ने बीजेपी पर दबाव बनाने की नीतियां शुरू की हैं।

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