Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

UP Result 2022: तीसरी बार भी फेल हुआ अखिलेश यादव का ये प्रयोग, नहीं काम आया चुनाव से पहले का गठबंधन

नई दिल्ली, 10मार्च: उत्तर प्रदेश में 37 साल बाद लगातार दूसरी बार कोई पार्टी सरकार बनाने जा रही है। योगी आदित्यनाथ एक बार फिर से सीएम की कुर्सी पर बैठने जा रहे हैं। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी उन्हें कड़ी टक्कर दे रही थी। आज आए नतीजों से सपा प्रमुख अखिलेश यादव को बड़ा झटका लगा है। यह लगातार तीसरी बार है जब अखिलेश यादव का चुनावों से पूर्व किया गया गठबंधन प्रयोग चुनावों में बुरी तरह फेल हुआ है।

पहले भी दो बार विफल हो चुका है ये प्रयोग

पहले भी दो बार विफल हो चुका है ये प्रयोग

सपा ने 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ और 2019 के लोकसभा चुनावों में मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ गठबंधन किया। हालांकि, दो प्रयोग विफल रहे। जिसके बाद 2022 के विधानसभा चुनावों में अखिलेश ने रणनीति में थोड़ा बदलाव कर छोटे दलों के साथ चुनाव से पहले गठबंधन किया। इस गठबंधन को इन चुनावों में फिर से हार का समाना करना पड़ा है।

इस बार अखिलेश ने लिय़ा था पांच छोटे दलों का साथ

इस बार अखिलेश ने लिय़ा था पांच छोटे दलों का साथ

2022 के यूपी चुनावों के लिए अखिलेश यादव ने राज्य के कुछ हिस्सों में प्रभाव रखने वाली पांच छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन करने की कोशिश की। हालांकि, यह गठबंधन भी अखिलेश को अधिक फायदा नहीं पहुंचा पाया। सपा ने ओम प्रकाश राजभर के नेतृत्व वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, जयंत चौधरी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोक दल (रालोद), शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी, अपना दल (कामेरावाड़ी) और महान दल के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन किया।

पिछली बार ऐसे थे समीकरण

पिछली बार ऐसे थे समीकरण

403 सीटों में से सपा ने 345 सीटों पर, रालोद ने 33 सीटों पर, एसबीएसपी ने 19 सीटों पर और अपना दल (के) ने छह सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। 2017 में, एसबीएसपी ने भाजपा के साथ गठबंधन किया था और आठ सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसने चार जीते और 0.7 प्रतिशत वोट प्राप्त किए। बाद में, उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन से हाथ मिलाने के लिए भाजपा से नाता तोड़ लिया। हालांकि बाद में वे सपा के साथ चले गए।

आरएलडी का साथ भी ना आया काम

आरएलडी का साथ भी ना आया काम

आरएलडी जिसका पश्चिमी यूपी में जाटों के बीच आधार है, वह 2014 या 2019 के लोकसभा चुनाव में कोई भी लोकसभा सीट नहीं जीती थी। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में उसने 277 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए, लेकिन सिर्फ एक पर जीत हासिल की। इसने 266 सीटों पर अपनी जमानत जब्त कर ली और 1.78 प्रतिशत वोट हासिल किया था। ऐसा माना जा रहा था कि संसद के पिछले शीतकालीन सत्र में निरस्त किए गए तीन कृषि कानूनों पर किसानों के विरोध के कारण रालोद बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। जाटों जो पश्चिमी यूपी में एक प्रभावशाली कृषक समुदाय हैं, ने मुख्य रूप से पंजाब के किसानों के नेतृत्व में किए जा रहे विरोध का समर्थन किया था। यह स्पष्ट होने के बाद कि यूपी में भाजपा चुनाव जीतने की राह पर है, सपा प्रवक्ता रोहित अग्रवाल ने कू पर एक पोस्ट में कहा, "लोकतंत्र में लोग सर्वोपरि हैं, अगर लोगों को बुलडोजर सरकार पसंद है, तो हम अभी भी बात करेंगे रोजगार के लिए किसानों की फसलों के सही मूल्य के लिए महिला सुरक्षा। लोगों को जनहित के लिए सरकार चाहिए, बुलडोजर की नहीं।

2017 यूपी विधानसभा चुनाव

2017 यूपी विधानसभा चुनाव

सपा ने 2012 का यूपी विधानसभा चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ा था और बहुमत हासिल किया था। पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने तब अपने बेटे अखिलेश यादव को सरकार की बागडोर सौंपी थी। पांच साल के शासन के बाद सपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन किया। गठबंधन को 'मास्टरस्ट्रोक' करार दिया गया। अखिलेश और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का एक साथ आना बहुत अहम था और कई नारे गढ़े गए थे, जैसे "यूपी के दो लड़के" और "यूपी को ये साथ पसंद है। हालांकि यह गठबंधन बीजेपी को नहीं रोक सका। पार्टी ने 312 सीटों पर जीत हासिल की । इसके तुरंत बाद सपा और कांग्रेस के रास्ते अलग हो गए।

Recommended Video

    UP Election Result 2022: जीत के बाद Lucknow पहुंचे CM Yogi, खूब उड़ा गुलाल | वनइंडिया हिंदी
    2019 लोकसभा चुनाव

    2019 लोकसभा चुनाव

    2017 में कड़वे अनुभव के बावजूद सपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में चुनाव पूर्व गठबंधन का प्रयोग दोहराया। उसने बसपा के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन किया। "बुआ-भतीजा जोड़ी" ने 2014 के लोकसभा चुनाव की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। सपा ने अलग-अलग चुनाव लड़कर 80 में से पांच सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि बसपा खाता नहीं खोल पाई थी। हालांकि, 2019 में, जबकि बसपा की संख्या बढ़कर 10 हो गई, वहीं सपा पांच सीटों पर समान रही। 2019 में चुनाव परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद सपा बसपा अलग हो गई। दो प्रयोगों के बाद जिसने सपा को ज्यादा मदद नहीं की, पार्टी ने फिर से छोटे दलों के साथ गठबंधन में 2022 के राज्य चुनाव लड़ने का फैसला किया। हालांकि, इस प्रयोग से भी पार्टी सत्ता पाने में विफल रही।

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+