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UP राज्यसभा चुनाव : राजभर-जयंत को संतुष्ट कर पाएंगे अखिलेश या गठबंधन में पड़ेगी फूट ?, जानिए

लखनऊ, 16 मई : उत्तर प्रदेश में राज्यसभा के चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। एक तरफ बीजेपी जहां अपने आठ उम्मीदवारों को जीतने को लेकर आश्वस्त दिख रही है वहीं दूसरी ओर अखिलेश यादव के सामने मुश्किलें ज्यादा है। अखिलेश के पास सहयोगी दलों को मिलाकर जितने विधायक हैं उसके हिसाब से वह राज्यसभा की तीन सीटें आसानी से जीत सकती है। लेकिन इसमें भी उनके सामने टेंशन यह है कि इन तीन सीटों पर राज्यसभा किसको भेजें। सहयोगियों की बात करें तो जयंत चौधरी और ओम प्रकाश राजभर अपनी दावेदारी ठोंक रहे हैं। वहीं दूसरी ओर आजम और शिवपाल की बगावत भी अंदखाने नया गुल खिला सकती है इसको लेकर भी अखिलेश की परेशानी बढ़ी हुई है।

विधानसभा चुनाव में सपा को मिली थी करारी हार

विधानसभा चुनाव में सपा को मिली थी करारी हार

दरअसल जवादी पार्टी को विधानसभा और विधान परिषद चुनाव में हार मिली है। राज्य में 10 जून को राज्य की 11 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव होना है। ऐसे में अब अखिलेश यादव (अखिलेश यादव पार्टी के विधायकों को रखते हुए और सहयोगी दलों के विधायकों का एकजुट होना उनके सामने एक बड़ी चुनौती है। राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी अपने दम पर तीन सीटें आसानी से जीत सकती है। लेकिन चौथी सीट के लिए उन्हें बीजेपी में सेंध लगानी होगी। बताया जा रहा है कि सपा में राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजने की चर्चा चल रही है। ऐसा करके अखिलेश यादव सहयोगियों को एकजुट रख सकते हैं। राज्य में विपक्षी दलों के इकलौते नेता के तौर पर फिलहाल सपा के सहयोगी दलों ने भी राज्यसभा को लेकर अपनी मांग उठानी शुरू कर दी है और सुभाष नेता ओपी राजभर अपने बेटे के लिए भी सीट चाहते हैं।

11 सीटों पर चुनाव अखिलेश के लिए मुसीबत का सबब

11 सीटों पर चुनाव अखिलेश के लिए मुसीबत का सबब

राज्य की 11 सीटों पर होने वाला राज्यसभा चुनाव भी समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के लिए मुसीबत बन गया है। क्योंकि इस चुनाव में बीजेपी को सात और सपा को तीन सीटें मिलना तय है। बीजेपी आठवीं सीट के लिए सपा में सेंध लगाने की तैयारी कर रही है जबकि सपा के लिए बीजेपी में सेंध लगाना आसान नहीं है। बीजेपी को आठवीं सीट पर सपा के सभी सहयोगियों को तोड़ना होगा और आठवीं सीट के लिए क्रॉस वोटिंग करनी होगी, जिसके बाद वह आठवीं सीट जीत सकती है। फिलहाल सपा प्रमुख राज्यसभा चुनाव में रालोद प्रमुख को टिकट देना चाहते हैं। सपा के टिकट पर जयंत चौधरी को सपा मैदान में उतार सकती है। ऐसा करके सपा लोकसभा चुनाव तक उसके साथ रालोद में शामिल हो सकती है।

आजम के परिवार से जयंत की मुलाकात के बाद सक्रिय हुए अखिलेश!

आजम के परिवार से जयंत की मुलाकात के बाद सक्रिय हुए अखिलेश!

हाल ही में रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने आजम खान के परिवार से रामपुर में मुलाकात की थी। जयंत चौधरी की मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है। क्योंकि जयंत चौधरी भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी का विस्तार करना चाहते हैं और उनके पास अभी कोई बड़ा मुस्लिम चेहरा नहीं है। इसलिए वह आजम खान को अपने परिवार के जरिए खेती करने की कोशिश कर रही हैं। रालोद के प्रदेश अध्यक्ष ने चुनाव के बाद पार्टी को अलविदा कह दिया था। जिसके बाद पार्टी में कोई मुस्लिम चेहरा नहीं है। दरअसल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद का वोट बैंक मुस्लिम और जाट है। जिसके आधार पर इस बार पार्टी ने आठ सीटों पर जीत हासिल की।

जयंत-शिवपाल-आजम बना सकते हैं राज्य में नया मोर्चा

जयंत-शिवपाल-आजम बना सकते हैं राज्य में नया मोर्चा

ऐसी भी संभावना है कि आने वाले दिनों में जयंत चौधरी, शिवपाल सिंह यादव और आजम खान का गठबंधन हो सकता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव के साथ आना रालोद की मजबूरी थी और अब राज्य में चुनाव हो चुके हैं और सबकी निगाह लोकसभा चुनाव पर है। राज्य विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने रालोद को कम सीटें दी थीं। जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद के खाते में कम सीटें आईं। राज्य में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से शिवपाल और आजम खान अखिलेश यादव से नाराज चल रहे हैं। ऐसे में अगर ये तीनों नेता एक साथ आते हैं तो यह अखिलेश यादव के लिए खतरे की घंटी होगी। इसलिए भविष्य में आने वाली चुनौतियों को देखते हुए अखिलेश यादव जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजने की तैयारी कर रहे हैं।

राजभर भी चाहते हैं बेटे के लिए राज्यसभा का टिकट

राजभर भी चाहते हैं बेटे के लिए राज्यसभा का टिकट

चर्चा है कि राज्यसभा चुनाव में सपा की सहयोगी सुभासपा भी सीट चाहती है। सुभाएसपी ने विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन किया था और छह सीटें जीतने में सफल रही थी। जिसके बाद अब सुभाषपा अध्यक्ष ने अपने बेटे के लिए राज्यसभा सीट की मांग की है। बताया जा रहा है कि अखिलेश इसके पक्ष में नहीं हैं। लेकिन राजभर इसके लिए अखिलेश यादव पर दबाव बना सकते हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में राजभर की भाजपा सरकार के मंत्रियों की बैठक हो चुकी है ऐसे में यदि राजभर अपने विधायकों के साथ दूसरी पार्टी का रुख करते हैं जो अखिलेश के लिए यह एक बड़ा झटका होगा।

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