UP politics: 2024 में टिकट को लेकर बीजेपी पर दबाव बनाने में जुटी निषाद पार्टी, जानिए क्या हैं दावे
लोकसभा चुनाव को लेकर संजय निषाद बीजेपी के साथ अभी से मोलभाव में जुट गए हैं। निषाद को लगता है कि वह भी राजभर की तरह बीजेपी से बारगेन करने में कामयाब होंगे।
Loksabha Election 2024: लोकसभा चुनाव (Loksabha Election 2024) को लेकर सभी दल अपनी अपनी तैयारी में जुट गए हैं। एक तरफ जहां ओम प्रकाश राजभर ने एनडीए का दामन थामकर योगी मंत्रिमंडल में अपनी वापसी लगभग पक्की कर ली है वहीं दूसरी ओर बीजेपी की दूसरी सहयोगी निषाद पार्टी के चीफ संजय निषाद भी अब सीटों को लेकर बीजेपी पर दबाव बनाने में जुट गए हैं।

निषाद पार्टी भी है एनडीए का हिस्सा
लोकसभा चुनाव कुछ ही महीने दूर हैं ऐसे में निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने अपनी पार्टी को एनडीए के लिए एक सहयोगी के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है। उन्हें उम्मीद है कि बीजेपी 2024 के चुनावों में उनकी पार्टी के लिए कुछ सीटें छोड़ने की उनकी मांग मान लेगी।
भाजपा के साथ सीट समझौते की संभावना की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि,
मुझे उम्मीद है कि भाजपा 2024 के चुनावों में हमारे लिए कुछ सीटें छोड़ने के पर विचार करेगी। निषाद समुदाय के कारण समाजवादी पार्टी 2022 का विधानसभा चुनाव हार गई। उस चुनाव में हमारे समुदाय ने बीजेपी को वोट दिया था। पूरे यूपी में 37 लोकसभा सीटों पर इसकी बड़ी उपस्थिति है, जहां वे उम्मीदवार की जीत या हार में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
बीजेपी के टिकट पर संजय के बेटे ने लड़ा था चुनाव
संजय निषाद के बेटे, प्रवीण निषाद ने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में गोरखपुर से 2018 लोकसभा उपचुनाव जीता। 2019 के राष्ट्रीय चुनाव में जब प्रवीण निषाद संत कबीर नगर से लोकसभा के लिए फिर से चुने गए तो निषाद पार्टी ने भाजपा के साथ गठबंधन किया।
मैं राजभर जितना मुखर नहीं
एसबीएसपी प्रमुख ओम प्रकाश राजभर की एनडीए में वापसी और अक्सर सुर्खियों में बने रहने की उनकी क्षमता पर टिप्पणी करते हुए निषाद ने कहा: "मैं राजभर जितना मुखर नहीं हूं।" राजभर अक्सर अपने राजनीतिक उतार-चढ़ाव के कारण चर्चा में रहते हैं, जिसमें मई 2019 में भाजपा से अलग होने के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में कही गई सभी बातों को दरकिनार करते हुए एनडीए में शामिल होने का निर्णय भी शामिल है।
अबकी लोकसभा चुनाव में खुलेगा पार्टी का खाता
संजय निषाद का दावा है कि इस बार उनकी पार्टी लोकसभा में अपना खाता खोलेंगे। दरअसल, 2018 के लोकसभा उपचुनाव में उनके बेटे प्रवीण ने गोरखपुर से सपा के सिंबल पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसका परिणाम यह हुआ कि बीजेपी को पूर्वी यूपी में उनके समुदाय के वोट बैंक पर ध्यान देना पड़ा। इसके चलते वह 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए का हिस्सा बन गए, जिसमें बीजेपी ने उनके बेटे को अपने चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़वाया।
सीट बंटवारे को लेकर कुछ बोलने को तैयार नहीं
संजय निषाद पहले 80 के दशक में बसपा संस्थापक कांशीराम से जुड़े थे। 2024 में उन्हें कितनी सीटें मिलने की उम्मीद है? उन्होंने भाजपा के साथ बातचीत जारी होने का संकेत देते हुए कहा, ''देखते हैं। अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।''












Click it and Unblock the Notifications