Panchayat Election 2026: क्या पुराने नियमों पर ही होगा चुनाव? सरकार के फैसले से मचा सियासी घमासान
Panchayat Election 2026: उत्तर प्रदेश में अगले साल प्रस्तावित पंचायत चुनावों को लेकर सरकार ने कमर कस ली है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि इन चुनावों के लिए किसी नई नियमावली की बात नहीं हो रही। पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने साफ किया है कि यह चुनाव पुरानी नियमावली और 2011 की सामाजिक-आर्थिक जनगणना के आधार पर ही कराए जाएंगे।
लखनऊ में हुई एक विभागीय बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मंत्री ने कहा कि पंचायत चुनाव मार्च 2026 तक कराना तय है। लेकिन चूंकि जातिवार जनगणना अभी तक नहीं शुरू हुई, इसलिए सरकार को पुरानी व्यवस्था के आधार पर ही आगे बढ़ना होगा। इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मंशा दोहराई।

बैठक के दौरान मंत्री ने सफाई कर्मियों और पंचायत सहायकों की उपस्थिति को लेकर बड़ा ऐलान किया। अब इन कर्मचारियों की हाजिरी आधार कार्ड के जरिए दर्ज की जाएगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। इस बैठक में विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार, निदेशक अमित सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
आरक्षण और महिलाओं की भागीदारी पर रहेगा फोकस
राजभर ने कहा कि पंचायतों में आरक्षण की व्यवस्था 'चक्रानुक्रम' के अनुसार लागू रहेगी। यानी सीटों पर आरक्षण बदलता रहेगा, जिससे सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व मिले। यह व्यवस्था सामाजिक न्याय के सिद्धांत को मजबूत करती है।
महिलाओं की भागीदारी को लेकर सरकार का फोकस साफ है। 33% आरक्षण सुनिश्चित करने की बात पर मंत्री ने दोहराया कि सरकार महिलाओं को पंचायतों में सशक्त बनाना चाहती है। इसके लिए नीतिगत बदलाव भी समय आने पर संभव हैं।
अखिलेश यादव पर तीखा हमला, कहा- झूठा है पीडीए
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए ओमप्रकाश राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इटावा की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब कथावाचक यादव निकले, तब सपा ने उसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया।
लेकिन जब आजमगढ़ में सपा कार्यालय की पूजा ब्राह्मणों से कराई गई, तो कोई सवाल नहीं उठा। राजभर ने अखिलेश के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मॉडल को झूठा करार दिया और कहा कि असली पीडीए तो अब एनडीए के साथ है।
राजभर ने सवाल किया कि अखिलेश यादव खुद को मुसलमानों का हितैषी बताते हैं, लेकिन क्या वो यह वादा कर सकते हैं कि 2027 में अगर सपा की सरकार बनी तो किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री बनाएंगे?
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जब सपा सरकार में थी, तब उन्होंने कभी जातिवार जनगणना क्यों नहीं कराई? यह दोहरा रवैया समाज को बांटने की राजनीति का हिस्सा है और जनता अब सब समझ चुकी है।












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