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यूपी निकाय चुनाव: नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद में क्या है अंतर, समझिए आसान भाषा में

यूपी निकाय चुनाव: नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम में क्या फर्क होता है, समझिए आसान भाषा में।

nikay chunav

UP Nikay Chunav 2023: उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव की तारीखों की घोषणा की जा चुकी है। प्रदेश में निकाय चुनाव दो चरण में होंगे। पहले चरण का मतदान 4 मई और दूसरे चरण का मतदान 11 मई को होगा। जबकि वोटों की गिनती 13 मई को होगी।

लेकिन कई लोग ऐसे हैं जिन्हें नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम के बीच अंतर नहीं पता है, अक्सर वह इन तीनों शब्दों में भ्रमित हो जाते हैं। आज हम आपके इसी भ्रम और दुविधा को हमेशा के लिए खत्म करने की कोशिश करेंगे।

देश के प्रशासनिक ढांचे को समझने के लिए आपको पहले इसके चरणों को समझना होगा। देश को हर स्तर पर बेतर तरह से चलाने के लिए अलग-अलग व्यवस्था बनाई गई है, यह मुख्य रूप से तीन स्तर पर है।

देश का प्रशासनिक ढांचा

  1. केंद्र सरकार
  2. राज्य सरकार
  3. स्थानीय प्रशासन

स्थानीय प्रशासन

पंचायती राज (ग्रामीण क्षेत्र)

  1. जिला परिषद (जिला स्तर)
  2. पंचायत समिति (ब्लॉक स्तर)
  3. ग्राम पंचायत (ग्राम स्तर)

नगर पालिका (शहरी क्षेत्र)

  1. नगर निगम
  2. नगर परिषद/ नगर पालिका परिषद
  3. नगर पंचायत

केंद्र सरकार

जैसा कि आप जानते हैं केंद्र में प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट होती है, जो पूरे देश के लिए कानून बनाने का काम करती है। केंद्र सरकार देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने के साथ देश के भीतर की बेहतर प्रशासन को सुनिश्चित करने का काम करती है

राज्य सरकार
भारत में संघीय ढांचा प्रणाली है, जिसके तहत भारत अलग-अलग राज्यों का एक संघ है। ऐसे में हर राज्य का अलग प्रशासन होता है, जिसे यहां की राज्य सरकारें संभालती हैं। प्रदेश का मुख्यमंत्री और उसकी कैबिनेट राज्य के लिए कानून बनाने का काम करती है और प्रदेश के शासन को संभालती है।

स्थानीय प्रशासन
बता दें कि किसी भी जिले के के प्रशासन को बेहतर तरह से चलाने के लिए इसे दो भागों में विभाजित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्र और शहरी क्षेत्र। ग्रामीण क्षेत्र के प्रशासन को पंचायती राज व्यवस्था से चलाया जाता है, जबकि शहरी क्षेत्र को नगर पालिका व्यवस्था से चलाया जाता है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र का निर्धारण यहां की आबादी के आधार पर होता है।

शहरी क्षेत्र (नगर पालिका)

  1. नगर निगम (5 लाख से अधिक की आबादी)। इसका मुखिया मेयर होता है। यह बड़े शहरों में होती है।
  2. नगर परिषद/ नगर पालिका परिषद (1 लाख से 5 लाख की आबादी)। इसका मुखिया अध्यक्ष होता है। छोटे शहरों में होती है।
  3. नगर पंचायत (30 हजार से 1 लाख की आबादी)। इसके अध्यक्ष को चेयरमैन कहते हैं। यह परिवर्तित यानि गांव से शहर में परिवर्तित हुए क्षेत्र में होती है।

बता दें कि1992 में संविधान के 74वे संशोधन के जरिए नगर पालिका की व्यवस्था की गई। नगर पंचायत के निर्माण के लिए आबादी का कम से कम 30 हजार होना जरूरी है। 30 हजार से कम आबादी वाले इलाके को ग्राम पंचायत कहते हैं। ऐसे ही नगर परिषद के निर्माण के लिए कम से कम आबादी एक लाख होनी चाहिए। इसी तरह से जब क्षेत्र की आबादी 5 लाख या उससे अधिक हो जाती है तो उसे नगर निगम कहते हैं।

नगर पालिकाओं के अध्यक्ष का चुनाव

नगर पालिकाओं यानि नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम के सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से होता है। जबकि इन नागर पालिकाओं के अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है। यानि चुने हुए सदस्य ही अपने अध्यक्ष का चुनाव करते हैं।

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