UP: ओम प्रकाश राजभर के लिए दोधारी तलवार है Nikay Chunav, जानिए क्या होंगी चुनौतियां
उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव को लेकर अब ओम प्रकाश राजभर भी दम ठोंक रहे हैं। दावा है कि वह अकेले दम पर चुनाव लड़ेंगे। लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि वह यूपी में कितनी सीटों पर चुनाव लड़ते हैं।

UP Nikay Chunav 2023: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) अब निकाय चुनाव में अकेले मैदान में उतरेगी। निकाय चुनाव में अकेले मैदान में उतरने से पूर्वांचल में इसका कितना प्रभाव पड़ेगा क्योंकि कई जिलों में इस पार्टी का प्रभाव माना जाता है। ऐसे में वोटों में विभाजन का फायदा किसको मिलेगा। क्या ओम प्रकाश राजभर की पार्टी बड़ी पार्टियों की सिरदर्दी बढ़ाने का काम करेगी। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो ओम प्रकाश राजभर के लिए निकाय चुनाव दोधारी तलवार की तरह है क्योंकि ऐसे में यदि उनका प्रदर्शन सही नहीं रहा तो लोकसभा चुनाव से पहले उनकी बारगेनिंग पॉवर कम हो जाएगी।
अकेले के बजाए बड़े दलों के साथ लड़ने का राजभर को मिला फायदा
ओम प्रकाश राजभर निकाय चुनाव में उतरने का दावा कर रहे हैं लेकिन पिछले रिकॉर्ड पर गौर करें तो उनकी पार्टी का प्रदर्शन तभी अच्छा रहा है जब वह किसी न किसी बड़ी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़े हैं। वह कभी बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़े तो कभी समाजवादी पार्टी के साथ। 2017 के विधानसभा चुनाव में ओम प्रकाश राजभर बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़े। बहुमत आने के बाद वह बीजेपी की सरकार में मंत्री भी रहे। लेकिन बाद में उन्होंने कैबिनेट से त्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद 2022 का विधानसभा चुनाव वह सपा के साथ मिलकर लड़े जिससे उनको काफी फायदा हुआ।

निकाय चुनाव में अकेला उतरना बड़ी चुनौती
ओम प्रकाश राजभर निकाय चुनाव में अकेले उतरने का दावा तो कर रहे हैं लेकिन यह इतना आसान भी नहीं है। वरिष्ठ पत्रकार राजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि ओम प्रकाश राजभर यदि यह कह रहे हैं कि वह निकाय चुनाव ताकत के साथ लड़ेंगे तो यह उनके लिए दोधारी तलवार की तरह ही होगा। यदि उनका प्रदर्शन ठीक रहा तो उनका कद बढ़ेगा लेकिन यदि प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा तो उनकी बारगेनिग पॉवर घट जाएगी। अब तक जो भी सफलता उनको या उनकी पार्टी को मिली है वह किसी बड़ी पार्टी के साथ मिलकर लड़ने के बाद ही मिली है।
यूपी में कितनी सीटों पर उम्मीदवार खड़े करेंगे राजभर?
ओम प्रकाश राजभर का दावा है कि वह चुनाव अपने दम पर लड़ेंगे लेकिन इसमें यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह पूरे यूपी में अपने उम्मीदवार उतारेंगे या सिर्फ पूर्वांचल तक ही समिति रहेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो राजभर के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी क्योंकि यदि वह पूरे यूपी में निकाय चुनाव लड़ेंगे तो फिर दूसरे दलों की मुश्किलें बढ़ाने के साथ ही उनपर अच्छे प्रदर्शन का दबाव रहेगा। यदि वह सिर्फ पूर्वांचल में लड़ते हैं और वह भी ऐसी सीटों पर जहां राजभर मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं तो वहां उनको सपा और बीजेपी के साथ बीएसपी के साथ भी मुकाबला करना होगा जो इतना आसान नहीं होगा।

जिन सीटों पर एसबीएसपी खड़ी होगी वहां बीजेपी का क्या रुख रहेगा
ओम प्रकाश राजभर के दावे के साथ यह भी देखना दिलचस्प होगा कि यदि राजभर जिन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारते हैं तो वहां बीजेपी का क्या रुख रहता है। क्या बीजेपी वहां हल्का उम्मीदवार उतारेगी या राजभर को कड़ी टक्कर देगी। यदि वह बीजेपी के साथ अंदरुनी तालमेल के साथ चुनाव लड़ते हैं तो बीजेपी उन सीटों पर डमी कैंडिडेट उतारकर उनको एक रास्ता दे सकती है। लेकिन यदि बीजेपी का रुख राजभर के हक में नहीं रहा तो राजभर के लिए सीटें निकालना आसान नहीं होगा।
निकाय चुनाव में राजभर के लिए क्या होगी चुनौती
राजभर अकेले खड़े होते हैं तो उनके लिए नुकसान होगा। नुकसान इस बात का कि उन्हें केवल राजभर वोटों पर ही निर्भर रहना है। सपा, बसपा और बीजेपी भी उनके वोट बैंक में सेंधमारी का प्रयास करेंगी। राजभर के वोट पर राजनीतिक दलों की तरफ से चौतरफा आक्रमण होगा ऐसे में वह अपने वोट बैंक को कितना सहेज पाएंगे यह देखना दिलचस्प होगा। राजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि, राजभर के लिए चुनौती बड़ी होगी यदि वह अकेले लड़ते हैं तो। अब यह देखना होगा कि वह कितनी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारते हैं। उनका काफी सोच समझकर कदम उठाना होगा क्योंकि निकाय चुनाव का परिणाम उनकी पार्टी के आगे का भविष्य तय कर सकता है।

यूपी निकाय चुनाव को लेकर घोषणा
यूपी नगर निकाय चुनाव को लेकर ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि वह अपने दम पर लड़ने जा रहे हैं और जहां उनकी पार्टी मजबूत होगी वहां वह अपने दम पर उम्मीदवार उतारेंगे। उन्होंने साफ कर दिया कि लोकसभा के लिए किसी से गठबंधन नहीं है। हालांकि सपा बसपा पर हमला बोलते हुए कहा कि जब दोनों पार्टियां सत्ता में थीं तो उन्होंने गरीबों, दलितों और दलितों को हक नहीं दिया। मजदूर, और आज सभी वोट पाने के लिए पिछड़ों, दलितों और पसमांदा मुसलमानों की बात कर रहे हैं।












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