UP Nikay Chunav 2023: BJP के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी Ayodhya Mayor Seat, बागी बिगाड़ेंगे खेल?
क्या अयोध्या में बागी बिगाड़ेंगे BJP का खेल? इस बात की अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं। जिस तरह से अयोध्या में कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आ रही है उससे बीजेपी शीर्ष नेतृत्व को भी चिंता में डाल दिया है।

UP Nikay Chunav in Ayodhya: उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में स्थानीय कार्यकर्ताओं में नाराजगी ने अयोध्या में भाजपा के लिए लड़ाई कठिन बना दी है. यह नाराजगी बीजेपी के मेयर पद के उम्मीदवार महंत गिरीशपति त्रिपाठी की जीत की संभावनाओं पर पानी फेर सकती है। भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) के सूत्रों की माने तो अयोध्या में मेयर की सीट बरकरार रखने के लिए पार्टी ने पूरी ताकत लगा दी है। पार्टी को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं बीजेपी अयोध्या की सीट हार गई तो इसका गलत संदेश पूरे देश में जाएगा। इसलिए बीजेपी हर हाल में यह सीट जीतना चाहती है।
अयोध्या में बागियों के कड़े विरोध का सामना कर रही बीजेपी
बीजेपी के सूत्रों की माने तो अयोध्या के 60 वार्डों में पार्षदों की सीट के लिए मैदान में उतरे बीजेपी उम्मीदवारों को बागियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पिछले निकाय चुनावों में बीजेपी के मेयर पद के उम्मीदवार ऋषिकेश उपाध्याय 44,642 मत मिले थे जबकि ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट समाजवादी पार्टी के गुलशन बिंदू को 41,041 वोट मिले थे। यहां बीजेपी केवल 3601 वोटों के मामूली अंतर से जीतने में सफल रही थी। 2017 में 60 वार्डों में से 30 में बीजेपी जीती थी।
कार्यकर्ताओं की नाराजगी से बीजेपी की लड़ाई को बनाया कठिन
इस बार स्थानीय कार्यकर्ताओं में नाराजगी ने अयोध्या में भाजपा के लिए लड़ाई कठिन बना दी है। यह नाराजगी बीजेपी के मेयर पद के उम्मीदवार महंत गिरीशपति त्रिपाठी की जीत की संभावनाओं पर पानी फेर सकती है। त्रिपाठी अयोध्या के एक स्थानीय मंदिर में पुजारी हैं और 2017 से पहले वे कांग्रेस नेता थे। भाजपा के बागी शरद पाठक भी मेयर पद के दावेदार थे। जब पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो पाठक ने अपनी पत्नी अनीता को निर्दलीय उम्मीदवार बना दिया है जो बीजेपी के लिए बड़ी मुश्किल साबित हो रहे हैं।
बागी बिगाड़ सकते हैं बीजेपी का खेल?
त्रिपाठी के मुख्य दावेदार समाजवादी पार्टी के आशीष पांडेय हैं। अयोध्या के 60 वार्डों में पार्षदों की सीट के लिए मैदान में उतरे बीजेपी उम्मीदवारों को भी बागियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ये बागी बीजेपी की 30 सीटों पर बीजेपी का खेल बिगाड़ सकते हैं इस बात को लेकर पार्टी अंदरखाने डरी हुई है। इसका नतीजा यह है कि आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व और भाजपा नेतृत्व ने अयोध्या में असंतुष्ट पार्टी कार्यकर्ताओं को शांत करने के लिए राज्य के अनुभवी नेताओं को मैदान में उतार दिया है।
राम मंदिर निर्माण निभा सकता है अहम भूमिका
बीजेपी के सूत्रों ने कहा कि,
अगर राम मंदिर मतदाताओं के बीच मतदान का आधार बना रहता है तो भाजपा मेयर की सीट बरकरार रखने में सक्षम होगी और अपने जीत के अंतर में भी सुधार कर सकती है। नहीं तो इस बार सीट बचाना बीजेपी के लिए मुश्किल साबित हो सकता है। हालांकि, पिछले चुनाव में शहर के 60 वार्डों में नगरसेवकों की सीटों के लिए चुनाव लड़ रहे भाजपा उम्मीदवारों के लिए राम मंदिर का मुद्दा काम नहीं कर सका था। इस सूक्ष्म स्तर (वार्ड) पर, राम मंदिर का मुद्दा भाजपा उम्मीदवारों की मदद करने में सक्षम नहीं हो सकता है और बागी पार्टी के उम्मीदवारों को और नुकसान पहुंचाएंगे।
बीजेपी का दावा- बड़े अंतर से जीतेगी पार्टी
मार्च 2017 में राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार ने अयोध्या और मथुरा-वृंदावन नगर निगमों का गठन किया था। अयोध्या में 11 मई को दूसरे चरण का मतदान होना है। वोटों की गिनती 13 मई को होगी। हालांकि अयोध्या से बीजेपी सांसद लल्लू सिंह ने पार्टी प्रत्याशी के विरोध की बात को खारिज करते हुए कहा कि बीजेपी न केवल मेयर की सीट बरकरार रखेगी, बल्कि काफी अंतर से जीत भी हासिल करेगी।












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