UP News: अवैध धर्मांतरण और देश के खिलाफ युद्ध की साजिश! छांगुर बाबा समेत 8 पर NIA कोर्ट ने तय किए आरोप
अवैध धर्मांतरण और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश के मामले में लखनऊ की एनआईए (NIA) विशेष अदालत ने मुख्य आरोपी जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा और उसके सात साथियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए आरोप तय कर दिए हैं। यह मामला न केवल अवैध धर्मांतरण, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक सरकार को हटाकर शरिया कानून लागू करने की एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश से जुड़ा है।
लखनऊ की विशेष एनआईए अदालत ने जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा समेत कुल 8 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, गैंगरेप, छेड़खानी, साजिश और अवैध धर्मांतरण निषेध कानून की गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं। इसके साथ ही अदालत ने देशद्रोह (Sedition) और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने (Waging War against India) की धाराओं को भी शामिल किया है।

आरोपियों के नाम:
- 1. जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा
- 2. नीतू उर्फ नसरीन
- 3. सबरोज़
- 4. शहाबुद्दीन
- 5. रशीद
- 6. राजेश कुमार उपाध्याय
- 7. नवीन रोहरा उर्फ जमालुद्दीन
- 8. महबूब
न्यूज-18 की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई और गवाही की प्रक्रिया शुरू करने के लिए 2 मई 2026 की तिथि निर्धारित की है।
साजिश का मुख्य उद्देश्य: 'शरिया कानून और इस्लामिक राष्ट्र'
अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों और जांच के अनुसार, इस सिंडिकेट का उद्देश्य बेहद खतरनाक था। धर्मांतरण के जरिए मुस्लिम आबादी बढ़ाकर देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को छिन्न-भिन्न करना। भारत की चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार को हटाकर देश में शरिया कानून लागू करना और इसे एक 'इस्लामी राष्ट्र' बनाना। दो समुदायों के बीच धर्म के आधार पर घृणा और वैमनस्य पैदा करना।
कैसे काम करता था छांगुर बाबा का सिंडिकेट?
उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS) की जांच में सामने आया है कि छांगुर बाबा (असली नाम जलालुद्दीन शाह) ने खुद को सूफी संत के रूप में प्रचारित किया था।
- सॉफ्ट टारगेट: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, मूक-बधिर बच्चे और विशेष रूप से हिंदू और सिख लड़कियां इस गिरोह के निशाने पर थीं।
- धर्मांतरण का 'रेट कार्ड': एटीएस के अनुसार, अलग-अलग जातियों के लिए धर्मांतरण की राशि तय थी। उच्च जाति (पंडित, राजपूत) और सिख लड़कियों के धर्मांतरण पर 15-16 लाख रुपये, ओबीसी के लिए 10-12 लाख और अन्य के लिए 8-10 लाख रुपये का फंड मिलता था।
- हथकंडे: नौकरी, शादी और बेहतर जीवन का लालच दिया जाता था। जो मना करता, उसे फर्जी मुकदमों में फंसाकर प्रताड़ित किया जाता था।
विदेशी फंडिंग और अकूत संपत्ति का खुलासा
जांच में यह बात सामने आई है कि जो छांगुर बाबा साल 2010 तक साइकिल पर नग और अंगूठी बेचता था, वह आज करोड़ों की संपत्ति का मालिक है।
- 100 करोड़ का हवाला: गिरोह के 40 से अधिक बैंक खातों में करीब 100 करोड़ रुपये का लेनदेन पाया गया है, जो खाड़ी देशों से हवाला के जरिए मंगवाया गया था।
- विदेशी दौरे: पिछले 10-15 वर्षों में छांगुर बाबा ने करीब 40 बार इस्लामिक देशों की यात्राएं कीं।
- अकूत संपत्ति: उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में आलीशान बंगले, लग्जरी गाड़ियां और कपड़ों के शोरूम इस फंडिंग के जरिए बनाए गए।
पाकिस्तान कनेक्शन और सुरक्षा को खतरा
सूत्रों के मुताबिक, सिंडिकेट के तार पाकिस्तान और अन्य देशों के आतंकी संगठनों से जुड़े होने की आशंका है। फॉरेंसिक जांच में मोबाइल और लैपटॉप से ऐसी संदिग्ध चैट और वीडियो मिले हैं, जो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करने की योजना की पुष्टि करते हैं।
महत्वपूर्ण घटनाक्रम एक नजर में:
- एफआईआर: यूपी एटीएस ने 16 नवंबर 2024 को गोमती नगर थाने में मामला दर्ज कराया था।
- गिरफ्तारी: बलरामपुर और नेपाल सीमा के पास से 50,000 के इनामी छांगुर बाबा और उसके साथियों को दबोचा गया।
- वर्तमान स्थिति: एनआईए कोर्ट ने आरोप तय किए हैं, अब 2 मई से गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे।












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