बचपन में ही टूट गई गर्दन, इंटरव्यू में सात बार हुईं रिजेक्ट, फिर ऐसे बनीं एक लाख करोड़ रुपए की कंपनी की मालकिन
Edelweiss Mutual Fund CEO Radhika Gupta Success Story:
"लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,कोशिश करने वालों की हार नहीं होती, नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है, मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है, आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। "
कवि सोहन लाल द्विवेदी की ये पंक्तियां Edelweiss Mutual Fund की CEO राधिका गुप्ता पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। उन्होंने जीवन में बहुत उतार चढ़ाव देखा। कई बार निराशा भी हाथ लगी लेकिन इन्होंने हिम्मत नही हारी। विदेश में रहीं लेकिन अपनी मिट्टी अपने देश से इनका लगाव कभी कम नहीं हुआ। इनकी कहानी संघर्षों से भरी है। आज वह बुलंदियों पर हैं पर यहां तक पहुंचना इतना आसान नहीं था। आइए एक नजर डालते हैं इनके अब तक सफर पर -

पाकिस्तान में हुआ जन्म
दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने वाली राधिका गुप्ता ने बताया कि मेरे पिता भारतीय विदेश सेवा में हैं। जब मेरा जन्म हुआ तब माता पिता पाकिस्तान में थे। यहां तीन साल रहने के बाद मेरे पिता का दूसरी जगह तबादला हो जाता है। इसी तरह मैं कई देशों में रही।
जन्म में ही टूट गई गर्दन, अपमानजनक शब्दो का करना पड़ा सामना
उन्होंने कहा की जन्म के बाद ही मेरी गर्दन टूट गई। जैसे जैसे मैं बड़ी होती गई वैसे वैसे इसके कारण इन्हें काफी अपमान भी सहना पड़ा। स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी हर जगह लोगों की अपमानजनक और व्यंगात्मक टिप्पणी सुननी पड़ती थी। इसके बाद जब जॉब शुरू की तो वहां भी।

अमेरिका से की पढ़ाई
कंप्यूटर साइंस की डिग्री राधिका ने अमेरिका से हासिल की। लेकिन यहां रहने के बाद भी इनका देश प्रेम कम नही हुआ और कैरियर के लिए अपने देश को चुना ।
जब सात बार इंटरव्यू में हुईं रिजेक्ट
राधिका बताती हैं कि कैरियर में आगे बढ़ाना इतना आसान नहीं था। संघर्षों का सामना करना पड़ा। निराशा झेलनी पड़ी। इतना ही नहीं मैं इंटरव्यू में सात बार रिजेक्ट हुई।
जब टूट गई हिम्मत
राधिका कहती हैं कि जीवन में आ रही परेशानियों से मैं पूरी तरह टूट गई। मन पूरी तरह निराशा से भर गया। चारो तरफ बस अंधेरा ही अंधेरा था।

फिर किया दृढ़ संकल्प
राधिका गुप्ता ने बताया कि इन निराशाओं के बीच में मैंने एक बार फिर खुद को संभाला। हिम्मत की और आगे कदम बढ़ाया। जॉब के लिए प्रयास किया तो एक जॉब भी मिल गई। थोड़ा हौसला बढ़ा।
पति के साथ मिलकर शुरू की
राधिका गुप्ता ने पति के साथ मिलकर 25 साल की उम्र में एसेट मैनेजमेंट कंपनी शुरू की। कुछ साल बाद, उनकी कंपनी का एडलवाइस एमएफ ने अधिग्रहण कर लिया। महज 33 साल की उम्र में साल 2017 में वे 9128 करोड़ की कंपनी की सीईओ बन गईं। वर्तमान समय में 1 लाख करोड़ रुपये कंपनी की मालकिन हैं राधिका गुप्ता।
विकल्प लेकर चलिए
राधिका गुप्ता कहती हैं कि किसी एक चीज के भरोसे न रहकर कैरियर में कई विकल्प लेकर चले। ये नही तो कुछ और सही, कुछ और नहीं तो कुछ और सही।

जो काम मिले उसका सम्मान करें
वह कहती हैं कि जो भी काम मिले उसका सम्मान करें। काम सेलरी में भी संतोष करें और मन से अपना काम करें।
कठोर परिश्रम का कोई विकल्प नहीं
राधिका गुप्ता कहती हैं कि मेहनत करने से कभी मत डरिए। कठिन परिश्रम करिए। क्योंकि इनका कोई विकल्प नहीं है।
थैंक्यू बोलना सीखिए
राधिका कहती हैं कि जब कोई भी आपकी छोटी या बड़ी सहायता करता है तो उसका धन्यवाद जरूर बोलिए। उसके प्रति आपका आभार संस्कार को दर्शाता है।












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