Ashutosh Tandon: आशुतोष टंडन के जाने से खत्म हो गया "लखनवी राजनीति" का 'लखनवी अंदाज'
BJP MLA Gopal Tandon no more: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार एक तरफ जहां अयोध्या में ऐतिहासिक कैबिनेट कर रही थी वहीं दूसरी ओर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लोगों के लिए सुबह-सुबह ही एक बुरी खबर मिली। दिवंगत नेता और पूर्व राज्यपाल लालजी टंडन के बेटे और यूपी में योगी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री रह चुके वर्तमान विधायक आशुतोष टंडन उर्फ गोपाल टंडन का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।

लखनऊ में टंडन परिवार की राजनीतिक अहमियत
गोपाल टंडन के नाम से मशहूर आशुतोष टंडन के जाने से लखनऊ में एक राजनीतिक परिवार की राजनीतिक परम्परा का लगभग अंत ही हो गया है। कुछ साल पहले ही आशुतोष के पिता और बिहार के राज्यपाल रहे लालजी टंडन का भी मेदांता में ही निधन हो गया था। हालांकि आशुतोष कैंसर की बीमारी से लंबे समय से जूझ रहे थे। इस दौरान सीएम योगी कई बार उन्हें देखने और उनका हालचाल पूछने मेदांता भी गए। लेकिन गुरुवार को उन्होंने मेदांता में अंतिम सांस ली।
आशुतोष ने अपने पिता लालजी टंडन से सीखी राजनीति
लखनऊ की राजनीति में टंडन परिवार की अपनी अहमियत हमेशा से ही रही है। बीजेपी के दिवंगत नेता और लखनऊ से सांसद रहे प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी विरासत आशुतोष के पिता लालजी टंडन को सौंपी थी। अटल के बाद लालजी टंडन लखनऊ से सांसद हुए। कहा जाता है कि वाजपेयी के इस परिवार से काफी गहरे रिश्ते थे और इसी वजह से लालजी टंडन को उन्होंने हमेशा तवज्जो दी।
टंडन परिवार का यूपी की सियासत में रसूख
लालजी टंडन हालांकि यूपी की राजनीति में एक बड़ा नाम माना जाता है। पूर्व सीएम मायावती जब बीजेपी के सहयोग से यूपी की मुख्यमंत्री बनीं थीं तब उनको राखी बांधने उनके घर गईं थीं। यूपी सरकार में मंत्री रहे लालजी टंडन लखनऊ का सांसद बनने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हो गए। लालजी टंडन ने जिंदा रहते ही अपने बेटे आशुतोष टंडन उर्फ गोपाल टंडन को राजनीति का ककहरा सिखाना शुरू कर दिया था।
योगी की पहली सरकार में मंत्री बने थे आशुतोष
लालजी टंडन को जब बिहार का राज्यपाल बनाया गया उसके बाद उन्होंने अपने बेटे को योगी सरकार में एडजस्ट करने में सफल रहे। यह लालजी टंडन की काबिलियत ही थी कि उन्होंने जीते जी अपनी राजनीतिक विरासत को अपने बेटे को ट्रांसफर कर दिया था।
आशुतोष ही बढ़ा रहे थे टंडन परिवार की लीगेसी
लालजी टंडन का भी कुछ साल पहले ही निधन हो गया था। उसके बाद उनकी लीगेसी को आशुतोष ही आगे बढ़ा रहे थे। अब उनके जाने के बाद टंडन परिवार में इस कद का कोई नहीं है जो टंडन परिवार की विरासत को आगे बढ़ा सके। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि लखनऊ में टंडन परिवार की राजनीति का एक युग समाप्त हो गया है।
क्या आशुतोष टंडन के बेटे को टिकट देगी बीजेपी
हालांकि बीजेपी के सूत्रों का कहना है कि आशुतोष टंडन के निधन के बाद लखनऊ पूर्वी सीट से उनके बेटे को बीजेपी टिकट देगी या नहीं यह देखना दिलचस्प होगा। हालांकि परम्परा यही रही है कि किसी भी मंत्री या विधायक के मरने के बाद उसके परिवार को ही सहानुभूति के आधार पर टिकट दे दिया जाता है लेकिन ऐसा इस बार भी होगा यह देखना काफी रोचक होगा। आशुतोष उर्फ गोपाल टंडन ने योगी के पहले कार्यकाल में मंत्री रहते हुए काफी अच्छा काम किया। ये आशुतोष ही थे जिन्होंने राजनीति के लखनवी अंदाज को जिंदा रखा था।
राजनीतिक विश्लेषक रतिभान त्रिपाठी ने कहा कि,
आशुतोष टंडन ने राजनीति के सारे गुण अपने पिता लालजी टंडन से सीखे थे जो राजनीति के एक मंझे हुए खिलाड़ी थे। आशुतोष के रहने से लखनऊ में राजनीति का लखनवी अंदाज भी जीवित था लेकिन उनके जाने के साथ ही ये अंदाज भी चला गया। अब उनके जैसा नेता मिलना कठिन है।
समय पर छोड़ दीजीए इस सवाल का जवाब
बीजेपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, '' अभी कुछ नहीं कहा जा सकता कि बीजेपी उनके बेटे को टिकट देगी या नहीं। यह बहुत कुछ परिस्थितियों पर निर्भर करता है। अभी इस सवाल का जवाब पाने के लिए आपको इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि टंडन परिवार का लखनऊ की राजनीति में योगदान को नकारा नहीं जा सकता है। इस परिवार की लीगेसी कौन आगे बढ़ाएगा इस सवाल का जवाब समय पर छोड़ दीजीए।''












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