UP Civic Poll 2017: अपने ही बने पार्टी के लिए सिरदर्द, विरोधियों पर कोई बोले भी तो क्या?

अब देखने वाली बात होगी कि टिकट ना मिलने से बागी हुए दावेदारों को जनता कितना तवज्जो देती है। अपनी ही पार्टी के फैसले से खफा होकर मैदान में उतरने वालों का संदेश साफ है कि उनकी पार्टियों ने उन पर भरोसा ना करके बड़ी सियासी भूल की है।

UP Civic Poll 2017

कन्नौज। इस बार का नगर निकाय चुनाव सियासी जमातों के लिए काफी मुश्किलों वाला बन गया है। मैदान में उतर कर प्रतिद्वंदी पार्टियों से तो बाद में दो-दो हाथ होगा, उसके पहले अपने ही पार्टी में सिर दर्द बन गए हैं। टिकट हासिल करने में नाकाम हुए चेहरों ने अपनी ही पार्टी को चुनौती दे डाली है, वो ताल ठोककर अपनी ही पार्टी के वोट कटवा बन गए हैं। ये हाल किसी एक पार्टी का नहीं, लगभग सभी सियासी पार्टियों का है। इन दिनों इन्हीं मुश्किलों से कई पार्टियां दो-चार हो रही हैं। Read more: 'नहीं बना टॉयलेट तो ना मिलेगा राशन और ना ही बिजली, पेट्रोल, डीजल'

अब देखने वाली बात होगी कि टिकट ना मिलने से बागी हुए दावेदारों को जनता कितना तवज्जो देती है। अपनी ही पार्टी के फैसले से खफा होकर मैदान में उतरने वालों का संदेश साफ है कि उनकी पार्टियों ने उन पर भरोसा ना करके बड़ी सियासी भूल की है। यही वजह है कि कमोबेश सभी सीट पर बागियों ने टिकट वालों को मुश्किल में डाल दिया है।

किसी एक सीट पर भी नहीं बल्कि ये कहानी लगभग सभी पार्टियों में ज्यादातर सीटों पर है। अपनों की बगावत से पार्टी के कार्यकर्ता भी उलझन में हैं। समर्थकों में भी बेचैनी है, हर किसी की जबान पर बागियों की ही चर्चा है। लोग कह भी रहे हैं कि बगावत पर उतर चुके बागियों ने टिकटधारकों की बाजी को मुश्किल में डाल दिया है।

UP Civic Poll 2017

अपनी ही पार्टी के लिए चुनौती बनकर मुश्किल खड़ी करने में सदर पालिका सीट पर सबसे ज्यादा गदर मची है। यहां सपा और भाजपा दोनों ही इस परेशानी से दो-चार हो रहे हैं। यहां बगावत की शुरुआत सपा से हुई, जब नामांकन के पहले ही दिन पूर्व पालिकाध्यक्ष हाजी मुहम्मद रईस ने अपना नामांकन करवाया। वो सपा से टिकट के दावेदार थे, पार्टी से टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय ही मैदान में उतर गए और मुस्लिम वोटों पर ध्रुवीकरण कर सपा की जीत में रोड़े अटका रहे हैं। यहां सपा ने जय कुमार तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। यही कहानी भाजपा की भी है, भाजपा ने सभी को चौंकाते हुए विक्रम त्रिपाठी को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। इससे टिकट की लाइन में लगने वाले अहम चेहरों को तगड़ा झटका लगा लेकिन पार्टी ने अपने स्तर से सभी लोगों को मना लिया।

मुश्किल तब फंसी जब पार्टी से टिकट मांगने वाले युवा चेहरे शैलेन्द्र अग्निहोत्री ने निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला कर लिया। इससे भाजपा में काफी बेचैनी महसूस की गई। बाकायदा सभी को एक पाले में लाने के लिए एक बैठक का भी आयोजन हुआ, कई तरह के प्रस्ताव रखे गए लेकिन सब बेनतीजा रहा। नतीजा ये कि शैलेन्द्र निर्दलीय ही मैदान में उतर कर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+