UP निकाय चुनाव को अखिलेश यादव ने कटघरे में खड़ा किया, तीन अधिकारी नपे
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव में मतदाता सूचि को लेकर तमाम नेताओं, राजनीतिक दलों ने सवाल खड़ा किया है। लेकिन जिस तरह से लखनऊ में वोटर लिस्ट की गड़बड़ी को छिपाने की कोशिश की गई उसने चुनाव आयोग पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। चुनाव होने के बाद लखनऊ के डीएम ने इस मामले में तीन बीएलओ को दोषी मानते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी चुनाव आयोग पर सवाल खड़ा करते हुए अपरोक्ष रूप से पीएम मोदी के डिजिटल इंडिया के मिशन पर निशाना साधा ।

लखनऊ के डीएम कौशल राज शर्मा ने वोटर लिस्ट से तमाम वोटरों के नाम गायब होने के लिए बीएलओ अधिकारी को दोषी मानते हुए उन्हें निलंबित कर दिया। लखनऊ में 37.57 फीसदी ही मतदान हुआ था, इस दौरान कई जगहों पर ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी की बात सामने आई थी। वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने की वजह से डीजीपी सुलखान सिंह, वरिष्ठ भाजपा सांसद कलराज मिश्रा सहित कई बड़े नेता तक अपना वोट नहीं डाल सके।
इवीएम मशीनों में गड़बड़ी को लेकर अखिलेश यादव ने ट्वीट करके चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़ा किया, उन्होंने कहा कि जब सांसद, मंत्री, मेयर तक के नाम वोटर लिस्ट से गायब हैं, तब आम जनता से वोट डालने की अपील का क्या फ़ायदा। इसे सुधारना ही होगा, नहीं तो जो उँगलियाँ वोट देने के बाद शान से उठायी जाती हैं, वो सरकार की मंशा पर उठने लगेंगी। चुनावी प्रक्रिया में विश्वास लोकतंत्र की सबसे बड़ी ज़रूरत है।
अखिलेश यादव ने कहा कि मीडिया की खबरों की मानें तो कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब हैं, जिसके चलते लोग अपना वोट नहीं डाल सके। इस तरह के डिजिटल इंडिया से हम कभी भी आगे नहीं बढ़ सकते हैं। मतदाता सूचि में गड़बड़ी के मामले में राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल ने बताया कि वोटर लिस्ट नगरपालिका एक्ट के अनुसार बनती है, वोटर लिस्ट में 2012 में किसी भी तरह की गड़बती की शिकायत नहीं मिली थी। कई लोगों के नाम काटे गए जिनका नाम गांव और शहर दोनों में ही था।
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