'सिद्दीकी कप्पन के PFI से 'गहरे संबंध', हाथरस में भड़काना चाहता था हिंसा', यूपी सरकार ने SC से कहा
'सिद्दीकी कप्पन के PFI से 'गहरे संबंध', हाथरस में भड़काना चाहता था हिंसा', यूपी सरकार ने SC से कहा
लखनऊ, 07 सितंबर: केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी, जिसका उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने विरोध किया है। यूपी सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दाखिल किया है उसके मुताबिक, कप्पन के राष्ट्रविरोधी एजेंडा रखने वाले पीएफआई जैसे चरमपंथी संगठन से गहरे सम्बंध रहे है। वो दूसरे आरोपियों के साथ मिलकर देश में आंतक, धार्मिक कलह भड़काने की साजिश में शामिल था।

दरअसल, सिद्दीकी कप्पन को यूपी सरकार ने हाथरस हिंसा की साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया था। यूपी सरकार ने बताया कि कप्पन हाथरस एक पत्रकार के तौर पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए नहीं जा रहा था, बल्कि वो पीएफआई डेलिगेशन का हिस्सा था, जिसका मकसद हाथरस पीड़ित के परिजनों से मिलकर साम्प्रदायिक दंगे भड़काना था। यूपी सरकार की मानें तो सिद्दीकी कप्पन के पीएफआई और इसकी छात्र शाखा, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) जैसे आतंकी फंडिंग / योजना संगठनों के साथ "गहरे संबंध" हैं।
कोर्ट में दिए यूपी सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि इन संगठनों के कथित तौर पर तुर्की में आईएचएच जैसे अलकायदा से जुड़े संगठनों से संबंध पाए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताहिक, सिद्दीकी कप्पन ने 2 अगस्त को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसने उनकी जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि "दागी धन के उपयोग से इंकार नहीं किया जा सकता है"। तो वहीं, अब कप्पन की जमानत याचिका पर अगली सुनवाई नौ सितंबर को होगी।












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