जयंत चौधरी के ऐलान से साफ, किसानों के मुद्दों पर भाजपा को अभी नहीं छोड़ेगा विपक्ष
नई दिल्ली, 21 नवंबर: केंद्र सरकार की ओर से बीते साल लाए गए कृषि कानूनों का विरोध पंजाब और हरियाणा के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा देखा गया है। इस इलाके में खेती किसानी की बात करने वाली पार्टी राष्ट्रीय लोकदल और उसके नेता जयंत चौधरी ने आंदोलन को लगातार समर्थन दिया। वो अपनी सभाओं में भी लगातार किसानों की बात करते रहे। उनकी पार्टी को भी इस पूरे समय में काफी फायदा होता दिखा। कानूनों की वापसी के बाद कई लोग उनको नया मुद्दा खोज लेने की बात कह रहे हैं लेकिन जयंत चौधरी ने सफा कर दिया है कि किसानों के मुद्दे पर वो भाजपा को कोई राहत नहीं देने जा रहे हैं।

मुजफ्फरनगर में जयंत बोले- आंदोलनजीवी तो बनना पड़ेगा
रालोद प्रमुख जयंत चौधरी शनिवार को मुजफ्फरनगर के बघरा में पहुंचे थे। यहां एक बड़ी जनसभा को उन्होंने संबधित किया है। जयंत चौधरी ने यहां कृषि कानूनों पर बात करते हुए कहा, आप लोगों (किसानों) ने मजबूती से लड़ाई लड़ी तभी सरकार झुकी है और कानून वापस हुए हैं लेकिन संतुष्ट नहीं हो जाना है। अभी दूसरे बहुत मुद्दे हैं, जिन पर लड़ना है। ऐसे में लगातार आंदोलन के लिए तैयार रहना होगा, 'आंदोलनजीवी' ही बनना होगा क्योंकि आंदोलन से ही मसले सुलझते हैं।

'हमें जिन्ना का नहीं पता, गन्ने पर बात करो'
जयंत चौधरी ने इस दौरान कहा कि हाल के दिनों में जिन्ना की बातें खूब हो रही हैं ताकि ध्यान मुद्दों से हटाकर कहीं और लगा दिया जाएगा। ऐसा नहीं होने देना है। उन्होंने कहा, जिन्ना से हमें क्या करना है, हमें नहीं पता वो कौन थे और कैसे थे। हम तो गन्ने बात करेंगे। हमें ये बताओ गन्ने पर कितने रुप बढ़ाए हैं और खाद पर कितने बढ़ाए हैं।

इशारा साफ, किसान के मुद्दों को चुनाव में जिंदा रखा जाएगा
जयंत चौधरी ने मुजफ्फरनगर के बघरा से ये बातें कहीं, जो पूरी तरह के किसानों का ही इलाका है। जिसमें जाटों की संख्या भी अच्छी-खासी है। उनकी रैली में पहुंचने वालों में भी जाट और मुसलमान ही सबसे ज्यादा थे। उन्होंने जिन्ना को लेकर ये संदेश देने की कोशिश की है कि आपस में हिन्दू-मुस्लिम का बंटवारा नहीं होने देना है। वहीं कृषि बिलों की वापसी के बावजूद एमएसपी, गनन्ना का भाव और समय से भुगतान आवारा पशु, बिजली बिल की दरों जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की मंशा भी उन्होंने साफ कर दी है। राष्ट्रीय लोकदल पश्चिम यूपी दो दर्जन से ज्यादा जिलों में प्रभाव रखती है। ऐसे में अगर राष्ट्रीय लोकदल किसानों के मुद्दों पर चुनाव में जाती है तो जाहिर है भाजपा कानूनों की वापसी के बावजूद कई मामलों में घिर सकती है।












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