Uttar Pradesh Election Results 2022: क्या यूपी में वोटों का हुआ ध्रुवीकरण? कहां चूक गए अखिलेश?

लखनऊ, 11 मार्च। यूपी की राजनीति में पूरे 37 साल बाद किसी पार्टी की लगातार दूसरी बार सत्ता वापसी हुई है। साल 2017 के बाद साल 2022 में भी प्रदेश में कमल खिला है। प्रदेश का जनादेश सीएम योगी आदित्यनाथ को मिला है, हालांकि उनके सपा की ओर से चुनौती भरपूर मिली। सपा ने भी अपनी और से पूरी कोशिश की लेकिन सत्ता के दूर रह गई, हालांकि उसकी सीटों में इजाफा हुआ है और वो इस बार मजबूत विपक्ष की भूमिका में दिखाई पड़ रही है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर सपा हारी क्यों? इस चुनाव को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिस अटैकिंग अंदाज में लड़ा, उससे लग रहा था कि इस बार बीजेपी की जीत आसान नहीं होगी लेकिन वो अटैकिंग अंदाज लोगों के वोटों को अपनी ओर क्यों नहीं कर पाया?

मु्स्लिमों को सपोर्ट करने वाली सपा की छवि

मु्स्लिमों को सपोर्ट करने वाली सपा की छवि

राजनीतिक एक्सपर्ट्स की मानें तो इसके पीछे बड़ा कारण रहा सपा की छवि, जो कि मु्स्लिमों को सपोर्ट करने वाली रही है। इसलिए अखिलेश यादव का खुद को बार-बार कृष्ण कहना भी सपा को उस छवि से मुक्त नहीं कर पाया और एक अच्छी चुनौती देने के बावजूद सपा मैजिक नंबर से बहुत ज्यादा दूर रही गई, दूसरे शब्दों में सपा भाजपा के हिंदुत्व की काट को खोज नहीं पाई।

नॉन जाटव दलित वोट हुए इग्नोर

नॉन जाटव दलित वोट हुए इग्नोर

यही नहीं सपा ने किसान आंदोलन को मुद्दा बनाया और इसी कारण उसने जयंत चौधरी के साथ सपा-रालोद गठबंधन किया और उसे लगा कि वो इस तरह से जाट वोटों को अपनी ओर कर लेगी लेकिन इस सबके चक्कर में उसने नॉन जाटव दलित वोटों को इग्नोर किया, जिसने बीजेपी का साथ दिया और सपा-रालोद के हाथ में कुछ नहीं लगा।

दबंग नेताओं का डर

दबंग नेताओं का डर

अखिलेश की पार्टी की इमेज लोगों के दिलो-दिमाग में कहीं ना कहीं दबंग नेताओं वाली रही है, इस इमेज से अखिलेश यादव राजा भैया जैसे बाहुबली नेता का विरोध करने के बाद भी पार्टी को निकाल नहीं पाए। बाहुबली मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी ने जिस तरह अधिकारियों को धमकी दी, वो कहीं ना कहीं सपा के विरोध में चला गया और इसकी वजह से हिंदू और अधिकारियों के वोट सपा से दूर हुए।

हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण में सफल रही BJP?

हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण में सफल रही BJP?

तीसरा अहम सवाल ये है कि क्या इस बार भाजपा यूपी में हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण में सफल रही है तो इसका जवाब 'हां' में ही जाता है। पूरे चुनाव में भाजपा ने विकास की बात की लेकिन वो कहीं भी हिंदुत्व के मुद्दे से आउट नहीं हुई, चाहे कैराना में अमित शाह का दौरा हो या फिर काशी में नरेंद्र मोदी की पूजा।

भाजपा का वोट शेयर 41% है

बीजेपी ने लोगों को ये समझाने की कोशिश की वो विकास की बात तो करती है लेकिन वो जो कल थी वो ही आज है, जिसका नतीजा ये हुआ कि 13 प्रतिशत ब्राह्मण वोटरों वाले यूपी में हिंदुओं ने एक मत होकर बीजेपी को वोट दिया ना तो माया का ब्राह्मण सम्मेलन और ना ही सपा का ब्राह्मण प्रेम, ब्राह्मणों को बीजेपी से दूर रख पाया । इसी वजह से साल 2017 से इस बार सीट कम होने के बावजूद भाजपा का वोट शेयर 41% है, जबकि पिछली बार ये 39 प्रतिशत था।

 'मोदी है तो मुमकीन है'

'मोदी है तो मुमकीन है'

अब बात आती है मोदी के मैजिक की, बीजेपी ने कहा कि 'मोदी है तो मुमकीन है' और इसने उसे वहां इस्तेमाल किया, जहां से खबरें थीं कि लोग सीएम योगी से नाराज हैं। पार्टी ने इंटरनल सर्वे के तहत इस बारे में पता लगाया और एक प्लान के तहत पीएम मोदी को चुनाव प्रचार के लिए यूपी बुलाया । आपको बता दें कि इस पूरे चुनाव में पीएम मोदी ने लगभग 19 जनसभाएं कीं और करीब 192 सीटों को कवर किया, जिनमें से134 सीटों पर कमल खिला है।

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