पंजाब में इतिहास रचने वाली AAP को यूपी में NOTA से कम वोट मिले या अधिक ? जानिए
लखनऊ, 10 मार्च: आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव में जीत के सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले हैं और वह एक राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर उभरने की ओर बढ़ रही है। पार्टी के कई नेताओं ने 2024 के आम चुनावों के लिए अभी से राष्ट्रीय स्तर के सपने बुनने शुरू कर दिए हैं। लेकिन, जिस दिल्ली की सल्तनत का रास्ता लखनऊ से होकर गुजरता है, उस उत्तर प्रदेश में मतदाताओं ने आम आदमी पार्टी के मुफ्त वाले फॉर्मूले को यूं नजरअंदाज कर दिया है कि उससे ज्यादा नोटा पर यकीन जताया है।

यूपी में एक भी सीट पर मुकाबले में नहीं 'आप'
चुनाव आयोग की वेबसाइट के आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार रात 9.27 तक दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी और पंजाब में सरकार बनाने जा रही आम आदमी पार्टी देश के सबसे ज्यादा 403 सीटों वाली यूपी विधानसभा चुनाव में एक भी सीट पर आगे नहीं चल रही थी।
नोटा को मिले 'आप' से लगभग दोगुने वोट
इस समय तक यूपी में आम आदमी पार्टी को महज 0.38% वोट मिले थे। जबकि, नोटा (नन ऑफ द अबव) के खाते में 0.69% वोट जा चुके थे। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की पार्टी ही नहीं, हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम को भी इस समय तक यूपी में सिर्फ 0.48% वोट मिल पाए थे। इन दलों से आगे कांग्रेस (2.34%) और आरएलडी (2.88%) जैसी पार्टियां थीं।
'आप' 2014 से लड़ रही है यूपी में चुनाव
केजरीवाल ने यूपी का इंचार्ज अपने राज्यसभा सांसद संजय सिंह को बनाया है। उनका कहना है, 'यूपी का चुनाव आम आदमी पार्टी की मौजूदगी, एएपी के आइडिया को लोगों तक ले जाने, अरविंद केजरीवाल जी की नीतियों को हर गांव तक ले जाने के लिए था।' पार्टी की यूपी यूनिट ने एक ट्वीट में उनको कोट करते हुए कहा, 'हमें बिना रुके या थके चुनौतियों को कबूल करते हुए आगे बढ़ना है।' गौरतलब है कि किसान आंदोलन से लेकर यूपी से जुड़े हर राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह सबसे ज्यादा सक्रिय रहे हैं। बड़ी बात ये है कि केजरीवाल की पार्टी का यूपी में यह कोई पहला चुनाव नहीं है। पार्टी 2014 के लोकसभा चुनाव से ही यहां कोशिश करती रही है।
वैसे संजय सिंह पंजाब में पार्टी की प्रचंड जीत से बहुत उत्साहित हैं।












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