UP Election 2022: बीजेपी ने खोजी ओम प्रकाश राजभर की काट, मुलायम के जन्मदिन के बाद सन्नाटे में शिवपाल
लखनऊ, 11 दिसंबर: उत्तर प्रदेश में इस समय चुनावी माहौल है। सभी राजनीतिक दल अपनी अपनी तैयारियों में युद्धस्तर पर जुटे हुए हैं। इसी प्रतापगढ़ से बाहुबली नेता राजा भैया ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं या यूं कहिए कि चुनावी वैतरणी को पार करने के लिए किस नाव का सहारा लेंगे यह तय नहीं किया है। इस बार सपा भी उनके खिलाफ उम्मीदवार उतार सकती है। इससे उनकी परेशानियां बढ़ी हुई हैं। वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने ओम प्रकाश राजभर की एक ऐसी काट ढूंढ निकाली है जिसके बाद अब राजभर की भी मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।

राजा भैय्या क्यों नहीं खोल रहे अपना पत्ता
उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में राजा भैया किस नाव पर सवार होंगे इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है। राजा भैया को लेकर अटकलें हैं की वो 100 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं। अखिलेश पहले ही राजा से नाराज चल रहे हैं इसे में राजा के सामने काफी मुश्किलें खड़ी हों गई हैं। प्रतापगढ़ की कुंडा विधानसभा से यदि बीजेपी , बीएसपी और समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी चुनाव लड़े तो राजा की सेहत बिगड़ सकते हैं।

मुलायम के जन्मदिन के बाद सन्नाटे में शिवपाल
2017 में हुए यूपी चुनाव के के बाद से ही शिवपाल और अखिलेश के बीच रिश्तों पर जमी बर्फ अभी पिघली नही है। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है थी कि 22 नवंबर को मुलायम सिंह के जन्मदिन पर चाचा भतीजे के बीच एकजुटता दिख सकती है। हालांकि जन्मदिन के बीत जाने के बाद अब अखिलेश की तरफ से कोई बयान भी नही रहा है। शिवपाल भी अभी अधर में लटके हुए हैं। वो अकेले चुनाव में जायेंगे या अकेले लड़ेंगे इसका कोई खुलासा नहीं हुआ है।

बीजेपी को मिल गई ओम प्रकाश राजभर की काट
उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव से पहले इस बार ओम प्रकाश राजभर बीजेपी के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी करने में जुटे हैं। पूर्वाचल में अखिलेश और राजभर का गठबंधन क्या गुल खिलाएगा यह तो समय ही बताएगा लेकिन बीजेपी भी उनकी काट तैयार करने में जुटी है। चर्चा है की कालीचरण राजभर जल्द ही बीजेपी का दामन साध सकते हैं। इसके बाद बीजेपी की तैयारी उनको ओम प्रकाश राजभर के खिलाफ चुनाव लड़ाने की है। ये कहा जा सकता है की बीजेपी अब ओम प्रकाश राजभर को उन्ही के अंदाज में जवाब देना चाहती है।

मोदी_केशव की मुलाकात को लेकर क्या हैं अटकलें
अयोध्या, काशी और मथुरा सभी विश्व हिंदू परिषद का ही एजेंडा रहा है, भले ये सोच संघ मुख्यालय नागपुर से निकली हो सार्वजनिक तौर पर तो संघ और बीजेपी आंदोलन का हिस्सा बने हैं. अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद मोहन भागवत ने कहा भी था कि संघ वीएचपी के आंदोलन से जुड़ा था और काशी-मथुरा से उसका कोई वास्ता नहीं है - संघ राष्ट्र निर्माण के अपने काम में लगा रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्य की मुलाकात के मायने समझने के लिए 2019 के आम से पीछे चलना होगा. आपको याद होगा, कैसे संघ प्रमुख मोहन भागवत के मंदिर निर्माण को लेकर कानून की मांग के बाद हिंदू संगठनों के नेता अचानक आक्रामक हो गये थे और उनके निशाने पर सुप्रीम कोर्ट तक आ चुका था।












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