UP Chunav 2027 से पहले सपा में बड़ी फूट? डिप्टी CM का दावा- '26 सांसद टूटेंगे', Akhilesh के घर में भी सेंध?
UP Chunav 2027: महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) की दूसरी टूट के बाद अब उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी (सपा) में फूट की अटकलें जोर पकड़ रही हैं। यूपी के डिप्टी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया है कि सपा के 25-26 सांसद टूटने को तैयार हैं और पार्टी का हाल तृणमूल कांग्रेस (TMC) से भी बदतर हो सकता है।
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख और मंत्री ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) ने भी सपा में बड़ी फूट की भविष्यवाणी की, जबकि अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सपा एकजुट है और BJP लालच-दबाव की राजनीति करती है। 2027 विधानसभा चुनाव और 2026 निकाय चुनाव से पहले यह बहस यूपी की सियासत को गर्म कर रही है। आइए पूरी स्थिति को विस्तार से समझते हैं...

अखिलेश बोले- पार्टी मजबूत, BJP का दावा- चाचा भी छोड़ेंगे सपा
ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया कि सपा के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव (Ram Gopal Yadav) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र सौंपा है, जिसमें कई नेता BJP में शामिल होने की इच्छा जता रहे हैं। राजभर ने पुराने घोटालों की जांच के दबाव को भी वजह बताया।
डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, 'सपा में 25-26 सांसद टूटने को तैयार हैं। परिवारवाद और भ्रष्टाचार से पार्टी टूट रही है। 2027 से पहले खुद ही टूटकर चले जाएंगे। BJP ने किसी को नहीं तोड़ा, हम अभी उन्हें ले भी नहीं रहे।'
- अखिलेश यादव ने इन दावों को खारिज करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सपा मजबूत और एकजुट है। BJP का इतिहास लालच और दबाव से नेताओं को तोड़ने का रहा है। कई सपा विधायक, MLC और राज्यसभा सदस्य पहले जा चुके हैं, लेकिन पार्टी टिकी हुई है।
- बीजेपी को चुनौती देने के लिए बहादुर लोगों की टीम चाहिए। अखिलेश ने स्पष्ट किया कि वे BJP को तोड़ने की कोशिश नहीं करेंगे, लेकिन जहां BJP दूसरी पार्टियों को तोड़ रही है, वहां उसके अपने विधायक भी पाला बदलने की तैयारी में हैं।
सपा के लोकसभा सांसद: संख्या और गणित
2024 लोकसभा चुनाव में सपा ने यूपी की 80 सीटों में 37 सीटें जीतीं और यूपी की सबसे बड़ी पार्टी बनी। NDA (BJP+RLD+Apna Dal) को 36 सीटें मिलीं।
दो-तिहाई का गणित (दलबदल कानून):
सपा के 37 सांसदों में दो-तिहाई लगभग 25 सांसद अगर औपचारिक विलय (merger) की प्रक्रिया से BJP/NDA में जाते हैं, तो दलबदल कानून से बच सकते हैं। नतीजा ये होगा कि NDA का यूपी में संख्या बल 36 + 26 = 62 हो जाएगा, जबकि सपा के पास सिर्फ 11 सांसद बचेंगे। हालांकि, अभी तक सपा में कोई आधिकारिक टूट या विलय का ऐलान नहीं हुआ है। यह केवल BJP नेताओं के दावे और राजनीतिक अटकलें हैं।
टूट के संभावित कारण क्या ?
- परिवारवाद का आरोप: सपा पर अखिलेश परिवार केंद्रित होने का आरोप लगता रहा है।
- 2024 चुनाव के बाद असंतोष: कुछ नेताओं को टिकट या भूमिका न मिलने से नाराजगी।
- पुराने घोटालों की जांच: राजभर ने SP शासनकाल के घोटालों की CBI/ED जांच का जिक्र किया।
- 2027 की तैयारी: BJP सपा को कमजोर करके NDA को मजबूत करना चाहती है।
- जातीय समीकरण: सपा का PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला कुछ OBC और दलित नेताओं को आकर्षित नहीं कर पा रहा, जिसका BJP फायदा उठा सकती है।
सपा vs BJP: 2027 का गणित समझें...
- सपा की ताकत: 2024 में 37 सीटें, मजबूत ग्रामीण-मुस्लिम-यादव वोट बैंक, PDA फॉर्मूला।
- BJP की रणनीति: गैर-यादव OBC, दलित और उच्च वर्गों को जोड़ना, विकास और राम मंदिर narrative।
- अगर टूट हुई तो BJP को लोकसभा में मजबूती मिलेगी, जो संविधान संशोधन जैसे मुद्दों में मददगार साबित हो सकती है।
अखिलेश यादव की रणनीति समझें...
अखिलेश ने पार्टी को एकजुट रखने पर जोर दिया है। उन्होंने हाल ही में सपा सांसदों की बैठक बुलाई और 2027 की रणनीति पर मंथन किया। पार्टी का फोकस PDA को और मजबूत करने, कांग्रेस गठबंधन को बनाए रखने और संगठनात्मक विस्तार पर है।
डिप्टी CM केशव मौर्य और ओम प्रकाश राजभर के दावे सपा में फूट की अटकलें तेज कर रहे हैं, लेकिन अखिलेश यादव ने इन्हें BJP की 'मानसिकता' बताया है। फिलहाल कोई सांसद सार्वजनिक रूप से बगावत पर नहीं उतरा है।
2027 यूपी चुनाव से पहले यह बहस तेज होगी। सपा की एकता और BJP की रणनीति दोनों पार्टियों के भविष्य तय करेंगी। अखिलेश यादव परिवारवाद के आरोपों से मुक्त होकर PDA को कितना प्रभावी बना पाते हैं और BJP कितने असंतुष्ट नेताओं को अपनी ओर खींच पाती है - यह आने वाले महीनों में साफ होगा।













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