Lok Sabha Election: सीएम योगी के 4 नए मंत्री पश्चिमी यूपी से पूर्वांचल तक कैसे साधेंगे जातीय समीकरण

UP Cabinet Expansion News: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगीनाथ ने मंगलवार को अपनी कैबिनेट का जिस तरह से विस्तार किया है और उसमें जिन चेहरों को शामिल किया गया है, वह पूरी तरह से जातीय समीकरणों को और दुरुस्त करने की कोशिश लग रही है।

यूपी कैबिनेट में शामिल किए गए चारों नए मंत्रियों में से दो पश्चिमी यूपी का प्रतिनिधित्व करते हैं तो दो का पूर्वांचल में अच्छा खासा प्रभाव है। इस मंत्रिमंडल विस्तार के माध्यम से मुख्यमंत्री ने सवर्ण से लेकर ओबीसी और दलितों की सबसे बड़ी जाति को भी साधने की कोशिश की है।

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पूर्वांचल में ओबीसी पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश
2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को पूर्वांचल में बसपा-सपा गठबंधन से काफी नुकसान झेलना पड़ा था। इस नुकसान की भरपाई की कोशिश मंत्रिमंडल विस्तार में महसूस की जा सकती है।

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    वहां भाजपा के ओबीसी वोट बैंक में सेंध लगा था, इसी वजह से सीएम योगी ने इलाके के दो प्रभावशाली ओबीसी नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी है।

    राजभर से भाजपा को क्या उम्मीद?
    सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के ओम प्रकाश राजभर को मंत्री बनाकर भाजपा ने न सिर्फ राजभर समाज को साधने का प्रयास किया है, बल्कि उनके माध्यम से बिंद, निषाद, बंजारा आदि अन्य ओबीसी जातियों को भी एकजुट रखने का दांव चला है। पूर्वांचल की कई सीटों पर इन जातियों का झुकाव अंतिम नतीजे को भी झुकाने का दम रखता है।

    दारा सिंह चौहान भाजपा के बड़े पिछड़े चेहरे
    दारा सिंह चौहान भाजपा के एक कद्दावर ओबीसी चेहरे हैं। खुद नोनिया जाति से आने वाले दारा सिंह पार्टी के लिए कितने अहम हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि सपा से चक्कर लगाकर वापस लौटने के बाद घोसी उपचुनाव में हारने पर भी पार्टी ने उन्हें विधान परिषद में जगह दी। चौहान भाजपा के पिछड़ा जाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

    मायावती के वोट बैंक पर भी नजर
    योगी कैबिनेट में हाल ही में एनडीए का हिस्सा बने राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के विधायक अनिल कुमार को भी जगह दी गई है। ये मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र की पुरकाजी विधानसभा से एमएलए हैं।

    अनिल कुमार दलितों की उस जाटव जाति से हैं, जिसकी सबसे बड़ी नेता बसपा सुप्रीमो मायावती मानी जाती हैं। अनुसूचित जाति का यह समाज बीएसपी का कोर वोटर रहा है। यूपी में दलितों की आबादी करीब 21% है। उनमें आधे से ज्यादा या करीब 54% इसी जाति की आबादी है।

    एक तो आरएलडी का सहयोगी बन जाना और उसपर से एक दलित नेता को मंत्री बनाना, भाजपा की राजनीति में अभी पूरी तरह से फिट बैठ रहा है। आरएलडी जाट आधारित पार्टी है और उसके साथ ही जाटव मतदाताओं का मूल रूप से पश्चिमी यूपी में काफी प्रभाव देखा जाता है।

    विरोधियों की ओर से कई बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यूपी में ब्राह्मण-विरोधी प्रोजेक्ट करने की कोशिश होती रही है। कैबिनेट विस्तार में पश्चिमी यूपी के एक बड़े ब्राह्मण चेहरे सुनील कुमार शर्मा को भी जगह दी गई है। वे गाजियाबाद की साहिबाबाद विधानसभा से एमएलए हैं। वह अपना चुनाव रिकॉर्ड मतों से जीत चुके हैं।

    इस तरह से योगी कैबिनेट के विस्तार में आने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए, उस जातीय समीकरण पर जोर नजर आ रहा है, जो भारतीय जनता पार्टी के जनाधार को और मजबूत करने के लिए लग रहा है।

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