इन्हीं 2 नेताओं में से कोई एक हो सकता है UP BJP का नया अध्यक्ष! कौन हैं ये दोनों नेता और क्या है उनकी जाति?
UP BJP President: उत्तर प्रदेश बीजेपी की कमान किसके हाथ जाएगी, इस पर सियासी हलचल तेज हो गई है। जिला और मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद प्रदेश परिषद सदस्यों का ऐलान भी हो चुका है। अब सारी नजरें प्रदेश अध्यक्ष पर टिकी हैं। पार्टी ने आधिकारिक तौर पर चुनाव प्रक्रिया घोषित कर दी है और संकेत साफ हैं कि अगले 72 घंटे में नया अध्यक्ष सामने होगा। इस बार मुकाबला और भी दिलचस्प इसलिए हो गया है क्योंकि रेस में अचानक दो नए नामों की एंट्री ने पूरा समीकरण पलट दिया है।
बीजेपी संगठन चुनाव अधिकारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने बताया है कि प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए नामांकन 13 दिसंबर को होगा। दोपहर 1 से 2 बजे तक लखनऊ बीजेपी दफ्तर में कागज दाखिल किए जाएंगे और उसके अगले दिन नाम घोषित कर दिया जाएगा।

इधर दिल्ली में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग में संघ और बीजेपी नेतृत्व के बीच विस्तृत चर्चा हुई है। इस बैठक में साफ हो गया कि पार्टी 16 दिसंबर से पहले ही अध्यक्ष के नाम पर मुहर लगा देगी। सूत्रों का दावा है कि सभी संगठनात्मक तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और इस वीकेंड केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी लखनऊ पहुंचेंगे ताकि चुनाव की अंतिम औपचारिकताएं पूरी हो सकें।
🟡 OBC चेहरे की तलाश, नई रणनीति का संकेत
सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस बार अध्यक्ष किस जाति से होगा। अंदरखाने चर्चा है कि बीजेपी इस बार भी किसी OBC नेता पर दांव लगाने के मूड में है। वजह साफ है गैर-यादव OBC वोट बैंक को और मजबूत करना।
उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की रेस में बीएल वर्मा, निरंजन ज्योति, बाबूराम निषाद, स्वतंत्र देव सिंह जैसे नाम पहले से चर्चा में थे, लेकिन अब दो नाम अचानक तेजी से उभरे हैं पंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह। मीडिया सूत्रों के मुताबिक इन्हीं दोनों नेताओं में से कोई एक अगला उत्तर प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष हो सकता है। आइए जानें कौन हैं पंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह और क्या है उनकी जाति?
🟡 Who is Pankaj Chaudhary: पंकज चौधरी: पार्षद से सांसद तक
🔹 सूत्रों के मुताबिक यूपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद की रेस में इस समय सबसे आगे केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का नाम है। पंकज चौधरी कुर्मी जाति से हैं। उन्हें पूर्वांचल में कुर्मी बिरादरी के बड़े नेता के रूप में देखा जाता है और पार्टी उन्हें ओबीसी स्ट्रैटेजी को और मजबूत करने के लिए आगे बढ़ा सकती है। कुर्मी समुदाय पूर्वांचल में बेहद प्रभावशाली OBC वर्ग है। उनकी पहचान शालीन, जमीन से जुड़े और संगठन के प्रति बेहद वफादार नेता की रही है।
🔹 पंकज चौधरी ने 1989 में गोरखपुर नगर निगम में पार्षद बनकर राजनीति की शुरुआत की थी। महाराजगंज अलग जिला बनने के बाद उन्होंने इसे अपनी राजनीति का केंद्र बनाया और 1991 में पहली बार लोकसभा पहुंचे। इसके बाद वे 7 बार सांसद चुने जा चुके हैं।

🔹 2024 के हलफनामे के मुताबिक पंकज चौधरी की कुल संपत्ति लगभग 41.90 करोड़ रुपये है। स्थानीय से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुँचने वाले पंकज चौधरी बीजेपी के वफादार, मेहनती और पूर्वांचल में पार्टी को मजबूत करने वाले प्रमुख चेहरे माने जाते हैं।
🔹 20 नवंबर 1964 को गोरखपुर में जन्मे पंकज चौधरी जमींदार परिवार से आते हैं। उनके पिता भगवती प्रसाद चौधरी जमींदार थे, जबकि मां उज्ज्वल चौधरी महाराजगंज की जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। उनकी पत्नी भाग्यश्री चौधरी सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं और उनके दो बच्चे हैं।
🟡 Who is Dharampal Singh: धर्मपाल सिंह: लोधी बिरादरी का दमदार चेहरा
🔹 दूसरे बड़े दावेदार हैं योगी सरकार में मंत्री धर्मपाल सिंह। धर्मपाल सिंह पिछड़ी जाति (लोधी/राजपूत) समुदाय से आते हैं और आगरा-बरेली क्षेत्र में उनकी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है।
🔹 धर्मपाल सिंह उत्तर प्रदेश की राजनीति में काफी अनुभवी चेहरा हैं। वे 17वीं विधानसभा में सदस्य रहे। उन्होंने एल.एल.बी., बी.एड. और एम.ए. की पढ़ाई महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय से की है।
🔹 धर्मपाल सिंह चार बार विधायक रह चुके हैं और हर बार आंवला विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया है। 2017 में उन्होंने सपा के सिद्धराज सिंह को हराकर विधानसभा सीट जीती थी।

🔹 उनकी जाति संरचना भी बीजेपी की OBC रणनीति में फिट बैठती है। लोधी जाति को प्रभावशाली पिछड़ा वर्ग माना जाता है और पार्टी इस समूह को साधने के लिए भी उन्हें आगे कर सकती है।
🟡 72 घंटों में तस्वीर साफ - कौन बनेगा अगला अध्यक्ष?
सूत्रों का कहना है कि पंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह में से एक पर सहमति बनती दिख रही है। अगर एक से ज्यादा नामांकन हुए तो चुनाव भी संभव है, लेकिन अगर सिर्फ एक नामांकन हुआ तो 14 दिसंबर को ही नए अध्यक्ष का औपचारिक ऐलान हो जाएगा। UP BJP की कमान किस OBC नेता के हाथ जाएगी, यह देखने के लिए प्रदेश की सियासत बेसब्री से इंतजार कर रही है। अगले 72 घंटे में तस्वीर साफ होगी और प्रदेश राजनीति की नई दिशा भी तय हो जाएगी।












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