‘काजल करना’ यानी ब्रेनवॉश! 'छांगुर बाबा' के धर्मांतरण वाले कोडवर्ड् को UP ATS ने किया डिकोड
UP ATS Chhangur Baba Codewords: उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने धर्मांतरण रैकेट के मास्टरमाइंड जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा का नाम सामने आया है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बाबा अपने नेटवर्क में कोडवर्ड्स का इस्तेमाल करता था, जिससे उसके इरादे और गतिविधियाँ लंबे समय तक छिपी रहीं।
ATS की गहन पूछताछ में यह बात सामने आई कि छांगुर बाबा अपने साथियों से संवाद के दौरान सीधे शब्दों का प्रयोग नहीं करता था, बल्कि एक विशेष कोड भाषा का उपयोग करता था। इसका मकसद था - पुलिस या आम लोगों को भ्रम में रखना और अपनी योजना को गुप्त बनाए रखना।

धर्मांतरण का गुप्त जाल: ATS ने खोले कोडवर्ड्स
ATS की जांच में जो कोडवर्ड सामने आए, वे साफ तौर पर यह दिखाते हैं कि यह सिर्फ एक अपराध नहीं बल्कि देश की सामाजिक और धार्मिक संरचना को तोड़ने की साजिश थी:
- लड़कियों को 'प्रोजेक्ट' कहा जाता था
- धर्मांतरण को 'मिट्टी पलटना'
- ब्रेनवॉश को 'काजल करना'
- बाबा से मिलने को 'दीदार करवाना'
- निकाह और जीवन शुरू करने की बात को 'धमात' कहा जाता था
इन शब्दों के जरिए बाबा और उसके साथी ना सिर्फ धर्म परिवर्तन की योजना बनाते थे, बल्कि लड़कियों और युवाओं को बहलाकर, डराकर या फुसलाकर अपने जाल में फँसाते थे।
युवाओं को बनाया गया टारगेट: विदेश भेजने और निकाह का झांसा
छांगुर बाबा और उसका गिरोह खासतौर पर आर्थिक रूप से पिछड़े, अनुसूचित जातियों और दलित वर्ग के लोगों को निशाना बना रहा था। लड़कियों को निकाह और नया जीवन देने का झांसा देकर उनको फंसाता था। युवाओं को मुफ्त इस्लामी शिक्षा, विदेश में नौकरी और आर्थिक सहायता का लालच दिया जाता था।
बाबा के कुछ संपर्क नेपाल और खाड़ी देशों में भी थे, जहाँ से युवाओं को धार्मिक कट्टरता और प्रशिक्षण देने की योजना थी। ध्यान देने वाली बात यह है कि इन योजनाओं को आस्था के नाम पर ढका गया, लेकिन असल में यह एक संगठित धार्मिक कट्टरता फैलाने की योजना थी।
दरगाह से चल रहा था रैकेट का संचालन
ATS की रिपोर्ट बताती है कि यह पूरा नेटवर्क बलरामपुर जिले की चांद औलिया दरगाह से संचालित किया जा रहा था। छांगुर बाबा इस दरगाह परिसर में नियमित रूप से बड़ी सभाएं आयोजित करता था। इन आयोजनों में भारतीय और विदेशी नागरिक दोनों शामिल होते थे।
बाबा ने अपनी धार्मिक पुस्तक 'शिजरा-ए-तय्यबा' भी प्रकाशित करवाई थी, जिसमें इस्लाम के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा दिया गया। यह किताब धर्मांतरण को प्रेरित करने के लिए प्रयुक्त होती थी, खासकर उन समुदायों को निशाना बनाकर जो सामाजिक या आर्थिक रूप से कमजोर हैं
ईडी ने की आर्थिक जांच शुरू, संपत्तियों का पता लगाने की कोशिश
इस अवैध धर्मांतरण रैकेट से प्राप्त अपराध की कमाई को लेकर भी जांच तेज कर दी गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ATS, बलरामपुर के जिला प्रशासन और कई बैंकों को पत्र भेजकर
- जमालुद्दीन,
- उसके परिवार
- और उससे जुड़े अन्य लोगों की चल-अचल संपत्तियों,
- बैंक खातों,
- और वित्तीय लेन-देन की जानकारी मांगी है
संदेह है कि इस नेटवर्क ने अंतरराष्ट्रीय फंडिंग का भी इस्तेमाल किया है और हवाला जैसी गतिविधियों के माध्यम से धन का अवैध प्रवाह किया गया है
योगी आदित्यनाथ का बयान: "यह गतिविधियां राष्ट्रविरोधी हैं"
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, "प्रारंभिक जांच से स्पष्ट है कि आरोपी जमालुद्दीन की गतिविधियां केवल समाज के खिलाफ नहीं, बल्कि राष्ट्र के विरुद्ध भी हैं। हम इस तरह की साजिशों को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
मुख्यमंत्री ने ATS को निर्देश दिए हैं कि इस मामले की गहराई से जांच की जाए और जो भी इसमें शामिल हो, चाहे वो कितना भी बड़ा हो, कानून के शिकंजे से न बच सके।
धार्मिक विश्वास की आड़ में राष्ट्र विरोधी साजिश
छांगुर बाबा का यह नेटवर्क कोई सामान्य धार्मिक संगठन नहीं, बल्कि एक कट्टरपंथी और देशविरोधी विचारधारा से प्रेरित एक खतरनाक गठजोड़ था। धर्म परिवर्तन के इस पूरे अभियान को सोशल इंजीनियरिंग, कोडवर्ड्स, लालच, डर और भावनात्मक शोषण के जरिए अंजाम दिया जा रहा था। ATS और ED की संयुक्त कार्रवाई अब इस बात को सुनिश्चित करेगी कि इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा जाए और समाज की एकता व राष्ट्र की अखंडता को खतरा पहुंचाने वाले तत्वों को कड़ी सजा मिले। यह मामला अब सिर्फ धर्मांतरण का नहीं, बल्कि एक संगठित राष्ट्रविरोधी साजिश का रूप ले चुका है - और इसकी परतें अभी और खुलनी बाकी हैं।












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