यूपी विधानसभा चुनाव 2017: तो सच में कबाड़े में जाएगी सपा, बसपा से अखाड़े में होगी केवल भाजपा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा, बसपा और बीजेपी तीन प्रमुख पार्टियों में टक्कर का अनुमान लगाया जा रहा है। सर्वे में सीधी टक्कर बीजेपी और सपा में है, लेकिन स्थिति तब है जब सपा में बिखराव नहीं हो।

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर सियासी संग्राम तेज होता जा रहा है। सभी प्रमुख सियासी दल प्रदेश की सत्ता को अपने हाथ में रखने के लिए खास रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। हालांकि सभी सियासी दलों की नजर प्रदेश की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी में जारी घमासान पर भी टिकी हुई है। ऐसा इसलिए क्योंकि सभी दलों की फाइनल रणनीति सपा के इर्द-गिर्द ही बनाई जा रही है। चुनाव चिन्ह साइकिल पर घमासान का परिणाम क्या होगा, इस पर किसका हक होगा ये फैसला चुनाव आयोग को करना है। इस बीच उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का राजनीतिक भविष्य क्या होगा इसको लेकर चर्चा का दौर जारी है।

election यूपी के राजनीतिक भविष्य के लिए कितनी जरूरी है सपा, ये है वजह

यूपी के ताजा सियासी हालात पर क्या सोच रहे हैं राजनीतिक जानकार

राजनीतिक जानकारों के मानें तो सपा में झगड़े का विधानसभा चुनाव में दो तरीके से असर पड़ेगा। पहला, अगर समाजवादी पार्टी में टूट नहीं होती है तो इससे पार्टी को फायदा ज्यादा मिलेगा। पार्टी से जुड़ा मतदाता एक जगह पर वोट करेगा। इससे दूसरे दलों को नुकसान की संभावना है। वहीं दूसरी ओर अगर समाजवादी पार्टी में टूट होती है तो इससे सपा के दोनों ही धड़ों को खासा नुकसान होने की उम्मीद है। इसकी वजह ये है कि वोटरों का वोट उनके बीच बंट जाएगा। जिसका सीधा फायदा दूसरे दलों को मिलेगा। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा, बसपा और बीजेपी तीन प्रमुख पार्टियों के बीच टक्कर का अनुमान लगाया जा रहा है।

सपा में अलगाव से दूसरे दलों को फायदे की उम्मीद

अभी तक सामने आए यूपी के सर्वे पर गौर करें तो मुकाबला बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच ही माना जा रहा है। हालांकि ये स्थिति तब है जब समाजवादी पार्टी एक होकर चुनाव मैदान में उतरे। दलित वोट की बात करें तो वो सीधे तौर पर मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी को ही जाएगा। बीजेपी की बात करें तो उन्हें उच्च श्रेणी और ओबीसी के वोटरों पर खास नजर है। वहीं बात करें सपा की तो उन्हें यादव वोटबैंक उनका मजबूत पक्ष रहा है। हालांकि अगर सपा में दो गुट हुए तो इस वोटबैंक में सेंध के आसार नजर आ रहे हैं। राजनीतिक जानकार प्रोफेसर संदीप शास्त्री के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में सीधा मुकाबला किसी के बीच नहीं है। यहां बीजेपी, सपा और बहुजन समाज पार्टी के बीच बहुकोणीय मुकाबला है। मैं कांग्रेस को इस जंग से बाहर रख रहा हूं। समाजवादी पार्टी में क्या होगा ये बेहद अहम है। अगर सपा में टूट होती है तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा। इसकी अहम वजहें भी हैं।

अल्पसंख्यक मतदाताओं का रुख क्या होगा?

उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक मतदाताओं की नजर हमेशा समाजवादी पार्टी पर रहती है। हालांकि सपा में टकराव की स्थिति में माना जा रहा है कि इस वोटबैंक में सेंध जरूर लगेगी। प्रोफेसर संदीप शास्त्री ने बताया कि 2014 के आम चुनावों में बीजेपी को महज 8 फीसदी मुस्लिम वोट मिले थे, जबकि राष्ट्रीय प्रतिशत 28 फीसदी था। अभी भी ज्यादा कुछ नहीं बदला है। मैं आश्चर्य नहीं करूंगा अगर अल्पसंख्यक वोट इन चुनावों में अहम रोल अदा करे। सर्वे दिखा रहे हैं कि मुस्लिम वोटर सपा का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन अगर सपा में टूट होती है तो मुस्लिम वोटरों के लिए बसपा ही एक मात्र विकल्प बचेगा। उन्होंने आगे कहा कि सपा में टूट की सूरत में बसपा ही एक मात्र ऐसी ताकत है जो बीजेपी को उत्तर प्रदेश में टक्कर दे सकती है। अगर सपा में टूट के मुस्लिम वोटरों को में बिखराव हुआ तो ये तीन हिस्सों में होगा। इनमें एक वर्ग सपा के एक हिस्से को वोट करेगा, दूसरी हिस्सा सपा के दूसरे वर्ग को समर्थन करेगा। वहीं एक वर्ग ऐसा भी होगा जो बहुजन समाज पार्टी को सपोर्ट करेगा।

इस चुनाव में क्या होगी वोटरों की सोच?

चुनावी जानकारों के मुताबिक मतदाता आमतौर पर किसी प्रत्याशी से ज्यादा भरोसा पार्टी पर करते हैं। अगर वो किसी खास नेता पर भरोसा करते हैं तो उससे पहले वो पार्टी नेतृत्व की ओर जरूर देखते हैं। प्रोफेसर संदीप शास्त्री के मुताबिक जाति और समुदाय की तुलना में वोटरों की नजर उनके अनुभव पर भी होती है। कई बार मतदाता अपने अनुभवों से भी चुनाव में अपना फैसला लेते हैं।

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