हारे हुए स्वामी प्रसाद को BJP के खिलाफ 'तुरुप का इक्का' बनाने के मूड में अखिलेश, ये है प्लानिंग
समाजवादी पार्टी ने अपनी रणनीति में भाजपा छोड़कर सपा में आए स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए एक खास योजना तैयार की गई है।
लखनऊ, 14 मार्च: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी सरकार बनाने की तैयारियों में जुट गई है और मंत्रिमंडल पर चर्चा के लिए भावी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली के दौरे पर हैं। माना जा रहा है कि होली के बाद यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार का शपथ ग्रहण हो सकता है। वहीं, समाजवादी पार्टी भी हार के बाद अब 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर नई रणनीति बना रही है और इस रणनीति में भाजपा छोड़कर सपा में आए स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए एक खास योजना तैयार की गई है।

करहल से स्वामी को उतार सकती है सपा
गौरतलब है कि यूपी चुनाव के दौरान भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य को अखिलेश यादव ने पार्टी के टिकट पर फाजिलनगर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा था। हालांकि स्वामी प्रसाद मौर्य विधानसभा नहीं पहुंच सके और उन्हें भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र कुमार कुशवाहा ने 45580 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया। अब समाजवादी पार्टी ने योजना बनाई है कि एक बार फिर स्वामी प्रसाद मौर्य को अखिलेश यादव की विधानसभा सीट करहल से चुनाव मैदान में उतारा जाएगा। करहल सीट से अखिलेश यादव चुनाव जीते हैं, लेकिन सपा प्रमुख इस सीट से इस्तीफा देकर अपना फोकस आजमगढ़ लोकसभा सीट पर करना चाहते हैं।

किसने दिया अखिलेश को ये सुझाव
सूत्रों के हवाले से खबर है कि स्वामी प्रसाद मौर्य को करहल सीट से चुनाव मैदान में उतारने का सुझाव सपा प्रमुख अखिलेश यादव के एक बेहद करीबी और दिग्गज नेता ने दिया है। स्वामी प्रसाद मौर्य को फिर से चुनाव मैदान में उतारकर समाजवादी पार्टी गैर-यादव ओबीसी वर्ग को यह संदेश देना चाहती है कि सपा उन्हें अब अपने अभिन्न अंग के तौर पर देख रही है।

एक तीर से दो निशाने साधना चाहती है सपा
इसके अलावा समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों का यह भी मानना है अगर करहल सीट से स्वामी प्रसाद मौर्य को एक बार फिर चुनाव मैदान में उतारा जाता है, तो ना केवल गैर यादव ओबीसी वोटों के बीच एक पॉजिटिव मैसेज जाएगा, बल्कि पार्टी के सहयोगी दलों का भी भरोसा मजबूत होगा। स्वामी प्रसाद मौर्य के जरिए सपा अपने सहयोगी दलों को साफ तौर पर बताना चाहती कि उनका गठबंधन केवल यूपी चुनाव के लिए ही नहीं था, बल्कि 2024 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद भी कायम रह सकता है।

भाजपा ने साजिश के तहत स्वामी को हराया?
आपको बता दें कि अखिलेश यादव ने रविवार शाम को स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ एक अहम बैठक की थी, जिसके बाद समाजवाटी पार्टी के अंदर अटकलें तेज हो गईं। वहीं, सूत्रों का यह भी कहना है कि अखिलेश यादव इस बात को स्पष्ट तौर पर मान चुके हैं कि सत्ताधारी भाजपा ने एक तय साजिश के तहत स्वामी प्रसाद मौर्य को चुनाव हराने पर अपना पूरा जोर लगाया।

बीएसपी से भाजपा और अब सपा में स्वामी
गौरतलब है कि स्वामी प्रसाद मौर्य 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा ने स्वामी प्रसाद मौर्य को पडरौना सीट से टिकट दिया और जीतने के बाद उन्हें यूपी में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। हालांकि 2022 के यूपी चुनाव से पहले ही स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा का साथ छोड़ दिया और सपा में शामिल हो गए।
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