जानिए बयान देने से क्यों बच रहे हैं यूपी के भाजपा विधायक
लखनऊ, 14 नवंबर। उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले चुनाव से पहले सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी दोबारा जीत हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। भाजपा नेता, कार्यकर्ता हो या विधायक सभी बूथ स्तर पर नजर आ रहे हैं। चुनाव से पहले अन्य पार्टियों के विधायक जनसभाओं में और न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया के माध्यम से जमकर बयानबाजी कर रहे हैं लेकिन भाजपा विधायक किसी भी मुद्दे पर बयान देने से कतराते नजर आ रहे हैं आइए जानते हैं आखिर उन्हें क्या भया सता रहा है?

यूपी विधायकों को सता रहा ये भय
उत्तर प्रदेश में भाजपा के कई विधायकों के टिक कटने तय है। विधायकों में डर है कि कहीं उनका टिकट ना कट जाए इसलिए वो किसी भी बयानबाजी में पड़ने से बच रहे हैं। भाजपा सूत्रों के अनुसार कई ऐसे विधायकों के टिकट कटने तय है जो लगातार भाजपा के विरोध में बयानबाजी करते रहे हैं और प्रशासन के खिलाफ धरना-प्रदर्शन में शामिल रहे हैं।
विधायकों का तैयार किया गया है रिपार्ट कार्ड
बता दें भाजपा ने अपने विधायकों का रिपोर्ड कार्ड भी तैयार किया है और उनके क्षेत्र का सर्वे भी करवाया है। विधायकों के मिले फीडबैक के आधार पर ही आगामी चुनाव में टिकट सुनिश्चित होगा।
भाजपा 150 सीटों पर अपने बदल सकती है प्रत्याशी
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष ने कुछ दिनों पहले साफ किया था कि आगामी चुनाव में लोकप्रिय विधायक और पूर्व प्रत्याशियों की बजाय पार्टी नए चेहरों पर भी दांव लगा सकती है। भाजपा 150 सीटों पर अपने प्रत्याशी बदल सकती है। भाजपा सूत्रों के अनुसार पूर्वांचल के 30 फीसदी सीट पर मौजूदा विधायक और पिछले चुनाव के कई भाजपा प्रत्याशी डेंजर जोन में हैं।
बयान देने से कर रहे साफ इंकार
एक भाजपा विधायक ने साफ कहा कि भाई अभी तो कुछ भी नहीं बोलूंगा पता नहीं कौन सी बात का बतंगड़ ना बन जाए। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा कि विधायकों को अपना टिकट कटने का भय सता रहा है। इसके अलावा लखीमपुर की घटना के बाद विधायक ही नहीं भाजपा नेता और कार्यकर्ता फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं क्योंकि उनका एक गलत बयान विपक्षी पार्टी को मौका तो देगा ही साथ प्रदेश में भाजपा का बना बनाया खेल बिगाड़ देगा।












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