Exclusive: यूपी चुनाव में आखिर क्या है सपा-कांग्रेस और AAP का प्लान बनारस
यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी घमासान और राजनैतिक बयानबाजी के बीच दस दिन पहले लोकमंच बनारस का गठन हुआ। इस फोरम का गठन आप के कार्यकर्ताओं के जरिए हुआ, जो सपा-कांग्रेस गठबंधन को समर्थन देगी।
वाराणसी। "बनारस को लेकर जो गलती 2014 में हुई वो 2017 में नहीं होनी चाहिए। हम यूपी में भले ही चुनाव ना लड़ रहे हों लेकिन बनारस की सभी पांचों सीट पर बीजेपी को हराने के लिए हर सम्भव कोशिश करना चाहिए।" अरविंद केजरीवाल के इस सन्देश के बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने लोकमंच बनारस का गठन किया और सपा-कांग्रेस गठबंधन को बनारस संसदीय क्षेत्र की सभी पांचों विधानसभा सीट पर समर्थन देने का फैसला किया।
यूपी चुनाव में इस दांव क्या होगा असर?
कांग्रेस का प्लान बनारस पीएम को उनके संसदीय क्षेत्र में घेरने के लिए तैयार है और अब आम आदमी पार्टी भी इसका हिस्सा है।

क्या बनी है रणनीति?
सियासी घमासान और राजनैतिक बयानबाजी के बीच दस दिन पहले लोकमंच बनारस का गठन साधारण तरीके से बिलकुल चुपचाप हुआ। इस फोरम का गठन आप के कार्यकर्ताओं के जरिए हुआ। राष्ट्रीय एकता और गंगा जमुना तहजीब बरकरार रहे, इस नाम पर इस फोरम का गठन हुआ। लेकिन जब आप के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष, रविदास जयंती पर दस फरवरी को बनारस आते हैं और कांग्रेसी नेताओं से संपर्क स्थापित करते हैं तब लोकमंच बनारस को लेकर सुगबुगाहट बढ़ जाती है। 14 फरवरी को लोकमंच बनारस की महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस और सपा के नेताओं की मौजूदगी, इसके बाद लोकमंच बनारस का सपा-कांग्रेस गठबंधन को समर्थन देने का ऐलान, ये तय कर देता है कि आम आदमी पार्टी कांग्रेस के प्लान बनारस के साथ है।

क्या कहा आप नेता और लोकमंच ने?
लोकमंच बनारस के संयोजक अब्दुल्लाह खान और मीडिया प्रभारी एवं प्रवक्ता राजीव शुक्ला ने बताया कि लोकमंच बनारस विधानसभा चुनाव में बनारस संसदीय क्षेत्र के सभी पांच सीटों पर सपा-कांग्रेस गठबंधन को समर्थन देगी। लोकमंच बनारस कोई राजनैतिक संगठन नहीं है लेकिन वो धर्म निरपेक्ष ताकतों को एकजुट रखने के लिए और सांप्रदायिक सौहार्द को बरकरार रखने के लिए बनारस के हित में इस फैसले को मानती है। लोकमंच बनारस में ज्यादातर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता हैं लेकिन ये सिर्फ आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए ही नहीं है। ये मंच उन तमाम लोगों का स्वागत करती है जो बनारस की गंगा जमुनी तहजीब की बात करते हैं।

आखिर कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल को धन्यवाद देते हुए पीएम के खिलाफ एक बड़ा गठबंधन बनाने पर प्रसन्नता जाहिर की है। कांग्रेस प्रवक्ता सतीश राय ने बताया कि कोशिश है कि बनारस संसदीय क्षेत्र की पांचों सीटें जीतकर नरेंद्र मोदी के खिलाफ मिड टर्म रेफ्रेंडम का सन्देश बनारस से दिया जाय। साथ ही अल्पसंख्यक वोटों का भी ध्रुवीकरण इस गठबंधन के सहारे किया जा सके।

इस रणनीति पर बीजेपी क्या कहना है?
बीजेपी नेता धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि ऐसा नहीं लगता कि आम आदमी पार्टी का समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन को समर्थन देने से बीजेपी का कोई बड़ा नुकसान होने जा रहा है। बीजेपी नेता आश्वस्त हैं की बनारस की जनता मोदी जी के खिलाफ किसी भी राजनैतिक रणनीति को विफल कर देगी। लोकसभा चुनाव में भी केजरीवाल ने मोदी जी को हराने के लिए हरसम्भव कोशिश की थी लेकिन तब भी उन्हें मुंह की खानी पड़ी थी। इस बार भी कांग्रेस-सपा-आप बुरी तरह हारेंगे।

क्यों बनाई गई ये रणनीति ?
कांग्रेस की रणनीति साफ है कि 2019 से पहले बनारस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चित करना इसे कांग्रेस ने प्लान बनारस का नाम दिया है। इसके लिए राजनैतिक शत्रु अरविंद केजरीवाल का भी सहयोग लेना पड़े तो उससे भी परहेज नहीं है। बसपा की तरफ मुस्लिम वोटरों के जाने की आशंका भी इस प्लान की वजह है। बीजेपी में आंतरिक अंतर्कलह और असंतोष ने कांग्रेस की उम्मीदें भी बढ़ा दी हैं। कांग्रेस चुपचाप एक बड़े राजनैतिक प्लान की तरफ बड़ी स्ट्रेटेजिक तरीके से बढ़ रही है।












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