यूपी विधानसभा चुनाव 2017: विदेशी मीडिया की नजर में मोदी के 'परिवर्तन' का कितना असर?
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान सबकुछ भूलकर फोकस केवल जीत पर ही होता है।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति को साफ करने का वादा किया था। उन्होंने कहा था कि देश की सियासी स्थिति को बदलना होगा। साफ-सुथरी छवि के नेताओं को राजनीति में लाने की बात उन्होंने कही थी। हालांकि सियासी तौर पर बेहद अहम माने जाने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव नजर डालें तो यहां हालात बिल्कुल अलग दिख रहा है।
यूपी चुनाव पर क्या सोच रहा है विदेशी मीडिया?
ऐसा लग रहा है जैसे अभी साफ छवि वाले नेताओं को सत्ता में आने को लेकर इंतजार करना होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने यूपी चुनाव को लेकर जिस नेता को सिपहसालार तय किया है उन पर करीब 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं। हम बात कर रहे हैं केशव प्रसाद मौर्य की, जिन्हें बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष बनाया है।

यूपी में किसकी बनेगी सरकार?
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान सबकुछ भूलकर फोकस केवल जीत पर ही होता है। उन्होंने ये भी कहा कि उन पर जो भी आरोप हैं वो गलत है और राजनीतिक द्वेष की भावना से लगाए गए हैं। यूपी में 11 जनवरी से विधानसभा चुनाव का आगाज हो जाएगा। ये चुनाव 7 चरणों में 8 मार्च को खत्म होगा और परिणाम 11 मार्च को आएगा। इस चुनाव में करीब 22 करोड़ लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।

साफ राजनीति पर क्या है बीजेपी का तर्क
केशव प्रसाद मौर्य पर लगे आरोपों पर पार्टी और प्रधानमंत्री कार्यालय से सवाल किया गया तो पता चला कि इससे कोई समस्या नहीं है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि ये कोई परेशानी की बात नहीं है। केशव प्रसाद मौर्य पर जो भी आरोप हैं हिंदुत्व की वजह से है, पार्टी की नजर में ये आपराधिका मामले नहीं हैं। इस मामले में केशव प्रसाद मौर्य ने रॉयटर्स से कहा कि बीजेपी की नजर केवल उन नेताओं पर है जिन पर कोई भ्रष्टाचार के आरोप नहीं है।

बीजेपी की रणनीति कितनी कामयाब?
2014 के चुनाव पीएम मोदी ने कहा था कि भ्रष्टाचार और कारोबारी फायदे को राजनीति से दूर रखना चाहिए। फिलहाल यूपी चुनाव में राजनीतिक सफाई का मोदी का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है। बीजेपी पुराने तरीके पर ही टिकी हुई है, ये बात पार्टी के घोषणा पत्र में नजर आ रहा है। घोषणा पत्र में विकास का जिक्र है लेकिन दक्षिणपंथी सोच का असर नजर आ रहा है। इसमें मुस्लिम आबादी को लेकर कोई बड़ा ऐलान नहीं है।

किसी भी कीमत पर जीत की चाहत?
जिस तरह से यूपी चुनाव सियासी दल अपने कदम बढ़ा रहे हैं मतदाताओं को फिलहाल राजनीति में नए बदलाव की उम्मीद कम ही नजर आ रही है। लखनऊ में ब्रेड, स्नैक्स और घरेलू सामान बेचने वाले एक दुकानदार की मानें तो राजनीति में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। भ्रष्ट और आपराधिक छवि के लोग फिर से मैदान में हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के एक छात्र के मुताबिक फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी और दूसरे बड़े नेताओं का सपना, राजनीति को साफ करने का असर नहीं के बराबर दिख रहा है। इस मुद्दे पर जानकारों की मानें तो अगर यूपी चुनाव में बीजेपी की हार हुई तो पार्टी 2019 के चुनाव में कुछ बड़ा फैसला ले सकती है। वहीं अगर बीजेपी की जीत हुई तो पार्टी इसी को आधार बनाकर आगे बढ़ेगी।












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