UP में हुई बेमौसम बारिश ने इस तरह बढ़ाई किसानों की मुसीबतें, जानिए
Uttar Pradesh में भारी बेमौसम बारिश ने धान की फसलों की कटाई को और पीछे धकेल दिया है। इस बारिश ने धान, मोटे अनाज या बाजरा, सोयाबीन और दालों जैसी गर्मियों में बोई गई पकी फसलों को नुकसान पहुंचाया है। अक्टूबर में बोई गई आलू की फसल को भी नुकसान हुआ है जिससे कीमतों में तेजी आ सकती है। अधिकारियों ने कहा कि फसलों को नुकसान होने से खाद्य कीमतों में और तेजी आने की संभावना है। ऊंची कीमतें सरकार को चावल के निर्यात पर और अंकुश लगाने के लिए भी मजबूर कर सकती हैं।

धान की बुवाई में आई थी चार फीसदी की गिरावट
मौसम विभाग ने कहा कि उत्तर प्रदेश के कुल 75 जिलों में से 67 में एक अक्टूबर से अब तक अधिक बारिश दर्ज की गई है। दक्षिण-पश्चिमी मानसून अवधि (जून-सितंबर) के दौरान, उत्तर प्रदेश में सामान्य की तुलना में 28 प्रतिशत कम बारिश हुई। राज्य के 75 में से 53 जिलों में कम मॉनसून वर्षा दर्ज की गई, जिसके परिणामस्वरूप पिछले वर्ष की तुलना में धान की बुवाई में 4 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5.7 मिलियन हेक्टेयर हो गई।
खरीफ की फसलों के नुकसान का आंकलन
उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में अरहर और धान की बिजाई कर चुके किसान पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण अपने खेतों में पानी भर जाने से चिंतित हैं। कृषि विभाग को अभी खड़ी फसलों को बचाने के लिए उठाए गए कदमों के प्रभाव का आकलन करना बाकी है। इस बीच, राज्य सरकार ने खरीफ फसलों के नुकसान का आकलन सर्वेक्षण करना शुरू कर दिया है।
किसानों के सामने भी चावल खरीदने की मौत
भारी बारिश से धान की फसल को इतना नुकसान हुआ है कि किसानों ने कहा कि उन्हें अपने परिवार का पेट पालने के लिए चावल खरीदना होगा। चावल के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक उत्तर प्रदेश की 2020-21 फसल वर्ष (जुलाई-जून) में देश के 124.27 मीट्रिक टन चावल उत्पादन में लगभग 13 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।
धान की फसल हुई प्रभावित
उत्तर प्रदेश राइस मिल्स एसोसिएशन के अनुसार, इस महीने बारिश के कारण लगभग 60 प्रतिशत खड़ी धान की फसल प्रभावित हुई है। चावल मिल मालिकों ने सरकार से राज्य एजेंसियों द्वारा धान खरीद के मानदंडों में ढील देने को कहा है। आलू और दलहन की खड़ी फसल को भी बारिश से नुकसान पहुंचा है।












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