BJP-SP के बीच होगी राज्यसभा सीटों की जंग, जानिए BSP और कांग्रेस का क्या होगा
लखनऊ, 12 मई: उत्तर प्रदेश में हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव के बाद अब एक बार फिर राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू होगी और शह-मात का खेल भी होगा। चुनाव आयोग की तरफ से देशभर की 57 राज्यसभा सीटों के लिए चुनावों की घोषणा कर दी है। इसमें सबसे ज्यादा निगाहें यूपी पर ही होंगी क्योंकि यूपी में 11 सीटें खाली हो रही हैं। कई दिग्गजों की राज्यसभा से विदाई होगी तो बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच चुनावी बिसात भी बिछेगी क्योंकि विधानसभा की अधिकांश सीटें भी इन्हीं के पास हैं। इस चुनाव में सबसे बुरी स्थिति कांग्रेस और बससपा की है क्योंकि विधानसभा चुनाव में इनका प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा था। बसपा को एक और कांग्रेस को दो सीटों पर संतोष करना पड़ा था।

सपा और भाजपा के बीच होगी टक्कर
दरअसल फिलहाल यूपी की राजनीति की बात की जाए तो इस बार बीजेपी और सपा में मुकाबला होने की उम्मीद है क्योंकि बीजेपी के पास सबसे ज्यादा सीटें विधानसभा में हैं। उसके बाद दूसरे नंबर पर सपा है। बसपा और कांग्रेस के पास उतनी सीटें नहीं बची हैं कि वह एक भी सीट पर जीत हासिल कर सके। फिलहाल यूपी की 11 सीटें हैं जो जुलाई में खाली हो जाएंगी। सेवानिवृत्त हो रहे 11 सांसदों में से पांच भाजपा के, तीन सपा के, दो बसपा के और एक कांग्रेस का है।

11वीं सीट के लिए होगी असली लड़ाई
यूपी विधानसभा में 403 निर्वाचित सदस्यों की ताकत को देखते हुए, प्रत्येक राज्यसभा उम्मीदवार को कम से कम 37 वोटों की आवश्यकता होगी। 273 विधायकों के साथ, भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए आसानी से सात सदस्यों का चुनाव करने में सक्षम होगा, जबकि सपा और उसके सहयोगी (रालोद + एसबीएसपी) के पास कुल 125 विधायक हैं। तीन उम्मीदवारों को आसानी से चुनने में सक्षम होंगे। इसलिए मुकाबला 11वीं सीट पर होगा, जिसके लिए सपा और भाजपा दोनों राजा भैया के जनसत्ता दल लोकतांत्रिक और कांग्रेस सहित अन्य दलों का समर्थन मांगेंगे, जिनके पास दो-दो विधायक हैं और मायावती की बसपा जिसमें एक विधायक है।

यूपी में हैं राज्यसभा की 31 सीटें
दरअसल यूपी ने 31 सदस्यों को राज्यसभा भेजा। इनमें से फिलहाल 22 सांसद भाजपा के, पांच सपा के, तीन बसपा के और एक कांग्रेस के हैं। भाजपा के पांच सेवानिवृत्त आरएस सांसदों में पार्टी के एकमात्र मुस्लिम सांसद जफर इस्लाम, गोरखपुर के वरिष्ठ नेता शिव प्रताप शुक्ला शामिल हैं, जिन्हें यूपी चुनावों में ब्राह्मणों को मजबूत करने का काम सौंपा गया था। सपा के नेता संजय सेठ और सुरेंद्र नागर, और जय प्रकाश निषाद, जो 2008-2009 में मायावती सरकार में राज्य मंत्री थे, इनकी भी सदस्यता समाप्त हो रही है।

कई दिग्गज नेता होंगे सेवानिवृत्त
सपा में अपना कार्यकाल पूरा करने वालों में यूपी विधान परिषद के पूर्व अध्यक्ष सुखराम सिंह यादव शामिल हैं, जिनके बेटे मोहित हाल ही में भाजपा में शामिल हुए थे। इसी तरह पूर्व लोकसभा सांसद और यूपी के कैबिनेट मंत्री रेवती रमन सिंह भी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। अपना कार्यकाल पूरा करने वाले तीसरे सपा सांसद फतेहपुर के पूर्व लोकसभा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद हैं। जहां भाजपा समर्थन के लिए राजा भैया की पार्टी की ओर देख सकती है, वहीं सपा को कांग्रेस पर भरोसा करने की उम्मीद है।

कांग्रेस और बसपा के लिए होगी चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि बसपा की स्थिति पर नजर रखनी होगी। कांग्रेस अपने वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के सेवानिवृत्त होने के साथ ही उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में अपने प्रतिनिधित्व से पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी। प्रसिद्ध वकील और हार्वर्ड स्नातक सिब्बल 5 जुलाई, 2016 को यूपी से राज्यसभा के लिए चुने गए थे, जब कांग्रेस 29 विधायक थे। सिर्फ दो विधायकों के साथ, कांग्रेस उम्मीदवार खड़ा करने की स्थिति में नहीं है। यूपी से पहले सिब्बल ने 1998 में बिहार से राज्यसभा में जगह बनाई। बाद में उन्होंने दिल्ली की चांदनी चौक सीट से जीतकर 2004 और 2009 में सफलतापूर्वक लोकसभा में अपनी जगह बनाई। इसी तरह, बसपा के दो वरिष्ठ नेता - सतीश चंद्र मिश्रा और अशोक सिद्धार्थ - भी उसी दिन सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

10 जून को राज्यसभा सीटों के लिए होगा मतदान
चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। 11 राज्यों में राज्यसभा की 57 खाली सीटों पर 10 जून को चुनाव होंगे। निर्वाचन पद्धति के जरिए किया जाता है। हर राज्य और दो केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों को वहां के विधायक और केंद्रशासित प्रदेश के इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्य मिलकर चुनते हैं। राज्यसभा चुनाव प्रपोशनल रीप्रजेंटेशन सिस्टम के हिसाब से होता है जिसमें सिंगल वोट ट्रांसफरेबल होता है।












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