स्वामी प्रसाद मौर्य और ओम प्रकाश राजभर की बढ़ी टेंशन, जानिए क्यों चुभ रही माया की खामोशी
लखनऊ, 12 फरवरी: उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में इस बार कई सीटों पर लड़ाई दिलचस्प होती दिख रही है तो कई सीटों पर बीजेपी ने विरोधियों की तगड़ी घेरेबंदी की है। एक तरफ जहां अखिलेश यादव पुरानी पेंशन बहाली के मामले को चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाने में जुटे हैं वहीं दूसरी ओर मायावती की खामोशी सबको चुभ रही है। यूपी के सियासी गलियारों में इस उठापटक की काफी चर्चा हो रही है। इस बीच बीजेपी ने ओम प्रकाश राजभर के खिलाफ कालीचरण राजभर को उतारकर कांटे से कांटा निकालने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। कालीचरण के मैदान में आने से अब लोग यही पूछ रहे हैं कि अब ओम प्रकाश राजभर का क्या होगा।

क्या वाकई बीजेपी के दबाव में हैं मायावती
बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती इस समय रैलियों से दूरी बनाए हुए हैं। कभी अपनी रणनीति के लिए विरोधियों में जानी जाने वाली मायावती को लेकर लखनऊ के सियासी गलियारों में तरह तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। सियासी चर्चा कहें या अटकलबाजी लेकिन यह बात आम हो चुकी है कि मायावती किसके दबाव में बाहर प्रचार के लिए उतना सक्रिय नहीं दिख रही हैं जितना पहले के चुनावों में दिखाई देती थीं। विरोधी इस बात पर चुटकी ले रहे हैं कि मायावती ने बीजेपी के सामने घुटने टेक दिए हैं और वह उतना ही कर रही हैं जितना बीजेपी की ओर से इशारा मिल रहा है। इन अटकलों में कितना सच्चाई है यह तो चुनाव के बाद पता लगेगा लेकिन आने वाले दिनों में मायावती की कार्यशैली को लेकर अभी और सवाल उठेंगे।

पुरानी पेंशन को लेकर क्या लामबंद हो रहे कर्मचारी
यूपी विधानसभा के चुनाव में पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा भी छाया हुआ है। बीजेपी जहां नई पेंशन नीति का समर्थन कर रही है वहीं अखिलेश यादव ने ऐलान किया था कि सरकार बनने पर वह बजट मे धन की व्यवस्था कर पुरानी पेंशन को बहाल करेंगे जिससे कर्मचारियों को राहत मिलेगी। सियासी गलियारे में इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं कि अखिलेश का यह वादा उनके लिए मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकता है। कर्मचारी लंबे समय से पुरानी पेंशन की मांग कर रहे हैं और यदि वो अखिलेश के वादे पर भरोसा कर गए तो अखिलेश को यूपी के लाखों कर्मचारियों का समर्थन मिल सकता है।

फाजिलनगर सीट पर स्वामी प्रसाद की टेंशन बढ़ाएंगी बहनजी
बीजेपी छोड़कर सपा में आए स्वामी प्रसाद मौर्य की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले सपा ने उनके बेटे को टिकट देने से इंकार कर दिया और खुद उनका टिकट पड़रौना की बजाए फाजिलनगर में कर दिया। फाजिलनगर चूंकि स्वामी प्रसाद के लिए नई सीट है और यहां उनके लिए चुनौतियां कम नहीं हैं। ऐसा माना जा रहा था कि यादव और मुस्लिम समीकरण के सहारे स्वामी प्रसाद फाजिल नगर से बीजेपी को तगड़ी टक्कर देंगे लेकिन मायावती के एक पत्ते ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया है। मायावती ने फाजिलनगर से एक मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। यानी स्वामी प्रसाद की तगड़ी घेराबंदी बीजेपी और बसपा मिलकर कर रही हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि वह इस चक्रव्यूह से कैसे बाहर निकलते हैं।

क्या बीजेपी अब कांटे से निकालेगी कांटा, ओम प्रकाश राजभर का क्या होगा
यूपी चुनाव में कुछ सीटें ऐसी हैं जहां काफी रोचक तस्वीर उभरकर सामने आ रही है। इसी तरह की परिदृश्य गाजीपुर की जहूराबाद विधानसभा सीट पर देखने को मिल रहा है। सुभासपा के चीफ ओम प्रकाश राजभर का गढ़ माने वाली इस सीट पर बीजेपी और बसपा ने मिलकर ऐसी घेराबंदी की है कि इस चक्रव्यूह से निकलना ओम प्रकाश के लिए आसान नहीं होगा। बताया जा रहा है सपा ने गठबंधन के तहत जहूराबाद की सीट को ओम प्रकाश राजभर को दे दिया था लेकिन शिवपाल यादव की करीबी और पूर्व मंत्री शादाब फातिमा बसपा से चुनाव मैदान में उतरने जा रही हैं।
इससे राजभर की टेंशन पहले से ही बढ़ी थी। अब बीजेपी ने राजभर के खिलाफ कालीचरण राजभर को उतारकर आग में घी डालने का काम किया है यानि राजभर मतों में बिखराव होना तय है। वह भी कालीचरण राजभर इस सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं तो फिर इस बार बीजेपी से उनकी उम्मीदवारी ओम प्रकाश राजभर के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है।












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