पश्चिम की 125 विधानसभा व 25 लोकसभा सीटों पर बढ़ेगी BJP की टेंशन, जानिए जाट समुदाय ने क्यों दिया अल्टीमेटम
लखनऊ, 23 नवंबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन बीजेपी के लिए मुसीबत बना हुआ है। बीजेपी अभी इससे निपटने के तरीके तलाश रही थी तब तक अब जाट आरक्षण का मुद्दा भी गरमाने लगा है। अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति ने केंद्र सरकार से कहा है कि 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में जाट समुदाय ने बीजेपी का साथ दिया था। बीजेपी के शीर्ष नेता और वर्तमान में गृहहमंत्री अमित शाह और पीएम मोदी ने वादा किया था कि जाट समाज को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने का वादा किया था। अब उनको अपना वादा निभाने का समय आ गया है। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा है कि पश्चिमी यूपी के 125 विधानसभा सीटों और 25 लोकसभा सीटों के सांसदों को एक ज्ञापन देकर कहा जाएगा कि वो इसको लागू करवाने का काम करें।

आरक्षण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने वन इंडिया से विशेष बातचीत के दौरान यह बातें कही। मलिक ने कहा, '' हमने अपना कार्यक्रम शुरू किया है। आज मेरठ मंडल और सहारनपुर मंडल के पदाधिकारियों की बैठक थी। परसों मुरादाबाद मंडल और 30 नवंबर तक सभी सातों मंडलों की बैठक कवर कर लेंगे। बरेली, मुरादाबाद, सहारानपुर, मेरठ, अलीगढ़ और आगरा में जिसमें यह र्काक्रमम किया जाएगा।''
यशपाल मलिक ने कहा कि,
''इन सातों मंडलों में जाट समुदाय का वोट प्रतिशत लगभग 16 प्रतिशत के आसपास है। इसमें 125 विधानसभाएं हैं। हमने पीएम और होम मिनिस्टर से कहा है कि जो उन्होंने वादा किया था वो अपना वादा पूरा करें। 2017 में वादा किया था 2019 में किया था। ओबीसी आयोग 2018 में बना था और उसके मेंबर 2019 में बना था। आयोग बने हुए तीन साल गुजर गए हैं। इस बीच कोरोना महामारी भी आ गई और किसान आंदोलन छाया रहा। इस दौरान जाट समुदाय चुप रहा। अब समय आ गया है कि अपनी मांगों को लेकर सांसदों और विधायकों के बीच जाने का काम करेंगे और उन्हें अपनी मांगों से जुड़ा एक ज्ञापन सौंपकर उनके वादे को याद दिलाने का काम करेंगे और कहेंगे वो अपने नेताओं से कहें कि वो हमारी मांगों को पूरा करें।''
मलिक ने कहा कि इस मुद्दे का हल राजनीतिक ही निकलना है। पश्चिम में हम इस परिस्थिति में है कि किसी भी पार्टी के लिए अहम हैं। पश्चिमी में तीस से 35 प्रतिशत हैं लेकिन कुछ सीटों पर हम और प्रभावकारी भूमिका में हैं। जैसे रामपुर में जाट समुदाय की संख्या लगभग पांच हजार है लेकिन ये एक लाख के बराबर काम करेगी। इस तरह से अलग-अलग जगह की अलग अलग परिस्थितियां हैं। पीएम ने खुद ही कहा था कि बीजेपी की सरकार बनाने में जाट समुदाय का हाथ रहा। ये वादा उन्होंने 2015 में किया था तो अब उसको पूरा करने में क्या परेशानी है।
यह पूछे जाने पर कि क्या किसानों की मांगे मोदी ने मान ली इसलिए अब जाट समुदाय चुनाव से पहले बीजेपी पर दबाव बनाना चाहता है, इस पर यशपाल मलिक ने कहा कि किसान आंदोन तो अब शुरू हुआ है। हमारा आंदोलन तो काफी पुराना है। टाइम टाइम पर आंदोलन हुआ। हमें 2014 में रिजर्वेशन मिल गया था। ऐसा नहीं है किसानों आंदोलन की सफलता को देखकर किया। हमें तो पहले ही यूपी और राजस्थान में आरक्षण मिल गया था। इसके साथ ही आठ राज्यों में मिल गया था। मोदी जी ने वादा किया था। अब चुनाव का समय है तो इसका फैसला इसी समय संभव है।

125 विधायकों और 25 सांसदों को देंगे ज्ञापन
मलिक ने कहा कि बीजेपी के पास पूरी तरह से बहुमत है और वो हमारी मांगों को पूरा कर सकते हैं। यूपी में 125 विधानसभा सीट है जिसमें लगभग 15 जाट विधायक हैं लेकिन बाकी 110 विधायक भी तो जाटों के वोट से ही जीतकर आएंगे। इसलिए अब जाट समुदाय अपनी ताकत को चुनाव के समय इस्तेमाल करना चाहता है। पांच राज्यों में से तीन राज्य ऐसे हैं जहां जाट ही यह तय करेगा कि सत्ता किसके पास रहेगी। सरकार की जवाबदेही तय कराने के लिए 125 विधायकों और 25 सांसदों को ज्ञापन दिए जाएंगे दिसंबर में। इसके साथ ही पंजाब और उत्तराखंड में भी दिए जाएंगे। सभी सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के सामने अपनी बात रखेंगे और उनपर दबाव बनाएंगे कि वो इसको लागू करवाने का काम करें।
यशपाल मलिक ने कहा कि अखिल भारतीय जाट संघर्ष समिति के पास अपना पुराना संगठन है और यह सभी सात मंडलों में जल्द से जल्द बैठक कर इसपर आगे की रणनीति बनाने का काम करेगा। सरकार के लिहाज से हमारा हमारा रिप्रजेंटेशन 13 जनवरी 2020 का है। सरकारें आयोग को कहे कि वो अपनी रिकमेंडेशन दे। जब तक सरकार कहेगी नहीं तब तक आयोग अपनी रिकमेंडेशन देगी नहीं। सभी आयोग सरकार के दिशा निर्देश पर ही काम करते हैं और वो यदि कहेंगे तो वो एक महीने क्या 15 दिन के भीतर भी अपनी रिकमेंडेशन सरकार को सौंप देंगे।

यह पूछे जाने पर कि क्या अपनी मांगों को पीएम और होम मिनिस्टर तक पहुंचाने के लिए उनसे मुलाकात का समय मांगा है, इस पर मलिक ने कहा कि,
''हमने अपनी आवाज उठाई है। यदि बुलावा आएगा तो मिलने जाएगा। ज्ञापन में सभी सांसदों एवं विधायकों से कहा जाएगा कि वो पीएम और गृहमंत्री को एक पत्र लिखें कि हमारी मांगे पूरी की जाएं। पिछले चुनाव में भी हमने अपनी मांग रखी थी। उस समय अमित शाह ने दिल्ली में एक हजार जाटों की मिटिंग रखी जिसमें हर जिले से दस दस सामाजिक लोग बुलाए गए थे। उन्होंने कहा था कि आप हमारी मदद करो हम आपकी मांगों को पूरा करने का काम करेंगे। जाट समाज 2014 और 2017 में उनके साथ खड़ा रहा तो जाट समाज पूछेगा कि हमारी मांगों का क्या हुआ।''












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