ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे का काम पूरा, कुएं में शिवलिंग मिलने का दावा

वाराणसी, 16 मई: काशी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। एक वकील के दावे के मुताबिक परिसर के कुएं में शिवलिंग मिला है। मस्जिद के 65 फीसदी हिस्से में सर्वे का काम रविवार तक पूरा कर लिया गया था। बाकी काम सोमवार को पूरा किया गया है। वकीलों का कहना है कि सर्वे के दौरान परिसर के भीतर मौजूद कुएं से शिवलिंग मिला है। उन्होंने कहा है कि इसकी सुरक्षा के लिए वे अदालत जाएंगे। शिवलिंग के बारे में बताया जा रहा है कि यह 12 फीट/ 8 इंच का है। हिंदू पक्ष के एक और वकील मदन मोहन यादव के दावे के मुताबिक नंदी का चेहरा शिवलिंग की ओर था।

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    Survey work has been completed in Gyanwide Mosque Complex in Kashi. According to the claim of a lawyer, Shivling has been found in the well of the premises

    पत्थर की सफाई की गई तो वह शिवलिंग निकला-वकील
    आज की कार्रवाई की जानकारी देते हुए वकील दीपक सिंह ने कहा है, 'यह तीसरे दिन का सर्वे था....एक पत्थर मिला, हम दावा कर रहे हैं कि यह शिवलिंग है। यह करीब 3 फीट ऊंचा है। यह उस जगह पर है, जहां मुसलमान वजू करते हैं। उन्होंने दावा किया था कि यह फाउंटेन है, लेकिन सफाई के बाद पाया गया कि यह शिवलिंग है।'

    परिसर के कुएं से मिला शिवलिंग- वकील
    इससे पहले एक वकील विष्णु जैन ने भी दावा किया था कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के भीतर कुएं से शिवलिंग मिला है। उन्होंने कहा है कि वे इसकी सुरक्षा को लेकर सिविल कोर्ट जाएंगे। जबकि हिंदू पक्ष के एक और वकील मदन मोहन यादव का दावा है कि शिवलिंग नंदी के चेहरे के सामने है। इस बीच कोर्ट से नियुक्त कमिटी जब सोमवार को मौके पर पहुंची तो वहां पर सुरक्षा के काफी सख्त इंतजाम थे।

    क्यों हो रहा है सर्वे ?
    वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद, प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी हुई है, जिसको लेकर अब कानूनी लड़ाई ने जोर पकड़ ली है। वाराणसी की एक अदालत ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) को निर्देश दिया है कि ज्ञानवापी मस्जिद की ढांचे की जांच करे। दरअसल, मस्जिद परिसर में कुछ हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की पूजा के दावे को लेकर मौजूदा विवाद शुरू हुआ है।

    हिंदुओं का पक्ष
    हिंदू पक्ष चाहता है कि साल में एक या दो बार जो ज्ञानवापी परिसर में मौजूद माता श्रृंगार गौरी की पूजा की अनुमति मिलती है, वह रोज मिले। इसके लिए याचिकाकर्ताओं ने परिसर का सर्वे कराने की मांग की है। हिंदू पक्ष की दलील है कि श्रृंगार गौरी की प्रतिमा मस्जिद के भीतर है, जिसके साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए मस्जिद परिसर के अंदर की छानबीन आवश्यक है। इसी वजह से अदालत के आदेश पर सर्वे टीम को पूरे परिसर की जांच और वीडियोग्राफी करने को कहा गया है।

    मुस्लिमों का पक्ष
    हिंदू पक्ष की दलीलों के उलट मुस्लिम पक्ष (इस केस में अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमिटी) का कहना है कि श्रृंगार गौरी की प्रतिमा मस्जिद की पश्चिमी दीवार पर है। पहले उनका दावा था कि अदालत ने सिर्फ परिसर के बाहर की वीडियोग्राफी कराने को कहा है, इसलिए वह सर्वे टीम को भीतर नहीं घुसने देना चाहते थे। लेकिन, बाद में अदालत ने स्थिति स्पष्ट की और तब जाकर सर्वे टीम को मस्जिद के अंदर दाखिल होकर जांच करने का रास्ता साफ हुआ। इस केस की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगता है कि खुद मामले की सुनवाई कर रहे जज ने भी अपनी परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

    किसने डाली है याचिका ?
    यह कानूनी विवाद 18 अप्रैल, 2021 को तब शुरू हुआ, जब दिल्ली की रहने वाली पांच महिलाओं- राखी सिंह, लक्ष्मी देवी, सीता साहू और बाकियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और मस्जिद की दीवार पर स्थित हिंदू देवी-देवताओं की रोजाना पूजा की अनुमति मांगी। उन्होंने अदालत से यह भी अपील की कि यह सुनिश्चित किया जाए कि विरोधी पक्ष प्रतिमाओं को किसी तरह की नुकसान ना पहुंचाएं।

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