Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Supreme Court: 'हर कोई परेशान', SC ने किताबों के साथ दौड़ती लड़की का क्यों किया जिक्र?

Supreme Court On Bulldozer: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 2020 में हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत की कार्यवाही तब तब और चर्चा में आ गई जब कोर्ट के समाने एक वायरल वीडियो पेश किया गया, जिसमें एक छोटी बच्ची को अपनी किताबें पकड़कर भागते हुए देखा गया।

यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है जब पूरी दुनिया 2 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय बाल पुस्तक दिवस मना रही है। यह दिन विशेष तौर पर बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करने और उनके अधिकारों को संरक्षित करने के लिए समर्पित है।

Supreme-Court

Supreme Court on Bulldozer Action : वीडियो पर कोर्ट ने सरकार को फटकारा

न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने इस मामले पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि, "एक वायरल वीडियो में एक छोटी बच्ची को ध्वस्त किए गए घर के बाहर देखा जा सकता है। हर कोई इस तरह के दृश्यों से बहुत परेशान है।" अदालत ने अधिकारियों की आलोचना करते हुए इस कार्रवाई को 'अमानवीय' करार दिया।

न्यायमूर्ति ए.एस. ओका और न्यायमूर्ति भुइयां की पीठ ने सरकार को आदेश दिया कि जिन परिवारों के घर बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए ध्वस्त किए गए हैं, उन्हें 10 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि अधिवक्ता जुल्फिकार हैदर, प्रोफेसर अली अहमद और अन्य पीड़ितों के घरों को गिराने से पहले उचित कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।

Supreme Court on Bulldozer Action: अतिक की जमीन समझ हुई थी कार्रवाई

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके घर जिस जमीन पर बने थे, उसे गलती से गैंगस्टर अतीक अहमद की संपत्ति मान लिया गया था, जिसकी 2023 में हत्या कर दी गई थी।

अदालत ने अधिकारियों द्वारा ध्वस्तीकरण नोटिस भेजने के तरीके पर भी सवाल उठाए। जब राज्य के वकील ने कहा कि नोटिस संपत्तियों पर चिपकाए गए थे, तो न्यायालय ने पूछा कि उन्हें पंजीकृत डाक से क्यों नहीं भेजा गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "ये मामले हमारी अंतरात्मा को झकझोरते हैं। अपीलकर्ताओं के आवासीय परिसरों को जबरन ध्वस्त कर दिया गया है।"

Bulldozer Action: वायरल वीडियो पर विपक्ष ने सरकार को घेरा

कोर्ट में जिस वायरल वीडियो का जिक्र हुआ, वह उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले के जलालपुर क्षेत्र का है। वीडियो में एक लड़की अपनी झुग्गी से भागते हुए दिख रही है, जिसने अपनी किताबें कसकर पकड़ रखी हैं। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया, और विपक्षी दलों ने राज्य सरकार की आलोचना की।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "अंबेडकर नगर में एक सरकारी अधिकारी अपनी सत्ता जमाने के लिए लोगों के घर तोड़ रहा है, जिससे एक छोटी बच्ची को अपनी किताबें बचाने के लिए भागना पड़ रहा है। ये वही भाजपा नेता हैं जो 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा देते हैं।"

कांग्रेस ने भी इस वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा, "बुलडोजर से ढहाई जा रही झुग्गी से एक छोटी बच्ची ने अपनी सबसे कीमती चीज बचाई - किताबें! यह वीडियो सत्ता में बैठे उन लोगों के लिए शर्म की बात है, जो बच्चों के हाथों से किताबें और उनके सिर से छत छीन लेते हैं।"

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य सरकार की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय बाल पुस्तक दिवस के महत्व को भी उजागर किया है कि शिक्षा और पुस्तकों तक हर बच्चे की पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए, न कि उसे इस तरह की त्रासदियों का सामना करना पड़े।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+