Places of Worship Act: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने किया स्वागत,इस वजह से की तारीफ
वर्शिप एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने स्वागत किया है। न्यायालय ने निचली अदालतों को निर्देश दिया है कि वे धार्मिक स्थलों, खास तौर पर मस्जिदों और दरगाहों को पुनः प्राप्त करने से संबंधित नए मुकदमों पर विचार न करें या मौजूदा मुकदमों पर अंतरिम या अंतिम आदेश न दें। यह निर्णय हिंदू पक्षकारों की ओर से वाराणसी में ज्ञानवापी और मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद जैसी मस्जिदों के सर्वेक्षण की मांग करने वाले लगभग 18 मुकदमों को प्रभावित करेगा।
मुस्लिम समुदाय के लिए राहत
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के वरिष्ठ सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राहत जताई। उन्होंने कहा कि पिछले सर्वेक्षण आदेशों से लोगों में बेचैनी पैदा हुई थी। सांप्रदायिक सद्भाव और सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने में इस कानून के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा,'हम पूजा स्थल अधिनियम मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्वागत करते हैं।'

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड (AISPLB) ने भी अदालत के फैसले की प्रशंसा की। महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने इसे "अनुकरणीय" बताया। उन्होंने इस बात पर जोर डाला कि मस्जिदों के नीचे शिवलिंग की खोज करने की घटनाएं किस तरह शांति को बाधित कर रही हैं। अब्बास ने कहा,'इस फैसले से देश का माहौल बेहतर होगा।ट उन्होंने धार्मिक स्थलों के महत्व को शांति के लिए महत्वपूर्ण बताया।
मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के कुछ हिस्सों को चुनौती देने वाली याचिकाओं की जांच कर रही है। यह कानून किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक चरित्र को 15 अगस्त, 1947 के अनुसार बदलने पर रोक लगाता है। पीठ ने जोर देकर कहा कि अन्य अदालतों को अगले आदेश जारी होने तक संबंधित मामलों पर आगे बढ़ने से बचना चाहिए।
विशेष पीठ ने स्पष्ट किया कि जब तक ये मामले सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन हैं,तब तक इन पर कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। न्यायालय का उद्देश्य किसी भी आगे की कानूनी कार्रवाई की अनुमति देने से पहले 1991 के अधिनियम की वैधता और दायरे का गहन मूल्यांकन करना है।
लंबित मुकदमों पर प्रभाव
इस निर्देश से लंबित मुकदमे भी प्रभावित होंगे। न्यायालयों को निर्देश दिया गया है कि वे सर्वोच्च न्यायालय के अगले आदेश तक सर्वेक्षणों से संबंधित मामलों सहित कोई भी प्रभावी अंतरिम या अंतिम आदेश पारित न करें।
अब्बास ने समाज में धार्मिक स्थलों की भूमिका पर आगे टिप्पणी की,'चाहे वह मंदिर हो, मस्जिद हो, गुरुद्वारा हो, चर्च हो या इमामबाड़ा हो, ये स्थान लोगों को शांति पाने के लिए हैं।' उन्होंने न्यायपालिका के फैसले का स्वागत करते हुए इसे पूरे भारत में शांति बनाए रखने की दिशा में एक कदम बताया।












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