भोजपुरी के गढ़ में हुई प्रारंभिक शिक्षा, अंग्रेजी के शिक्षक ने नाम की कई बड़ी उपलब्धियां, जानिए कुछ ख़ास

Success Story Doctor Manish Gaurav News Lucknow: कहते हैं अगर किसी मंजिल को पाने की जिद और जुनून हो तो वह मिल कर ही रहती है। ऐसी ही जिद और जुनून से अपनी मंजिल तक पहुंचने वाले डॉक्टर मनीष कुमार गौरव का संघर्ष कुछ कम नहीं रहा। मूलरूप से देवरिया जिले के गौरी बाजार के बेलवा पांडेय गांव के रहने वाले मनीष इन दिनों अंग्रेजी भाषा और विदेशी भाषा यूनिवर्सिटी लखनऊ में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत हैं। इसके साथ ही इनके नाम कई बड़ी उपलब्धियां भी हैं। वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने आप से खास बातचीत की।

वर्तमान में यहां हैं कार्यरत

वर्तमान समय में डॉक्टर मनीष कुमार गौरव अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय लखनऊ के अंग्रेजी विभाग में कार्यरत हैं जो BHU, JNU और DU की तरह ही सेंट्रल यूनिवर्सिटी है। यहां चयन होना काफी कठिन माना जाता है। आप 2017 से यहां अपनी सेवा दे रहे हैं।

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गोपालगंज में हुई प्रारंभिक शिक्षा
मनीष गौरव की प्रारंभिक शिक्षा बिहार के गोपालगंज से हुई। इंटर की शिक्षा देवरिया जिले से हुई। प्रोफेसर गौरव कहते हैं कि मैने 1998 में दसवीं परीक्षा पास की। उन दिनों लालू सरकार थी। अंग्रेजी अनिवार्य नहीं था। इसके बाद देवरिया से इंटर की पढ़ाई पूरी की। तत्पश्चात काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से बीए ऑनर्स किया। इसके बाद मैने दीन दयाल उपाध्या विश्वविद्यालय गोरखपुर से परास्नातक की डिग्री ली।

राज्यपाल ने किया सम्मानित
डॉक्टर मनीष कहते हैं कि एमए का जब परीक्षा परिणाम आया तब मैं सबसे उत्साहित हुआ। पूरे विश्वविद्यालय में मै सिंगल छात्र था जिसने प्रथम श्रेणी में परीक्षा उत्तीर्ण की हो। इसके लिए मुझे तत्कालीन राजपाल ने गोल्ड मेडल प्रदान किया था।

भोजपुरी क्षेत्र में अंग्रेजी से ऐसे हुआ लगाव

डॉक्टर मनीष कहते हैं कि उन दिनों अंग्रेजी की शिक्षा ग्रहण करना इसलिए कठिन था क्योंकि पूरा माहौल भोजपुरी और हिंदी का था। ऐसे में बहुत कम लोगों का आकर्षण अंग्रेजी के प्रति होता था। अंग्रेजी में मेरी रुचि का सबसे बड़ा कारण मेरी पारिवारिक पृष्ठ रही। मेरे नाना जी प्रधानाचार्य थे और अंग्रेजी विषय में उनकी अच्छी पकड़ थी। उनसे प्रेरणा मिली और मैने अंग्रेजी विषय में विशेष रुचि दिखाई।

अंग्रेजी विषय के साथ ज्यादा सुरक्षित था भविष्य डॉक्टर मनीष कहते हैं कि उन दिनों ऐसा भी था कि जिनकी पकड़ अंग्रेजी विषय पर ज्यादा थी उन्हें आसानी से नौकरी मिल जाती थी। ऐसे में मैने अंग्रेजी को और महत्व दिया।

आज जो कुछ हूं काशी और गोरखपुर विश्वविद्यालय की देन डॉक्टर मनीष कहते हैं कि आज मैं जो कुछ भी हूं वो काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर की वजह से। इन जगहों पर जो माहौल मिला जो शिक्षक मिले जो सहपाठी मिले उन्होंने जीवन को सबसे ज्यादा प्रभावित किया।

हासिल की हैं ये उपलब्धियां सब्जेक्ट एक्सपर्ट, एनसीइआरटी, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड विषय एक्सपर्ट, प्रयागराज, लखनऊ, अयोध्या, डीडीयू विश्वविद्यालय। सदस्य, बोर्ड ऑफ स्टडीज ऑफ डिफरेंट यूनिवर्सिटीज सदस्य, संपादकीय बोर्ड, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाएँ।

यह करने का है इरादा

डॉक्टर मनीष कहते हैं कि आगे मै कोशिश करूंगा कि हिंदी, संस्कृत साहित्य के विद्वानों की पुस्तके अंग्रेजी में अनुवाद कर सकूं। जिससे इसे अंग्रेजी भाषा के लोग भी आसानी से पढ़ सके।

युवाओं से अपील
क्रिकेट और शतरंज खेल में रुचि रखने वाले डॉक्टर मनीष कुमार युवाओं से अपील करते हुए कहते हैं कि हारने के लिए हमारे पास कुछ नहीं लेकिन पाने के लिए बहुत कुछ है। सही गुरु और सही क्षेत्र का चुनाव कर सफलता पाई जा सकती है।

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