• search
उत्तर प्रदेश न्यूज़ के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  

मोदी ने भी छुए थे जिनके पैर, बोस के ड्राइवर निजामुद्दीन का 117 साल की उम्र में इंतकाल

By Ashwani Tripathi
|

वाराणसी। आजाद हिंद फौज के एक मात्र सजीव गवाह और सुभाष चंद्र बोस के अंगरक्षक कर्नल निजामुद्दीन का सोमवार सुबह करीब 4 बजे लंबी बीमारी के बाद इंतकाल हो गया। 117 सालों तक लोगों को सुभाष चंद्र बोस की अनसुनी कहानियां बताने वाले कर्नल साहब के जीवन की भी कुछ अनछुई दास्तां है। जिससे हम आपको रूबरू कराएंगे। आजाद हिंद फौज के गठन से लेकर सुभाष चंद्र बोस से आखिरी मुलाकात तक कई घटनाओं के गवाह रहे कर्नल निजामुद्दीन अब हमारे बीच नहीं रहे।

Read more: पति-पत्नी चुनावी मैदान में आजमा रहे हैं अपना-अपना भाग्य, पति बरेली शहर तो पत्नी कैंट से प्रत्याशीRead more: पति-पत्नी चुनावी मैदान में आजमा रहे हैं अपना-अपना भाग्य, पति बरेली शहर तो पत्नी कैंट से प्रत्याशी

कर्नल निजामुद्दीन थे सुभाष चंद्र के सच्चे सेवक, कई बार उनके लिए खाई थी गोलियां

कर्नल निजामुद्दीन थे सुभाष चंद्र के सच्चे सेवक, कई बार उनके लिए खाई थी गोलियां

117 वर्षीय कर्नल साहब आजमगढ़ के मुबारकपुर में जन्मे थे। कर्नल निजामुद्दीन बताया करते थे कि वो आजाद हिंद फौज में नेता जी सुभाष चंद्र बोस के ड्राइवर और अंगरक्षक थे। जब 1944 में नेता जी और अंग्रेजों का सामना हुआ था तो वो भी उस लड़ाई का हिस्सा थे। यही नहीं उन्होंने तो अपने पीठ पर बोस बाबू को बचाने के लिए गोली भी खाई थी। तो सुभाष चंद्र बोस पर निशाना लगाने वाले अंग्रेजी जवान को अपनी बंदूक से मौत के घाट उतार था।

कर्नल का इलाज लड़ाई में साथी रहीं कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया था। उन्होंने प्राकृतिक तौर पर पेड़ की पत्तियों और फौज में तत्कालीन मौजूदा दवाइयों से उनका इलाज किया। वहीं छितांग नदी के पास 20 अगस्त 1947 को बोस बाबू से आखिरी मुलाकात हुई। जिसके बाद उन्हें ये आदेश भी मिला था कि आजाद हिंद फौज से जुड़े हुए सारे दस्तावेजों को जला दिया जाए। क्योंकि ब्रिटिश काल में यह समझौता हो चूका था कि हिन्द फौज के किसी भी शख्स को बक्शा नहीं जाएगा।

कर्नल निजामुद्दीन ने ही किया था बोस बाबू की करेंसी का खुलासा

कर्नल निजामुद्दीन ने ही किया था बोस बाबू की करेंसी का खुलासा

कर्नल निजामुद्दीन काफी वृद्ध हो चुके थे और लम्बी बीमारी से ग्रसित थे। वो ये भी कहा करते थे की फौज के गठन के बाद उस समय बोस बाबू ने अपनी कैरेंसी भी छपवाई थी। जो वर्मा से छप कर आती थी और उसे मांडले कहा जाता था। उन्हें 18 रुपए तनख्वाह मिला करती थी। हिन्द फौज ने पहली बार 500 का नोट प्रचलन में लाया था और ये नोट भारत के साथ-साथ रंगून और सिंगापूर में प्रचलन में था। जिस पर सुभाष चन्द्र बोस की तस्वीर छपी हुई थी।

ड्राइवर ही नहीं बोस बाबू के थे बेहद करीबी

ड्राइवर ही नहीं बोस बाबू के थे बेहद करीबी

कर्नल निजामुद्दीन आजाद हिंद फौज में नेता जी के ड्राइवर के हैसियत से कार्यरत थे। लेकिन ये सिर्फ कहने की बात थी ये नेता जी के सबसे करीबी साथी और एक अच्छे गनर भी थे। जो उस समय के 12 सिलेंडर लगी गाड़ी को चलाया करते थे। जिसका गवाह था उनके पास आजाद हिंद फौज का ड्राइविंग लाइसेंस। बता दें कि एक स्वागत समारोह में कर्नल निजामुद्दीन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पैर छूकर सम्मानित किया था।

स्वतंत्रता संग्राम के इस सेनानी को नहीं मिला सरकारी सम्मान

स्वतंत्रता संग्राम के इस सेनानी को नहीं मिला सरकारी सम्मान

हालांकि बीते लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोहनिया विधानसभा के जगतपुर इंटर कॉलेज में अपने विजय श्री के लिए कर्नल निजामुद्दीन का आशीर्वाद लिया था। लेकिन ये चौकाने वाली बात है कि आजतक किसी भी सरकार ने ये कभी भी नहीं माना कि कर्नल निजामुद्दीन नेता जी सुभाष चंद्र बोस के करीबी थे। उन्होंने आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी। बावजूद इसके आज तक न इन्हें पेंशन मिला और न कोई कभी इनका हालचाल जानने इनके दरवाजे पर दस्तक देने ही आया।

<strong>Read more:डॉक्‍टरों ने बताया- सबसे अच्‍छा उपचार जयललिता को दिया गया, अंग खराब होने के चलते हुई मौत</strong>Read more:डॉक्‍टरों ने बताया- सबसे अच्‍छा उपचार जयललिता को दिया गया, अंग खराब होने के चलते हुई मौत

English summary
Neta ji Subhash chandra Bose bodyguard Colonel Nizamuddin died at 117 years. Pm modi give ritual
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X