Exclusive Interview: मोबाइल बैन पर सपा विधायक जाहिद बेग बोले- संसद में प्रतिबंध नहीं तो विधानसभा में क्यों?
UP Vidhansabha Ka Satra: उत्तर प्रदेश में विधानसभा सत्र के पहले दिन सपा विधायकों ने विधानसभा की नई नियमावली को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। सपा के कुछ विधायक काले कपड़ों में विधानसभा पहुंचे थे तो कोई साइिकल से पहुंचा और अपने कपड़ों पर सरकार के खिलाफ नारे छपवा रखे थे। भदोही से सपा के विधायक जाहिद बेग ने विधानसभा में मोबाइल बैन को लेकर कहा कि सरकार सिर्फ अपनी आवाज को ही कानून बनाना चाहती है। सदन के भीतर मोबाइल पर बैन लगाने का कोई तुक नहीं है।

जाहिद बेग ने विधानसभा में वनइंडिया से खास बातचीत के दौरान यह बातें कहीं। जाहिद बेग ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की विधानसभा में मोबाइल बंद कर दिया गया। इससे क्या मिलेगा। संसद में भी मोबाइल ले जाने पर प्रतिबंध नहीं है तो फिर यहां क्यों। दरअसल सरकार अपनी आवाज को ही कानून बनाना चाहती है।
मुद्दों पर चर्चा से भाग रही है सरकार
जाहिद बेग से जब यह सवाल किया गया कि सदन के भीतर मोबाइल पर प्रतिबंध लगाना तो विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर हुआ है, इसमें सरकार का क्या रोल है, इसको लेकर उन्होंने कहा कि सबकुछ सरकार के इशारे पर ही हो रहा है। सरकार ने केवल चार दिन का सत्र बुलाया है। चार दिन में क्या होगा। चार दिन में सदन निपटाकर सरकार मुद्दों से भागना चाहती है।
किसान विरोधी है यूपी सरकार
जाहिद बेग ने कहा कि सरकार पूरी तरह से किसान विरोधी है। किसान को पानी नहीं मिल रहा है। महिलाओं के साथ आज भी बलात्कार हो रहे हैं। दलितों को पिसाब पिलाया जा रहा है। सरकार कुछ नहीं कर पा रही है। सरकार में अपराधी बेलगाम हो गया है। मुख्यमंत्री हमारे जिले में कई वादे करके गए हैं लेकिन आज तक वो वादे पूरे नहीं हुए। विपक्ष के पास बहुत सारे मुद्दे हैं। किसानों का मुद्दा, महिलाओं का मुद्दा हो या फिर बेरोजगारी का मुद्दा हो। मुद्दों की कमी नहीं है।
मोबाइल बैन पर सपा ने खड़े किए सवाल
नई नियमावाली को लेकर विपक्ष विरोध कर रहा है ऐसा क्यों, इसपर जाहिद बेग ने कहा कि दुनिया में कहीं भी मोबाइल पर प्रतिबंध नहीं है। संसद में ले जाने पर प्रतिबंध नहीं है तो फिर यहां क्यों यह नियम लगाया जा रहा है। सरकार अपनी आवाज को ही कानून बनाना चाहती है। सरकार के दबाव में विधानसभा में इस तरह के नियम लाए गए हैं।
केवल चार दिन का सत्र बुलाने को लेकर पूछे गए सवाल पर जाहिद बेग ने कहा कि,
आप भी जानते हैं कि कुछ फैसले विधानसभा अध्यक्ष को सरकार के दबाव में लेने पड़ते हैं। अध्यक्ष की चलती तो सत्र कम से कम 15 दिन का चला होता लेकिन सरकार के इशारे पर इसे केवल चार दिन का कर दिया गया। लेकिन फिर भी जो समय मिला है उसके अंदर यूपी की ज्वलंत समस्याओं को सदन के भीतर उठाने का प्रयास किया जाएगा।
लंबे समय बाद विधानसभा के नियमों में हुआ बदलाव
दरअसल, विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर इस बार सदन की कार्यवाही में पहली बार विधायकों पर भी मोबाइल ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि इसको लेकर सपा और कांग्रेस की तरफ से विरोध दर्ज कराया गया था लेकिन विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से राहत नहीं मिली। सत्र की कार्यवाही में 65 साल बाद नए नियम लागू किए गए हैं।
मोबाइल बैन पर सपा-कांग्रेस ने जताया था विरोध
सत्र से एक दिन पहले भी सर्वदलीय बैठक में यह मुद्दा सपा और कांग्रेस की तरफ से उठाया गया था लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इस मांग को गंभीरता से नहीं लिया जिसके बाद मंगलवार से शुरू हो रहे सत्र के पहले दिन ही इस मुद्दे को लेकर सपा के सदस्यों ने अपने तरीके से विरोध दर्ज कराया। हालांकि सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही दिवंगत बीजेपी विधायक आशुतोष टंडन और कुछ पूर्व विधायकों की निधन की सूचना के बाद बुधवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।












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