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पत्नी की हत्या का आरोप, पार्टी से किए गए आउट... अब हुए कांग्रेस में शामिल, जानिए कौन हैं अमनमणि त्रिपाठी?

Amanmani Tripathi Joins Congress: लोकसभा चुनाव नजदीक है और पूरे देश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। इसी बीच यूपी की नौतनवां सीट से पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी शनिवार को कांग्रेस में शामिल हो गए।

अमनमणि बहुजन समाज पार्टी का हिस्सा हुआ करते थे। पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें बसपा से निष्कासित किया गया था। एआईसीसी महासचिव और राज्य के प्रभारी अविनाश पांडे ने उनका पार्टी में स्वागत किया।

Who is Amanmani Tripathi

पांडे ने एक्स पर त्रिपाठी के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए पोस्ट किया, "नौतनवा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक श्री अमन मणि त्रिपाठी, राहुल गांधी जी और कांग्रेस पार्टी की न्याय की लड़ाई में विश्वास व्यक्त करते हुए कांग्रेस में शामिल हो गए।"

कौन हैं अमनमणि त्रिपाठी?
अमनमणि यूपी सरकार में मंत्री रह चुके अमरमणि त्रिपाठी और मधु मणि त्रिपाठी के बेटे हैं। उनका जन्म 12 जनवरी, 1982 को गोरखपुर में हुआ था। वो एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं और उत्तर प्रदेश की 17वीं विधान सभा के सदस्य रह चुके हैं। एक स्वतंत्र राजनेता के रूप में अमनमणि ने उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के 2017-2022 तक नौतनवा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है।

गोरखपुर से हुई है स्कुलिंग
अमन की स्कूली शिक्षा स्प्रिंगर पब्लिक स्कूल, गोरखपुर से हुई है। साल 2012 में उन्होंने दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उनके पिता, अमरमणि त्रिपाठी, लक्ष्मीपुर (विधानसभा क्षेत्र) से चार बार विधायक रह चुके हैं और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी थे।

2012 में सपा की टिकट पर पहली बार लड़े विधानसभा चुनाव
अमन पहली बार उत्तर प्रदेश की 16वीं विधान सभा (2012) चुनाव में चुनाव लड़े। उन्होंने समाजवादी पार्टी के सदस्य के रूप में नौतनवा विधानसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार कुंवर कौशल किशोर सिंह से 7,837 (4.15%) वोटों के अंतर से हार गए।

पत्नी की हत्या का आरोप लगने के बाद सपा ने नहीं दिया टिकट
उत्तर प्रदेश की 17वीं विधान सभा (2017) चुनाव में, पत्नी की हत्या के मामले में नाम आने के बाद त्रिपाठी को समाजवादी पार्टी ने टिकट देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार कुंवर कौशल किशोर सिंह को 32,256 (15.26%) वोटों के अंतर से हराकर विधायक चुने गये।

अमन के पेरेंट्स, अमरमणि और मधुमणि को मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में दोषी ठहराया गया था। दोनों को कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उम्रकैद की सजा मिली थी। 16 साल की सजा पूरी करने के बाद, 2023 में उन्हें रिहा कर दिया गया था।

सड़क हादसे में हुई थी पत्नी की मौत, सास ने लगाया हत्या का आरोप
अमनमणि त्रिपाठी के ऊपर अपनी पत्नी, सारा की हत्या का आरोप लगा था। सारा की मां सीमा सिंह ने अमन मणि और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ उनकी बेटी की हत्या के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि अमन मणि के माता-पिता सारा के साथ उनकी शादी के खिलाफ थे। साल 2015 में एक सड़क हादसे में अमनमणि की पत्नी सारा की मौत हो गई थी। सारा की मां ने इसे हादसा नहीं हत्या बताया था।

पत्नी की हत्या के आरोप में अमन को 25 नवंबर 2016 को जेल भेजा गया था। 18 फरवरी 2017 को उनके खिलाफ आरोपपत्र दायर किया गया था। एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मार्च 2017 में अमन को बेल मिल गई।

बसपा ने दिखाया था पार्टी से बाहर का रास्ता
बसपा ने अमन को यूपी निकाय चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से बाहर निकाल दिया था। अब अमनमणि कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। उन्हें महाराजगंज से टिकट दिए जाने की चर्चा है, हालांकि इस सीट पर कांग्रेस की सोशल मीडिया विभाग की प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत को भी दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। 2019 के आम चुनाव में उन्हें यहां हार का सामना करना पड़ा था।

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