Samajwadi party में शिवपाल को मिलेगी आजम खां-मुलायम की जगह, अखिलेश ने निभाई वफादारी?
उत्तर प्रदेश में मैनपुरी लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी को मिली शानदार जीत के बाद सपा के चीफ अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल के बीच मनमुटाव लगभग खत्म हो गया है।

Samajwadi partyin UP: उत्तर प्रदेश में मैनपुरी लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी को मिली शानदार जीत के बाद सपा के चीफ अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल के बीच मनमुटाव लगभग खत्म हो गया है। चुनाव के बाद इसके संकेत उस समय मिले जब अखिलेश ने नई कार्यकारिणी में शिवपाल यादव को राष्ट्रीय महासचिव बनाने की घोषणा कर दी थी। अब अखिलेश यादव ने बड़ा दिल दिखाते हुए चाचा शिवपाल को विधानसभा में बगल वाली सीट आरक्षित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध किया है। बताया जा रहा है कि इस सीट पर कभी सपा के दिग्गज नेता और अखिलेश के करीबी आजम खां बैठा करते थे।

विधानसभा में अखिलेश के बगल में नजर आएंगे शिवपाल
दरअसल अखिलेश के इस कदम को समाजवादी पार्टी के भीतर शिवपाल यादव के बढ़ते कद के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। शिवपाल यादव अब अपने भतीजे और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के बगल में बैठेंगे। अखिलेश राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता भी हैं। अखिलेश के बगल की जो सीट शिवपाल को आवंटित हुई है यह सीट पहले आजम खान को आवंटित की गई थी। हालांकि एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद विधानसभा की सदस्यता खो देने के बाद से खाली थी।

पार्टी कार्यालय में भी वो कमरा मिलेगा जहां मुलायम बैठा करते थे
अखिलेश के एक के बाद एक इन फैसलों ने पार्टी में शिवपाल के कद बढ़ने से उन अटकलों पर विराम लग गया है कि चाचा-भतीजा की दोस्ती 2024 के विधानसभा चुनाव तक नहीं चल सकती है। सूत्रों ने कहा कि शिवपाल को जल्द ही पार्टी मुख्यालय में एक कमरा आवंटित किया जाएगा, जहां मुलायम सिंह यादव बैठते थे। सूत्रों की माने तो अखिलेश यादव अब अपने चाचा को पूरे सम्मान के साथ पार्टी में रखना चाहते हैं इसलिए अब उन्हें वो जगह दी जाएगी जहां कभी शिवपाल के बड़े भाई मुलायम सिंह बैठा करते थे।
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मैनपुरी चुनाव के बाद अखिलेश-शिवपाल के संबंधों में आई मजबूती
हालांकि शिवपाल ने हमेशा सपा विधायक के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ा और जीता है, लेकिन पहले उन्हें विधानसभा में विपक्षी पक्ष की किसी भी अग्रिम पंक्ति में सीट नहीं दी गई थी। दरअसल, मैनपुरी में हुए उपचुनाव के बाद अखिलेश और शिवपाल के बीच संबंधों को और मजबूती मिली है। मैनपुरी उपचुनाव के बाद शिवपाल ने कई जिलों का दौरा किया जहां उन्हें सपा की तरफ से हाथों हाथ लिया गया। इसके बाद अखिलेश ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर शिवपाल के लिए पहली पंक्ति की सीट की मांग की थी।

अखिलेश ने हाल ही में शिवपाल को बनाया था राष्ट्रीय महासचिव
हालांकि, शिवपाल और अखिलेश के मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में हाथ मिलाने के बाद से चीजें बहुत बदल गई हैं, जिस दौरान अखिलेश द्वारा शिवपाल को औपचारिक रूप से सपा में शामिल किया गया था। सपा ने तब घोषणा की थी कि शिवपाल के करीबी राजनीतिक सहयोगियों को भी सपा के भीतर सम्मान और सम्मान के पद दिए जाएंगे। समाजवादी पार्टी ने हाल ही में अपने राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया था। सपा ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से नवनिर्वाचित और मनोनीत पदाधिकारियों की सूची जारी की थी। इसमें शिवपाल यादव को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था।

शिवपाल के प्रति वफादार नजर आ रहे अखिलेश
मैनपुरी चुनाव में सपा को मिली शानदार जीत के बाद अब अखिलेश पूरी तरह से अपने चाचा शिवपाल के प्रति वफादार नजर आते दिख रहे हैं। हाल ही में अखिलेश ने शिवपाल के आवास पर जाकर करीब एक घंटे तक उनके साथ बातचीत की थी। इस बातचीत के कई मायने निकाले जा रहे हैं। सपा के एक पदाधिकारी कहते हैं कि शिवपाल-अखिलेश की एकजुटता सपा के लिए काफी मायने रखती है। जिस तरह से दोनों के एक होने का संदेश मैनपुरी में गया उसी तरह से सपा चाहती है कि पूरे प्रदेश में इसका संदेश जाए। इसके लिए अब दोनों ही तरफ से कोशिशें हो रही हैं। इसका फायदा निश्चित तौर पर आने वाले चुनावों में सपा को मिलेगा।












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